शिमला से बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आई है। हिमाचल हाईकोर्ट ने सरकारी खर्चों में कटौती और संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है।
हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा जारी सर्कुलर के तहत अब न्यायाधीशों और कर्मचारियों के लिए कई नए निर्देश लागू किए गए हैं। इनका मुख्य उद्देश्य ईंधन की बचत, प्रशासनिक खर्चों में कमी और कार्य व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना बताया गया है।
जजों के लिए कार पूलिंग व्यवस्था
सर्कुलर के अनुसार अब हाईकोर्ट के न्यायाधीश जरूरत के अनुसार कार पूलिंग को बढ़ावा देंगे। यानी एक ही वाहन में एक से अधिक जज यात्रा कर सकेंगे, ताकि फ्यूल की खपत कम हो और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।
हाईकोर्ट प्रशासन ने इसे ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
कर्मचारियों को मिलेगी वर्क फ्रॉम होम सुविधा
नई व्यवस्था के तहत हाईकोर्ट रजिस्ट्री की प्रत्येक शाखा और सेक्शन में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन तक वर्क फ्रॉम होम की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि इसके लिए संबंधित रजिस्ट्रार की मंजूरी अनिवार्य होगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वर्क फ्रॉम होम के बावजूद कार्यालय का काम प्रभावित नहीं होना चाहिए और पर्याप्त कर्मचारी दफ्तर में मौजूद रहेंगे
हर समय उपलब्ध रहना होगा
सर्कुलर में कहा गया है कि जिन कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी जाएगी, उन्हें फोन पर हर समय उपलब्ध रहना होगा। जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत कार्यालय पहुंचना होगा।
संबंधित रजिस्ट्रार हर सप्ताह रोस्टर तैयार करेंगे ताकि कार्य व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
जरूरत पड़ने पर खत्म हो सकती है सुविधा
हाईकोर्ट प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी शाखा में कार्य की प्रकृति को देखते हुए वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था प्रभावी नहीं लगती, तो संबंधित रजिस्ट्रार इस सुविधा को सीमित या समाप्त कर सकते हैं।
यह आदेश भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग और सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर लागू किया गया है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से जारी इस सर्कुलर को प्रशासनिक सुधार और खर्चों में कमी की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
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