बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने उस आदेश को वापस ले लिया है, जिसमें मानहानि के केस को 2046 तक टाल दिया गया था। 28 अप्रैल को दिए अपने आदेश में कोर्ट ने इस केस को शिकायतकर्ता के अहंकार की लड़ाई बताते हुए नाराजगी जताई थी और इसे 20 साल के लिए टाल दिया था। कोर्ट की नाराजगी इस बात को लेकर थी कि दूसरे पक्ष की ओर से माफी की पेशकश के बावजूद 90 साल की शिकायतकर्ता लंबे समय से चल रहे इस मानहानि केस को खत्म करने के लिए तैयार नहीं थीं।
अब सुनवाई 15 जुलाई को होगी
29 अप्रैल को शिकायतकर्ता के वकील ने कोर्ट के सामने मामला दोबारा रखते हुए आदेश में संशोधन की मांग की। इस पर कोर्ट ने अपना आदेश बदल दिया और अगली सुनवाई की तारीख 15 जुलाई तय कर दी।
कोर्ट के सामने मामला क्या था?
करीब 90 साल की महिला और उनकी बेटी ने दक्षिण मुंबई की एक हाउसिंग सोसायटी के मैनेजमेंट के कुछ लोगों के खिलाफ 20 करोड़ की मानहानि का केस किया था। यह मामला करीब एक दशक से चल रहा था। 20 अप्रैल को हाई कोर्ट ने सुझाव दिया था कि यह केस खत्म किया जा सकता है, अगर दूसरा पक्ष बिना शर्त माफी मांग ले।
90 साल की महिला ने ठुकराई माफी की पेशकश
28 अप्रैल की सुनवाई में मैनेजमेंट कमेटी के लोग माफी मांगने के लिए तैयार थे, लेकिन शिकायतकर्ता महिला केस खत्म करने के लिए तैयार नहीं हुईं और उन्होंने माफी की पेशकश ठुकरा दी।
जज ने आदेश में क्या कहा था
28 अप्रैल को जस्टिस जितेंद्र जैन ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि यह मामला उन मामलों में से है, जहां पक्षकारों के जीवन के अंतिम चरण में उनका आपसी अहंकार अदालत की प्रक्रिया में बाधा डाल रहा है। इसके कारण कोर्ट उन मामलों की सुनवाई नहीं कर पा रहा है, जो वास्तव में ज्यादा जरूरी हैं।
जज ने कहा था कि हाई कोर्ट पहले भी कह चुका है कि यह विवाद बिना शर्त माफी से खत्म हो सकता है, लेकिन करीब 90 साल की शिकायतकर्ता केस आगे बढ़ाने पर अड़ी हुई हैं।
जज ने 28 अप्रैल के अपने आदेश में यह भी लिखा कि वे इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहते, सिवाय इसके कि यह मामला अगले 20 साल तक नहीं सुना जाना चाहिए। इसे साल 2046 में लिस्ट किया जाए। साथ ही, कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि केवल इस आधार पर कि पक्षकार वरिष्ठ या अति वरिष्ठ नागरिक हैं, इस मामले को कोई प्राथमिकता नहीं दी जाएगी।
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