सुप्रीम कोर्ट " ने कई जगहों पर खास तौर पर रैलियों और धर्म संसदों में दिए गए हेट स्पीच के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली सभी याचिकाएं भी खारिज कर दी। कोर्ट का कहना है कि हेट स्पीच से निपटने के लिए मौजूदा कानून पर्याप्त हैं। ऐसे में किसी नए कानून की जरूरत नहीं है। समस्या इसे लागू करने में है।

"सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हेट स्पीच के मामलों में पुलिस के लिए FIR दर्ज करना जरूरी है। अगर पुलिस की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं होती है तो कोई भी पीड़ित व्यक्ति कोर्ट जा सकता है।

"दरअसल देश के विभिन्न राज्यों में हुई घटनाओं का हवाला देते हुए कई याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि अक्टूबर 2022 में हेट स्पीच को लेकर जारी सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश पर राज्य अमल नहीं कर रहे हैं।

"इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे निष्कर्षों का सारांश ये है कि आपराधिक कृत्यों को अपराध की श्रेणी में लाना पूरी तरह से विधायिका के अधिकार क्षेत्र में है। संवैधानिक अदालतें कानून की व्याख्या तो कर सकती हैं, लेकिन वे सरकार को कानून बनाने के लिए बाध्य नहीं कर सकतीं।

"कानून किस तरह से बनाया जाए, यह विधायिका के ही अधिकार क्षेत्र में रहता है। हेट स्पीच यानी द्वेषपूर्ण भाषण का क्षेत्र खाली नहीं है। चिंताएं कानून से नहीं, बल्कि उसको लागू करने से जुड़ी हैं।

"कोर्ट ने कहा कि BNSS के तहत वैधानिक तंत्र, आपराधिक कानून को गति देने का व्यापक तरीका प्रदान करता है। कानून में कोई विधायी शून्यता मौजूद नहीं है। मजिस्ट्रेट का पर्यवेक्षी क्षेत्राधिकार (Supervisory Jurisdiction) भी मौजूद है और उनके पास व्यापक शक्तियां भी हैं। जरूरत है उनका विवेकपूर्ण प्रयोग करने की।

"धारा 156(3) के तहत जांच का निर्देश देने वाला आदेश, संज्ञान लेने का आदेश नहीं माना जाता है। हालांकि, हम निर्देश जारी करने से इनकार करते हैं, फिर भी हेट स्पीच और अफवाह फैलाने से जुड़े मुद्दे सीधे तौर पर भाईचारे और संवैधानिक व्यवस्था को प्रभावित करते हैं।

"हेट स्पीच और अफवाह फैलाने से जुड़े मुद्दे सीधे तौर पर बंधुत्व और संवैधानिक व्यवस्था पर असर डालते हैं। केंद्र सरकार के लिए यह विचार करना खुला है कि क्या सामाजिक बदलावों के आलोक में, उचित संशोधन करने के लिए किसी बदलाव की आवश्यकता है।

"इन आधार पर सभी रिट याचिकाएं खारिज की जाती हैं। कोर्ट के आदेश की अवमानना याचिकाएं भी बंद की जाती हैं।

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