Saturday, 02, May, 2026
 
 
 
Expand O P Jindal Global University
 

संसद् अधिकारी वेतन और भत्ता अधिनियम, 1953 ( Salaries & Allowances of Officers of Parliament Act, 1953 )


 

संसद् अधिकारी वेतन और भत्ता अधिनियम, 1953

(1953 का अधिनियम संख्यांक 20)

[16 मई, 1953]

संसद् के कतिपय अधिकारियों के

वेतन और भत्ते का उपबंध

करने के लिए

अधिनियम

संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम संसद् अधिकारी वेतन और भत्ता अधिनियम, 1953 है

(2) यह 1953 की मई के प्रथम दिन को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में संसद् का अधिकारी" से निम्नलिखित अधिकारियों में से कोई भी अधिकारी, अर्थात्, राज्य सभा का सभापति तथा उप-सभापति और लोक सभा का अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष अभिप्रेत है

 [3. संसद् अधिकारी के वेतन आदि- [(1) राज्य सभा के सभापति को प्रतिमास [एक लाख पच्चीस हजार रुपए] वेतन संदत्त किया जाएगा ]

(2) राज्य सभा के सभापति से भिन्न प्रत्येक संसद् अधिकारी, ऐसे अधिकारी के रूप में अपनी संपूर्ण पदावधि के दौरान, प्रतिमास वेतन और प्रत्येक दिन के लिए भत्ता उन्हीं दरों पर प्राप्त करने का हकदार होगा जो संसद् सदस्यों की बाबत संसद् सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम, 1954 (1954 का 38) की धारा 3 में विनिर्दिष्ट है

(3) राज्य सभा के सभापति से भिन्न प्रत्येक संसद् अधिकारी निर्वाचन-क्षेत्र भत्ता उसी दर से प्राप्त करने का हकदार होगा जो संसद् सदस्यों की बाबत उक्त अधिनियम की धारा 8 के अधीन विनिर्दिष्ट है ]

4. संसद् के अधिकारियों के लिए निवास-स्थान- [(1)] संसद् का प्रत्येक अधिकारी अपनी पदावधि पर और उसके ठीक पश्चात् [एक मास] की अवधि तक किराया दिए बिना सुसज्जित निवास-स्थान का उपयोग करने का हकदार होगा और ऐसे निवास-स्थान के अनुरक्षण के बारे में उस अधिकारी पर वैयक्तिक तौर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा

 [(2) संसद् के अधिकारी की मृत्यु हो जाने पर उसका कुटुम्ब इस बात का हकदार होगा कि उस सुसज्जित निवास-स्थान का, जो संसद् के अधिकारी के अधिभोग में था,-

() उसकी मृत्यु के ठीक पश्चात् एक मास की अवधि के लिए उपयोग, किराया दिए बिना करे और ऐसे निवास-स्थान के अनुरक्षण के बारे में संसद् के अधिकारी के कुटुम्ब पर कोई प्रभार नहीं पड़ेगा; तथा

() एक मास की अतिरिक्त अवधि के लिए उपयोग ऐसी दरों पर किराया देकर करे जो धारा 11 के अधीन इस निमित्त बनाए गए नियमों द्वारा विहित की जाए और ऐसी अतिरिक्त अवधि के दौरान उस निवास-स्थान में उप-भुक्त बिजली और पानी की बाबत प्रभार भी दे ]

                स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए निवास-स्थान" के अन्तर्गत कर्मचारिवृन्द के क्वार्टर और उससे अनुलग्न अन्य भवन और उसका उद्यान आते हैं और निवास-स्थान के संबंध में अनुरक्षण" के अन्तर्गत स्थानीय रेटों और करों का संदाय और बिजली और पानी की व्यवस्था आते हैं

 [5. संपचुअरी भत्ता- ॥। लोक सभा के अध्यक्ष को प्रतिमास एक हजार रुपए संपचुअरी भत्ता तथा उपसभापति और उपाध्यक्ष को प्रतिमास पांच सौ रुपए संपचुअरी भत्ता संदत्त किया जाएगा ]

 [परन्तु 17 सितम्बर, 2001 से ही संपचुअरी भत्ता,-

() लोक सभा के अध्यक्ष को उसी दर पर संदत्त किया जाएगा जिस पर संपचुअरी भत्ता मंत्रियों के सम्बलमों और भत्तों से संबंधित अधिनियम, 1952 (1952 का 58) की धारा 5 के अधीन प्रत्येक अन्य मंत्री को जो मंत्रिमंडल का सदस्य है, संदेय है;

() उप सभापति और उपाध्यक्ष को उसी दर पर संदत्त किया जाएगा जिस पर संपचुअरी भत्ता मंत्रियों के सम्बलमों और भत्तों से संबंधित अधिनियम, 1952 (1952 का 58) की धारा 5 के अधीन किसी राज्य मंत्री को संदेय है ]

6. संसद् के अधिकारियों को यात्रा और दैनिक भत्ते-(1) धारा 11 के अधीन इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, संसद् का अधिकारी-

() अपने तथा अपने कुटुम्ब के सदस्यों के लिए और अपने तथा अपने कुटुम्ब की चीज-बस्त के परिवहन के लिए यात्रा भत्ते-

(i) पद ग्रहण करने के लिए दिल्ली के बाहर के अपने प्रायिक निवास-स्थान से दिल्ली तक की यात्रा के बारे में; और

(ii) पद-मुक्त होने पर दिल्ली से दिल्ली के बाहर के अपने प्रायिक निवास-स्थान तक की यात्रा के बारे  में; तथा

() अपने पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में अपने द्वारा किए गए दौरों के बारे में, चाहे वे, समुद्र, भूमि या वायु मार्ग द्वारा किए जाएं, यात्रा और दैनिक भत्ते,

पाने का हकदार होगा

 [(1) संसद् अधिकारी तथा संसद् में विपक्षी नेता वेतन और भत्ता (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 2002 के प्रारंभ से ही, संसद् अधिकारी और उसका कुटुंब चाहे वे साथ में यात्रा कर रहे हों या अलग से, यात्रा भत्ता उन्हीं दर पर प्राप्त करने और उतनी ही वापसी यात्राओं के लिए हकदार होंगे, जो दर और जितनी यात्राएं मंत्रियों के सम्बलमों और भत्तों से संबंधित अधिनियम, 1952 (1952 का 58) की धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन किसी मंत्री और उसके कुटुंब को अनुज्ञेय हैं ]

(2) इस धारा के अधीन कोई भी यात्रा भत्ता नकद दिया जा सकेगा या उसके बदले में निःशुल्क शासकीय परिवहन की व्यवस्था की जा सकेगी

7. संसद् के अधिकारियों को चिकित्सीय सुविधाएं-धारा 11 के अधीन इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, संसद् का कोई अधिकारी और उसके कुटुम्ब के सदस्य, सरकार द्वारा अनुरक्षित अस्पतालों में मुफ्त वास-सुविधा और चिकित्सीय उपचार के भी हकदार होंगे

 [7. अध्यक्ष की पद पर रहते हुए मृत्यु होने पर पत्नी या पति को कुटुंब पेंशन, आदि-(1) संसद् अधिकारी वेतन और भत्ता (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 2002 के प्रारंभ से, लोक सभा के ऐसे अध्यक्ष की जिसकी ऐसा पद धारण करते हुए मृत्यु हो जाती है, पत्नी या पति को, उसके शेष जीवन-काल के लिए, अध्यक्ष की मृत्यु की तारीख से, अध्यक्ष द्वारा लिए गए अंतिम वेतन के पचास प्रतिशत की दर पर कुटुंब पेंशन का संदाय किया जाएगा :

परंतु ऐसे अध्यक्ष की पत्नी या पति ऐसी पेंशन प्राप्त करने का हकदार नहीं होगा जो संसद् के किसी ऐसे सदस्य की, जिसकी ऐसे सदस्य के रूप में उसकी पदावधि के दौरान मृत्यु हो जाती है, पत्नी या पति को संसद् सदस्य वेतन, भत्ते और पेंशन अधिनियम, 1954 (1954 का 30) की धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन उस सदस्य की मृत्यु की तारीख से पांच वर्ष के लिए उपलब्ध है

(2) धारा 4 की उपधारा (2) के खंड () के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना और धारा 11 के अधीन इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, ऐसी पत्नी या पति अपने शेष जीवन-काल के लिए अनुज्ञप्ति फीस का संदाय किए बिना असुसज्जित निवास का उपयोग करने का हकदार होगा

(3) धारा 11 के अधीन इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, -

() ऐसी पत्नी या पति उसके शेष जीवन-काल के लिए; और

() ऐसे अध्यक्ष की अवयस्क संतानें,

निःशुल्क चिकित्सीय परिचर्या और उपचार की हकदार होंगी ]

8. मोटरकार खरीदने के लिए संसद् के अधिकारियों को अग्रिम-संसद् के किसी अधिकारी को, मोटरकार खरीदने के लिए प्रतिसंदेय अग्रिम के तौर पर ऐसी धन-राशि, जो धारा 11 के अधीन इस निमित्त बनाए गए नियमों द्वारा अवधारित की जाए, संदत्त की जा सकेगी, जिससे वह अपने पद के कर्तव्यों का सुविधानुसार तथा दक्षतापूर्ण निर्वहन कर सके

9. संसद् के अधिकारी, संसद् के सदस्यों के रूप में वेतन या भत्ते नहीं लेंगे-इस अधिनियम के अधीन वेतन या भत्ता प्राप्त करने वाला संसद् का कोई भी अधिकारी संसद् द्वारा उपबंधित निधियों में से संसद् के दोनों सदनों में से किसी भी सदन की अपनी सदस्यता के बारे में कोई धन-राशि, वेतन या भत्ते के तौर पर प्राप्त करने के लिए हकदार नहीं होगा

10. संसद् के अधिकारियों की नियुक्ति आदि के बारे में अधिसूचना उसका निश्चायक साक्ष्य होगी-वह तारीख, जिसको कोई व्यक्ति संसद् का अधिकारी बना हो या जिस तारीख को उसका अधिकारी रहना समाप्त हो गया हो, राजपत्र में प्रकाशित की जाएगी और ऐसी कोई भी अधिसूचना इस अधिनियम के सभी प्रयोजनों के लिए इस तथ्य का निश्चायक साक्ष्य होगी कि उस तारीख को वह संसद् का अधिकारी बना था या उसका अधिकारी रहना समाप्त हो गया था

 [10. सभापति द्वारा प्राप्त दैनिक भत्ते तथा किसी संसद् अधिकारी द्वारा प्राप्त कुछ परिलब्धियों पर आय-कर का संदाय करने के दायित्व से छूट-आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) में किसी बात के होते हुए भी, -

() राज्य सभा के सभापति के पूर्ववर्ष की कुल आय की संगणना करने में, धारा 3 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट भत्ते के रूप में कोई आय सम्मिलित नहीं की जाएगी;

() धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन किसी संसद् अधिकारी को उपलब्ध कराए गए किराया-मुक्त सुसज्जित निवास-स्थान (जिसके अंतर्गत उसका अनुरक्षण है) का मूल्य, आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) की धारा 15 के अधीन वेतन" शीर्ष के अधीन प्रभार्य उसकी आय की संगणना करने में सम्मिलित नहीं किया जाएगा ]

11. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए सभापति या अध्यक्ष से परामर्श करके नियम  बना सकेगी

 [(2) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा

(3) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह ऐसी कुल 30 दिन की अवधि के लिए सत्र में हो, जो एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकती है, रखा जाएगा और यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्र के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं, या दोनों सदन इस बात से सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो ऐसा नियम यथास्थिति, तत्पश्चात् केवल ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा या उसका कोई प्रभाव नहीं होगा,         तथापि, उस नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से पहले उसके अधीन की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ]

--------------

Download the LatestLaws.com Mobile App
 
 
Latestlaws Newsletter
 

Publish Your Article

 

Campus Ambassador

 

Media Partner

 

Campus Buzz

 

LatestLaws Guest Court Correspondent

LatestLaws Guest Court Correspondent Apply Now!
 

LatestLaws.com presents: Lexidem Offline Internship Program, 2026

 

LatestLaws.com presents 'Lexidem Online Internship, 2026', Apply Now!

 
 
 

LatestLaws Partner Event : Smt. Nirmala Devi Bam Memorial International Moot Court Competition

 
 
Latestlaws Newsletter