मध्य प्रदेश के चर्चित नर्सिंग घोटाले मामले में जबलपुर हाई कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इस घोटाले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि जब तक अयोग्य कॉलेजों और भ्रष्टाचार में शामिल व्यक्तियों की पहचान पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाना संभव नहीं है। याचिकाकर्ता और नर्सिंग काउंसिल दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने CBI और नर्सिंग काउंसिल को अगली सुनवाई तक विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने के स्पष्ट निर्देश दिए।
नर्सिंग घोटाला मामले में हाईकोर्ट का कड़ा रुख
सुनवाई के दौरान अपने तर्क प्रस्तुत करते हुए नर्सिंग काउंसिल ने न्यायालय से अनुरोध किया कि उसे प्रस्तावित परीक्षाओं को आयोजित करने की अनुमति दी जाए और पहले से लंबित परिणामों को घोषित करने की भी अनुमति दी जाए। हालांकि याचिकाकर्ता की आपत्तियों और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए न्यायालय ने इस संबंध में कोई तत्काल राहत प्रदान नहीं की। न्यायालय ने CBI और नर्सिंग काउंसिल को निर्देश दिया है कि वे उन सभी कॉलेजों के संबंध में संयुक्त रूप से विस्तृत जानकारी एकत्र करें, जो निर्धारित मानकों को पूरा करने में विफल रहे और जांच के दौरान अयोग्य पाए गए।
12 मई को होगी अगली सुनवाई
हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता और नर्सिंग काउंसिल दोनों की दलीलें सुनीं और CBI तथा नर्सिंग काउंसिल को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई में उन सभी कॉलेजों से संबंधित डेटा पेश करें, जिन्हें अनुपयुक्त पाया गया है। साथ ही उन अधिकारियों के बारे में भी जानकारी दें, जिन्हें इस मामले में दोषी पाया गया है। अगली सुनवाई 12 मई को तय की गई है।
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