Citation : 2025 Latest Caselaw 2358 MP
Judgement Date : 1 August, 2025
1 CRA-3281-2025
IN THE HIGH COURT OF MADHYA PRADESH
AT JABALPUR
CRA No. 3281 of 2025
(SIJO CHANDAN Vs THE STATE OF MADHYA PRADESH )
Dated : 01-08-2025
Shri Abhinav Kumar Tiwari, learned counsel for the appellant.
Shri Ajay Shukla, learned Public Prosecutor for the respondent/State.
Heard on I.A. No.7871/2025, an application seeking condonation of 833 delay in filing this appeal.
On due consideration, I.A. No.7871/2025 is allowed. Delay of 833
days in filing this appeal is hereby condoned as there appears to be clear lapse on the part of various functionaries of the Justice Delivery System including District Legal Aid Officers, Secretary, DLSA etc. For the reasons stated separately, action is sought to be initiated but as far as present appeal is concerned, it is admitted.
Shri Ajay Shukla, learned Public Prosecutor submits that he adopts objections filed in Cr.A. No.2484/2023 for the co-accused.
In pursuance to the order of this Court, we have received a report dated 26/04/2025 filed by Shri Rajeev Kumar Ayachi, Principal District
Judge (Inspection), High Court, Zone Indore (M.P.) vide D.O. No.111. In this report, there are glaring contradictions, some of which are being highlighted for ready reference. It is mentioned that appellant-Sijo Chandan had obtained copy of the judgment and intended filing of the appeal through his family members on 22/08/2023 which is mentioned on the 'History Ticket of the Bandi'. It is mentioned that Sijo Chandan wanted to engage a private
2 CRA-3281-2025 counsel.
In para-2(a) of Part-A, it is mentioned that the purpose of the Prison Legal Aid Clinics (PLACs) is to ensure that at all times no person is without legal representation at any stage of the criminal proceeding and generate awareness about the same. Thereafter in Part-F which deals with Legal Assistance in filing petitions/jail appeals in the High Court/Supreme Court by convict prisoners, it is mentioned as under :
"15. The DLSA, in coordination with the prison and the PLAC shall ensure smooth filing of petitions of convicts in High Court and Supreme Court:
15.1 As soon as the order rejecting bail or an order of
conviction is pronounced by the Court (District Court or High Court), a prisoner shall be informed by the PLAC regarding the right to bail/appeal/review/revision in the High Court/Supreme Court and the process of filing the same.
15.2 Steps must be taken promptly through PLAC to apply for appointment of lawyer by the High Court Legal Services Committee (HCLSC) or the Supreme Court Legal Services Committee (SCLSC), as the case may be. A record of such application must be made in the designated register/database.
15.3 to 15.8 ............................ 15.9 DLSA may undertake to jointly conduct camps with HCLSC/SCLSC to apprise prisoners of the various remedies in
3 CRA-3281-2025 law for bail/appeal/review/revision as well as writ remedies."
Thereafter in Part-II in para-23, 23(1), 23(2), 23(3), 23(4), 23(5) and para- 24, it is noted as under :
'' 23. उपरो विभ न िनयमो, रे गुलेश स एवं दशा-िनदश के अ ययन से िन निल खत प र थितयां सम आती है क विभ न जेल अधी क , जला एवं हाईकोट के विधक सहायता अिधकार क रपोट एवं डालसा सिचव क रपोट के आधार पर अिभयु बंद सीजो चंदन के संबंध म 833 दन के वलंब से हुई अपील के संबंध म यह मह वपूण त य आपके सम है : -
(1) य द कोई बंद अिभयु विधक सहायता िलए जाने से इं कार करता है और अपनी अपील बाहर से अथात ् ायवेट अिधव ा के ारा अपील तुत करना चाहता है , तब भी ऐसी दशा म ऐसे बंद /अिभयु से हर मह ने बार-बार पुनः विधक सहायता क सहायता उपल ध कराए जाने का ताव दया जाना चा हए, ऐसा करने से एक ओर जहां जेल के अंदर िन त संसाधन वाला असमथ बंद /अिभयु आिथक परे शानी या िनजी अिधव ा से उिचत संपक या वातालाप के अभाव म अिधव ा िनयु कर पाने म असमथ हो जाता है तो पुनः ऐसी यव था होना चा हए, जससे जेल म जेल अधी क या पैरािलगल वािलं टयस या जेल का लॉ आ फसर या सिचव जला विधक सेवा ािधकरण या विधक सहायता अिधकार अपने मािसक िनर ण या रपोट के अनुसार ऐसे अन र ेजे टे ड बंद /अिभयु से यथासमय अपील िनयमानुसार तुत करा सकगे।
(2) वतमान वचारणीय बंद अिभयु सीज चंदन के संबंध म यह चूक हुई है क उसके ारा कारावास के आरं िभक मह न म ह विधक सहायता लेने से इं कार कया गया। बाहर से अथात ् िनजी अिधव ा िनयु करने का वचार य कया गया और संभवतः आिथक कारण या उिचत संपक के अभाव म बंद /अिभयु सीजो चंदन उस समय आपरािधक िनयमानुसार न वयं तुत करा सका, न ह ऐसी यव था रह क बार-बार हर मह ने बंद /अिभयु सीजो चंदन को विधक सहायता क मदद ता वत नह ं क जा सक , जसका प रणाम यह हुआ क बंद /अिभयु उपरो 833 दन के वलंब बाद ह अपील तुत करा सका।
4 CRA-3281-2025 (3) उपरो संपूण जांच के दौरान यह भी त य सम नह ं आया क कोई सं थागत या वक ल या जेल म ऐसी समझाईश क कोई यव था नह ं थी, जो बंद /अिभयु सीजो चंदन को हर कुछ मह न म अथात ् समय अंतराल पर पुनः यह समझाईस दे ती क बंद /अिभयु उस समय यथाशी विधक सहायता क ओर से जेल अपील को तुत करा लेता और प ा वत अव था म अपने संतोष के िलए िनजी अिधव ा को अपील तक आ द के िलए िनयु करा सकता था। दस ू रे श द म यथासंभव ऐसे बंद /अिभयु क शी ता से अपील ा ट होकर तुत करने हे तु द जावे, समझाया जाए और उसे यह वक प भी दया जावे क फर य द वह चाहे तो और अिधक मह वपूण त य और विधक ब द ु िनजी अिधव ा के मा यम से तुत करा सके। ऐसा होने पर उपरो बंद /अिभयु सीजो चंदन जैसा अपील तुित का आसामा य वलंब टाला जा सके। उपरो जांच के दौरान ऐसा कोई ावधान, िनयम, िनदश या रे गुलेशन सम नह ं आया क ऐसा बंद /अिभयु , जसके एक से यादा मुकदमे चल रहे हो, सभी मुकदम लं बत हो या कुछ म िनणय या सजा हो गई हो और कुछ वचारण हे तु लं बत हो। वशेष तौर पर जब क ऐसे करण दरू -दरू के शहर के यायालय म चल रहे हो, ऐसी प र थितय म बंद /अिभयु और विभ न जेल और विभ न जला विधक सेवा ािधकरण के बीच सामंज य नह ं रह जाता। वतमान जांच वषय के बद /अिभयु सीजो चंदन के संबंध म भी ऐसा ह हुआ कअिभयु के करण खंडवा, वािलयर, नागपुर, नै लूर आ द स यायालय म चलते रहे ।
(4) त य के संकलन के दौरान यह त य भी सम आया क म य दे श उ च यायालय म मुख पीठ, जबलपुर के अलावा इं दौर और वािलयर के पीठ यायालय के पृथक-पृथक े ािधकार है । आपरािधक करण क अपील के पृथक-पृथक े ािधकार ऐसी म य दे श यायालय क बच के अधीन आने वाले जला यायालय और ऐसे जला यायालय से संबंिधत के य जेल अलग जल म थत होकर हाईकोट क पृथक बेथ के े म है और ऐसी दशा म ऐसे बंद /अिभयु , जनक अपील के य जेल के मा यम से अलग हाई कोट क बच हो जाना होता है , तब सम वय कस कार हो, इस बारे म रे गुलेशन मै युअल LOP िनयम आ द का अ ययन करने पर भी पृथक से प ववरण सम नह ं आया, इतना ज र है क जस के य जेल म आरोपी है (भले ह वह म य दे श क अ य बच म अपील करने का पा है ) तो भी जस के य जेल म आरोपी है , उस के य जेल का दािय व है क वह वहां क PLAC के मा यम से जेल अधी क, डालसा सिचव तथा विधक सहायता अिधकार के मा यम से हाईकोट क विधक सहायता सिमित को सूिचत करते हुए अपील तैयार कर और ऐसे बंद /अिभयु क तैयार अपील करवाये और माननीय हाईकोट क अ य बच को िभजवाय।
(5) वतमान वषय म बंद /अिभयु सीजो चंदन य द खंडवा जेल से
5 CRA-3281-2025 दोषिस होकर के य जेल इं दौर थानांत रत हुआ तो ऐसी दशा म आपरािधक अपील का े ािधकार जबलपुर पीठ का होने के बावजूद इं दौर के य जेल से संब विभ न विधक सहायता एजे सीज के मा यम से अपील तैयार होकर जबलपुर हाईकोट क पीठ के सम अपील तुत होना थी, जो नह ं हुई और वलंब का रत हुआ। यह बात भी साथ-साथ दे खी जाना है क दोषिस क आरं िभक अव था म ह आरोपी जला जेल, खंडवा या के य जेल, इं दौर म नह ं था। के य जेल, नागपुर म था। यह भी मह वपूण है क जब दोषिस दनांक 14.10.2022 के बाद आरोपी नागपुर से खंडवा दनांक 08.07.2023 को आया, उसी दनांक को आरोपी सीजो चंदन से यह पूछा गया था क वह अपील करना चाहता है , तो बंद /अिभयु ने अपने ह ता र के साथ इन दोन बात का उ लेख कया है क वह अपील बाहर से करे गा तो फर उसे िनणय क ित दान क गई, यह दोन मह वपूण ट प बंद /अिभयु सीजो चंदन के जेल बंद ट कट (Accused history record) म बंद / अिभयु सीज चंदन के ह ता र के साथ अं कत है । दनांक 22.08.2023 को बंद /अिभयु सीजो चंदन के ह ता र के साथ जेल बंद ट कट म इस बात का उ लेख भी है क दनांक 22.08.2023 को ''मने िनणय ित अपने ( वयं) प रवार वाल को बाहर से अपील करने हे तु िभजवाई गई।''
24. विभ न िनयम , रे गुलेश स व िनदशो आ द के अ ययन से यह त य भी प नह ं हुआ क उन प र थितय म या करना चा हए, जब क आरोपी / अिभयु एक बार विधक सेवा सहायता सिमितय से िल खत म मदद के िलए मना कर चुका हो और कई म हने का समय बना अपील कये बना बीत चुका हो, तब ऐसे बंद /अिभयु से विभ न समय, अंतराल से बार-बार यह जानकार ली जाए क उसने उसक दोषिस के व अपील तुत क है , अथवा नह ं या वह कसी िनजी अिधव ा से अपील तैयार कराने, तुत कराने म असफल रहा और इतना वलंब अपील तुित म हुआ। जस वलंब से बचने के िलए बंद /अिभयु सीजो चंदन को अपील तुित के िलए विभ न विधक सेवा सहाय ा सिमितय से बार-बार ताव कराया जाता।''
On internal page-31 of the report in para-(xi), it is mentioned that interaction by Legal Service Authorities at different levels with convicts who had not preferred appeals should be periodically undertaken and the convicts be informed of their right to free legal aid. In para-(xii), it is mentioned that
6 CRA-3281-2025 p eriodic interaction should be held with Jail Visiting Lawyers (JVLs) and Para Legal Volunteers (PLVs). This is to ensure updation of their knowledge so that the system functions efficiently as a whole.
Thereafter in para-39, 40, 41, it is mentioned as under :
39 जेल का येक अंडर ायल जनस और दोषिस य य संबंधी रकाड NALSA SALSA के समय समय पर आये िनदश SOP/गाइड लाई स / स के ब कुल अनु प तो नह ं िमला परं तु जतना रकाड आया उसके अनुसार संतोष द प से कहा जा सकता है क बंद /अिभयु से अपील कराने का यथोिचत यास कया जाता है ।
इतना अव य है क समय अंतराल पर जैसे येक दो माह म बार-बार िल खत प म बंद /अिभयु से अपील का यास/ तुित क जानकार /संपक होना चा हये। बंद /अिभयु क इ छा जब भी य हो कायवाह अपील का िस टम जेल म काय करता है ।
40. अ यंत मह वपूण कमी यह सम आयी है क ड एलओ के जेल म िनयत दन, िनयत घंटे तय नह ं है क वह कारावास म वयं भौितक प से रहे तो बंद /अिभयु से अिधक से अिधक वातालाप होगा और विधक सहायता के व तृत आयाम भावी होगे। ले कन प िनदश के अभाव म ड एलओ के िलये उ के संबंध म उपरो ानुसार काय नह ं कये जाने क ट प नह ं द जा सकती है । अ य अिधकार /सं था जैसे डालसा आ द क तुलना म ड एलओ का अिधक दािय व इसिलये भी अिधक आता है क वह विध जानने वाला ऐसा य है जो जेल अधी क व डालसा तथा एलएड सीएक के बीच क ऐसी कड़ है जो जेल बं दय क सं या के अनुपात म जैसे क 1000 बंद के िलए ह ते के तीन दन, आधे-आधे दन जेल म रहकर सम त उपरो काय भावी ढं ग से होगा।
41. फलतः यह फै ट फाइ डं ग ितवेदन इस ट प के साथ सादर तुत है क अधी क, के य जेल, इं दौर, विधक सेवा अिधकार , म य दे श उ च यायालय, खंडपीठ इं दौर एवं सिचव, उ च यायालय विधक सेवा सिमित, इं दौर (DLO DLSA) उपरो सभी पदािधकार एवं एजिसयो के बीच और अिधक सामंज य, स यता किमय को दरू करने के िनदशो का पालन जैसा क अपे त रहा है क माननीय सु ीम कोट के याय ांत सुहास चकमा (सु ा) के िनणय दनांक 23.10.2024 म िनदिशत कया है । एक ह अिभयु के चार रा यो और अनेक जलो म चलने वाले आपरािधक करणो और उन थानो पर अिभयु के भौितक प से थानांतरण पर भी ऐसे अिभयु को उन सभी थानो पर विधक सहायता क बार-बार उपल धता कराने का यास मे आई कमी के उपाय
7 CRA-3281-2025 तथा अिभयु ारा कुछ समय वशेष पर ाइवेट अिधव ा िनयु करना और बाद मे ाइवेट अिधव ा िनयु कर पाने क अ मता पर पुनः और बार-बार उसे विधक सहायता उपल ध कराने क पूित कये जाने क अलग-अलग जेलो म िन रहने पर भी समयब या क आव यकता सम आई है । उपरो पदािधकार / ािधकरण/अिधव ागण के ारा त कालीन समय म जेल बंद /अिभयु ो के िलए यथा संभव विधक सहायता उपल ध कराने का काय कया गया था, जो अिभयु सीजो चंदन के संबंध म था।
It has also come on record that when judgment was delivered by the concerned Sessions Judge, then copy of the judgment was taken by one counsel Shri S. Haneef who appeared for Sijo Chandan before the Trial Court on 14/10/2022 through video-conferencing from Central Jail, Nagpur (Maharashtra).
Taking all these sequence of events into consideration, we are not left with any manner of doubt that conditions of Para Legal Volunteers, District Legal Aid Officers and Jail Visiting Lawyers is far from satisfactory. We propose that the State Government should initiate a Real Time GPS Monitoring and prepare a software for Jail Visiting Lawyers, Para Legal Volunteers, District Legal Aid Officers so also Secretary of DLSA making visits to the prisons & other places in connection of their official work and carry out counselling of various inmates so that it will not be left to their discretion and there is real time monitoring of their movement to apprise the High Court and the High Court Legal Services Committee from time to time as to what actual steps have been taken by them to counsel various inmates in regard to their legal rights and that is not left to their own wisdom and discretion.
8 CRA-3281-2025 In case inmate is lodged in some other jail whether within the State or outside the State, then mechanism should be put into place to seek coordination between the Secretaries of DLSA of the Districts where trial is conducted with that of the State/District where the inmate is lodged in jail. If there is any hindrance in regard to the language, then services of appropriate interpreter be also engaged or, in the alternate, technology be put to use to seek interpretation of differences in language. This can be done using the advancement made in the use of technology and for this State is directed to produce a scheme within 30 days from the date of receipt of the order being passed today.
Let copy of this order be supplied to Shri Ajay Shukla, learned Public Prosecutor, for onwards transmission and to the Addition Chief Secretary of Home and Prison.
List along with Cr.A. No.2484/2023.
(VIVEK AGARWAL) (AVANINDRA KUMAR SINGH) JUDGE JUDGE ts
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