सीबीआई न्यायालय, भोपाल ने दिनांक 14.05.2026 को बैंक धोखाधड़ी मामले में दो आरोपियों, नामतः पियूष चतुर्वेदी, तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक, बैंक ऑफ इंडिया, मिसरोद शाखा, भोपाल तथा मोहन सिंह सोलंकी (निजी व्यक्ति) को कुल ₹60,000 के जुर्माने के साथ 07 वर्ष के सश्रम कारावास (आर आई) की सजा सुनाई।
केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने यह मामला दिनांक 25.01.2016 को तत्कालीन उप क्षेत्रीय प्रबंधक, बैंक ऑफ इंडिया, क्षेत्रीय कार्यालय, भोपाल के द्वारा दायर की गई लिखित शिकायत के आधार पर पंजीकृत किया था। यह आरोप था कि आरोपी पियूष चतुर्वेदी, तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक, बैंक ऑफ इंडिया, मिसरोद शाखा, भोपाल ने दिनांक 26.11.2013 को धोखाधड़ी एवं बेईमानीपूर्वक मेसर्स आर.जे. एंटरप्राइजेज के नाम पर ₹30,00,000 का टर्म लोन तथा कैश क्रेडिट लिमिट स्वीकृत की थी।
उसी दिन, मेसर्स आर.जे. एंटरप्राइजेज के उक्त खाते से जाली एवं मनगढ़ंत RTGS फॉर्म और वाउचर के आधार पर RTGS लेनदेन के माध्यम से ₹25,00,000 की राशि धोखाधड़ीपूर्वक डेबिट कर आरोपी मोहन सिंह सोलंकी की फर्म मेसर्स सांवरिया मशीन के खाते में स्थानांतरित की गई तथा उक्त राशि का दोनों आरोपियों द्वारा आपराधिक षड्यंत्र के तहत दुर्विनियोजन (misappropriation) किया गया। इस प्रकार आरोपियों ने बैंक को वित्तीय हानि पहुँचाई तथा स्वयं को तदनुरूप वित्तीय लाभ पहुँचाया।
जांच पूर्ण होने के पश्चात सीबीआई ने सक्षम न्यायालय के समक्ष आरोपी पियूष चतुर्वेदी एवं मोहन सिंह सोलंकी के विरुद्ध आरोप पत्र प्रस्तुत किया।
माननीय न्यायालय ने विचारण (ट्रायल) के पश्चात, आरोपी व्यक्तियों को दोषी ठहराया और तदनुसार सजा सुनाई।
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