सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्पाइसजेट एयरलाइन को निर्देश दिया कि वह ₹144 करोड़ जमा करने के लिए समय बढ़ाने की अपनी मांग लेकर दिल्ली हाई कोर्ट जाए। यह मामला मीडिया दिग्गज कलानिधि मारन और काल एयरवेज के साथ चल रहे कानूनी विवाद से जुड़ा है।
कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने स्पाइसजेट की दलीलों पर सुनवाई की। एयरलाइन की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण एयरलाइन के कामकाज और आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ा है। उन्होंने सरकार के 5,000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज (बेलआउट प्रोग्राम) का हवाला देते हुए पैसे जमा करने के लिए तीन महीने का समय मांगा। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि हजारों कर्मचारियों के भविष्य को देखते हुए सार्वजनिक हित को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट जाने की सलाह दी
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने समय देने से इनकार कर दिया और एयरलाइन को हाई कोर्ट जाने की सलाह दी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि मई में घोषित सरकारी योजना या पश्चिम एशिया संकट को समय बढ़ाने का आधार नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि एयरलाइन की खराब वित्तीय स्थिति कोई नई बात नहीं है और इस पर पहले भी विचार किया जा चुका है।
इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने 4 मई को स्पाइसजेट और इसके प्रमोटर अजय सिंह की समीक्षा याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने उन पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था और तुरंत ₹144.51 करोड़ जमा करने का आदेश दिया था। जनवरी में कोर्ट ने एयरलाइन को ₹194 करोड़ की देनदारी के बदले ₹144 करोड़ जमा करने के लिए छह हफ्ते का समय दिया था, जिसे मार्च में चार हफ्ते के लिए और बढ़ाया गया था।
स्पाइसजेट ने पैसे के बदले गुरुग्राम में एक कमर्शियल प्रॉपर्टी को सुरक्षा (सिक्योरिटी) के तौर पर रखने का प्रस्ताव दिया था, जिसे कोर्ट ने नहीं माना। कोर्ट का कहना है कि एयरलाइन को पहले भी संपत्ति बेचकर पैसे जमा करने का समय दिया गया था, लेकिन उन्होंने इस रियायत का फायदा नहीं उठाया।
क्या है मामला?
यह मामला स्पाइसजेट का मालिकाना हक एयरलाइन के नियंत्रक शेयरधारक सिंह को हस्तांतरित होने के बाद, मारन के पक्ष में वारंट जारी न किए जाने से जुड़े विवाद से उत्पन्न हुआ है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब फरवरी 2015 में एयरलाइन में वित्तीय संकट के बीच सिंह ने स्पाइसजेट का नियंत्रण वापस अपने हाथों में ले लिया। मारन और कल एयरवेज ने फरवरी 2015 में स्पाइसजेट में अपने पूरे 35.04 करोड़ इक्विटी शेयर जो कि 58.46 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर थे एयरलाइन के सह-संस्थापक सिंह को मात्र 2 रुपये में हस्तांतरित कर दिए थे।
मई 2024 में, हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने एकल-न्यायाधीश बेंच के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसने एक मध्यस्थता फैसले को बरकरार रखा था। उस फैसले में स्पाइसजेट और सिंह को मारन को 579 करोड़ रुपये (ब्याज सहित) वापस करने का निर्देश दिया गया था।
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा और न्यायमूर्ति रविंदर दुडेजा की बेंच ने सिंह और स्पाइसजेट द्वारा दायर उन अपीलों को स्वीकार कर लिया, जिनमें एकल-न्यायाधीश बेंच के 31 जुलाई 2023 के आदेश को चुनौती दी गई थी। इसके साथ ही बेंच ने इस मामले को संबंधित अदालत के पास वापस भेज दिया ताकि याचिकाओं पर नए सिरे से विचार किया जा सके।
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