झारखंड हाईकोर्ट ने एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि यदि प्रार्थियों को 22 जून तक वैधानिक लाभ नहीं दिया गया तो उच्च शिक्षा निदेशक का वेतन रोक दिया जाएगा। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने वसंत कुमार साहू समेत 15 प्रार्थियों की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। सुनवाई के दौरान उच्च शिक्षा निदेशक वर्चुअल कोर्ट में पेश हुए। इससे पहले तीन बार की सुनवाई में निदेशक ने अंडरटेकिंग देते हुए प्रार्थियों को पेंशन और बकाया भुगतान सुनिश्चित कराने का आश्वासन दिया था। उन्होंने यह भी बताया था कि मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई है, जो 16 सप्ताह में भुगतान सुनिश्चित करेगी। हालांकि अदालत ने 12 सप्ताह के भीतर भुगतान का निर्देश दिया था बावजूद इसके अब तक भुगतान नहीं किया गया।
अवमानना याचिका
प्रार्थियों ने एकल पीठ के आदेश का अनुपालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर की है। सभी प्रार्थी बीएन जालान कॉलेज और सिसई (गुमला) के तृतीय व चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी रहे हैं, जो वर्ष 2022-23 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन्हें अब तक पेंशन और चतुर्थ से सप्तम वेतनमान का लाभ नहीं मिला है।
प्रार्थियों का सेवा समायोजन रांची विश्वविद्यालय ने वर्ष 2005 में ही स्वीकार कर लिया था, लेकिन उच्च शिक्षा विभाग ने इसकी स्वीकृति नहीं दी। इसके कारण समान पदों पर कार्यरत अन्य कर्मचारियों को जहां सप्तम वेतनमान का लाभ मिल रहा है, वहीं प्रार्थी अब भी चतुर्थ वेतनमान पर ही सीमित हैं।
सेवा समायोजन
प्रार्थियों का सेवा समायोजन रांची विश्वविद्यालय ने वर्ष 2005 में ही स्वीकार कर लिया था, लेकिन उच्च शिक्षा विभाग ने इसकी स्वीकृति नहीं दी। इसके कारण समान पदों पर कार्यरत अन्य कर्मचारियों को जहां सप्तम वेतनमान का लाभ मिल रहा है, वहीं प्रार्थी अब भी चतुर्थ वेतनमान पर ही सीमित हैं।
Picture Source :

