इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि वह आपराधिक छवि वालों को शस्त्र लाइसेंस देने की नीति पर पुनर्विचार करे। कोर्ट ने कहा, उसका प्रथमदृष्टया मानना है कि हथियार ताकत दिखाने और सुरक्षा का भ्रम पैदा करने का औजार है।

इससे अक्सर सामाजिक मेल-जोल बिगड़ता है। समाज में असुरक्षा पैदा होती है। आत्मरक्षा के नाम पर खुलेआम बंदूकें लेकर चलना डराने-धमकाने का जरिया बन जाता है तथा यह असली सुरक्षा के बजाय डर को बढ़ावा देता है। सरकार के हलफनामे में बताया गया है कि प्रदेश में 10,08953 शस्त्र लाइसेंस हैं।

आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 6062 लोगों को शस्त्र लाइसेंस दिया गया है। जयशंकर उर्फ बैरिस्टर की याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने यह टिप्पणी की है। भदोही निवासी याची ने शस्त्र लाइसेंस आवेदन के संबंध जिलाधिकारी द्वारा निर्णय नहीं लिए जाने पर हाई कोर्ट की शरण ली है।

पूर्व सुनवाई में कोर्ट ने शस्त्र लाइसेंस स्वीकृत करने अथवा नवीनीकरण के लिए सभी 75 जिलों के जिलाधिकारियों तथा पुलिस उच्चाधिकारियों से आर्म्स एक्ट के नियमों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया था। साथ ही जिनके पास शस्त्र लाइसेंस है, उनका विवरण मांगा था। संयुक्त सचिव (गृह) की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया।

इसमें बताया गया कि विभिन्न श्रेणी में शस्त्र आवेदन के 23407 अर्जियां विचाराधीन हैं। जिलाधिकारी के आदेश के खिलाफ 1738 अपीलें कमिश्नर के समक्ष लंबित हैं। कुल 20,960 परिवारों में एक से अधिक लाइसेंस हैं। हलफनामा देखने के बाद कोर्ट ने कहा, इससे स्पष्ट है कि जो दिशा निर्देश दिए गए थे, उनका पालन नहीं किया गया।

कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि एक समाज जिसमें हथियारबंद लोग ताकत और धमकियों के जरिये अपना दबदबा दिखाते हैं, वह ज्यादा आजाद या शांतिपूर्ण नहीं बनता; बल्कि लोगों का भरोसा कम करता है। सुरक्षा की भावना को कमजोर कर नागरिक शांति बिगाड़ता है। अदालत ने 11 मार्च 2026 को लाइसेंस का क्षेत्रवार पूरा ब्योरा मांगा था। प्रकरण में अगली सुनवाई 26 मई को होगी।

पूर्व सुनवाई में कोर्ट ने शस्त्र लाइसेंस स्वीकृत करने अथवा नवीनीकरण के लिए सभी 75 जिलों के जिलाधिकारियों तथा पुलिस उच्चाधिकारियों से आर्म्स एक्ट के नियमों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया था। साथ ही जिनके पास शस्त्र लाइसेंस है, उनका विवरण मांगा था। संयुक्त सचिव (गृह) की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया।

इसमें बताया गया कि विभिन्न श्रेणी में शस्त्र आवेदन के 23407 अर्जियां विचाराधीन हैं। जिलाधिकारी के आदेश के खिलाफ 1738 अपीलें कमिश्नर के समक्ष लंबित हैं। कुल 20,960 परिवारों में एक से अधिक लाइसेंस हैं। हलफनामा देखने के बाद कोर्ट ने कहा, इससे स्पष्ट है कि जो दिशा निर्देश दिए गए थे, उनका पालन नहीं किया गया।

कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि एक समाज जिसमें हथियारबंद लोग ताकत और धमकियों के जरिये अपना दबदबा दिखाते हैं, वह ज्यादा आजाद या शांतिपूर्ण नहीं बनता; बल्कि लोगों का भरोसा कम करता है। सुरक्षा की भावना को कमजोर कर नागरिक शांति बिगाड़ता है। अदालत ने 11 मार्च 2026 को लाइसेंस का क्षेत्रवार पूरा ब्योरा मांगा था। प्रकरण में अगली सुनवाई 26 मई को होगी।

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