बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने पति-पत्नी और घर के खर्चों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर कोई पति अपनी नौकरीपेशा पत्नी से घर के खर्चों में अपनी सैलरी (वेतन) लगाने के लिए कहता है, तो इसे किसी भी तरह की गैरकानूनी मांग या क्रूरता नहीं माना जा सकता। इस फैसले के साथ ही जस्टिस वृषाली जोशी ने नागपुर के रहने वाले एक व्यक्ति और उसके माता-पिता के खिलाफ पुलिस में दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। आपको बता दें कि यह मामला नागपुर के मानकापुर पुलिस स्टेशन में पति और उसके परिवार के खिलाफ घरेलू क्रूरता और शांति भंग करने की धाराओं के तहत दर्ज कराया गया था।

नौकरीपेशा पत्नी ने लगाया था सैलरी मांगने का आरोप

अदालत के सामने आए इस मामले में शिकायत करने वाली पत्नी एक सरकारी कर्मचारी है। उसने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि उसका पति और ससुराल वाले उस पर अपनी पूरी सैलरी उन्हें सौंपने का दबाव बनाते थे। महिला का यह भी कहना था कि ससुराल वाले उसे ताना मारते थे कि वह घर का कोई काम नहीं करती है, इसलिए उसे अपनी सैलरी घर में देनी चाहिए। वैवाहिक जीवन में अनबन और आपसी रिश्ते बिगड़ने के बाद पत्नी ने पुलिस में जाकर पूरे परिवार के खिलाफ केस दर्ज करवा दिया था।

अदालत ने कहा- यह घरेलू क्रूरता का मामला नहीं

जस्टिस वृषाली जोशी ने मामले से जुड़े सभी सबूतों और दोनों पक्षों के दावों की गहराई से जांच की। अदालत ने स्पष्ट किया कि शादीशुदा जिंदगी में कमाकर लाने वाली पत्नी से घर के खर्चों में योगदान की उम्मीद करना एक सामान्य बात है और इससे वैवाहिक कानून के तहत क्रूरता का कोई मामला नहीं बनता है। अदालत ने माना कि यह पूरा विवाद केवल शादी में आई कड़वाहट और आपसी मतभेदों की वजह से खड़ा हुआ था। इस आधार पर कोर्ट ने पति और उसके बूढ़े माता-पिता को बड़ी राहत देते हुए उन पर चल रहे केस को खत्म कर दिया।

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