इस अध्याय में किसी बात के होते हुए भी, किसी राज्य के उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति, किसी भी समय, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से किसी व्यक्ति से, जो उस उच्च न्यायालय या किसी अन्य उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का पद धारण कर चुका है, उस राज्य के उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में बैठने और कार्य करने का अनुरोध कर सकेगा और प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जिससे इस प्राकर अनुरोध किया जाता है, इस प्रकार बैठने और कार्य करने के दौरान ऐसे भत्तों का हकदार होगा जो राष्ट्रपति आदेश द्वारा अवधारित करे और उसको उस उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सभी अधिकारिता, शक्तियाँ और विशेषाधिकार होंगे, किंतु उसे अन्यथा उस उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नहीं समझा जाएगा:
1 1 नवंबर, 1956।
2 संविधान (चौवनवाँ संशोधन) अधिनियम, 1986 की धारा 3 द्वारा (1-4-1986 से) खंड (1) के स्थान पर प्रतिस्थापित।
3 संविधान (सातवाँ संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 14 द्वारा '' भारत के राज्यक्षेत्र में के'' शब्दों का लोप किया गया।
4 संविधान (पंद्रहवाँ संशोधन) अधिनियम, 1963 की धारा 5 द्वारा अंतःस्थापित। संविधान (सातवाँ संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 14 द्वारा मूल खंड (2) का लोप किया गया।
5 संविधान (सातवाँ संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 15 द्वारा अनुच्छेद 224 के स्थान पर प्रतिस्थापित।
6 संविधान (पंद्रहवाँ संशोधन) अधिनियम, 1963 की धारा 6 द्वारा '' साठ वर्ष'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
7 संविधान (पंद्रहवाँ संशोधन) अधिनियम, 1963 की धारा 7 द्वारा अंतःस्थापित।
(4) इस अनुच्छेद द्वारा उच्च न्यायालय को प्रदत्त शक्ति से, अनुच्छेद 32 के खंड (2) द्वारा उच्चतम न्यायालय को प्रदत्त शक्ति का अल्पीकरण नहीं होगा।

