सिक्किम स्टेट बैंक (शेयरों का अर्जन) और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1982
(1982 का अधिनियम संख्यांक 62)
[6 नवम्बर, 1982]
लोक हित में, सिक्किम राज्य में बैंककारी सुविधाओं के
बेहतर समेकन और विस्तारण के प्रयोजन के लिए,
सिक्किम स्टेट बैंक के कतिपय शेयरों के
अर्जन का और उससे संबंधित या
उसके आनुषंगिक विषयों का
उपबंध करने के लिए
अधिनियम
सिक्किम राज्य में बैंककारी सुविधाओं के बेहतर समेकन और विस्तारण के प्रयोजन के लिए, उस राज्य में एक ही शिखर बैंककारी संस्था का उपबंध करना और उस प्रयोजन के लिए सिक्किम स्टेट बैंक के कतिपय शेयरों के अर्जन का और उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक विषयों का उपबंध करना समीचीन है ;
अतः भारत गणराज्य के तैंतीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
अध्याय 1
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम सिक्किम स्टेट बैंक (शेयरों का अर्जन) और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1982 है ।
(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) नियत दिन" से वह तारीख अभिप्रेत है जिसको यह अधिनियम प्रवृत्त होता है ;
(ख) सहकारी बैंक" से सिक्किम स्टेट कोआपरेटिव बैंक लिमिटेड अभिप्रेत है, जो सिक्किम कोआपरेटिव सोसाइटीज ऐक्ट, 1978 (1978 का सिक्किम अधिनियम संख्यांक 12) के अधीन रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी है;
(ग) अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है;
(घ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
(ङ) सिक्किम बैंक" से सिक्किम स्टेट बैंक उद्घोषणा, 1968 के अधीन गठित सिक्किम स्टेट बैंक अभिप्रेत है;
(च) राज्य सरकार" से सिक्किम राज्य सरकार अभिप्रेत है;
(छ) यूनाइटेड कमर्शियल बैंक" से बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अन्तरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की धारा 3 के अधीन गठित यूनाइटेड कमर्शियल बैंक अभिप्रेत है;
(ज) उन शब्दों और पदों के, जो इसमें प्रयुक्त हैं किन्तु परिभाषित नहीं हैं और कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में परिभाषित हैं, वहीं अर्थ होंगे जो उनके उस अधिनियम में हैं ।
अध्याय 2
सिक्किम बैंक के कुछ शेयरों का अर्जन और अन्तरण
3. सिक्किम बैंक के कुछ शेयरों का केन्द्रीय सरकार में निहित होना-(1) नियत दिन को, सिक्किम राज्य बैंक की शेयर पूंजी में के सभी शेयर, उन शेयरों को छोड़कर जो राज्य सरकार द्वारा धारित हैं, इस अधिनियम के आधार पर, केन्द्रीय सरकार को अन्तरित और उसमें निहित हो जाएंगे ।
(2) वे सभी शेयर, जो उपधारा (1) के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गए हैं, ऐसे निहित होने के बल पर, उनको प्रभावित करने वाले सभी न्यासों, दायित्वों, बाध्यताओं, बन्धकों, भारों, धारणाधिकारों और सभी अन्य विल्लंगमों से मुक्त और उन्मोचित हो जाएंगे और किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी की कोई कुर्की, व्यादेश या कोई डिक्री या आदेश, जो ऐसे शेयरों के उपयोग को किसी भी रीति से निर्बन्धित करता है, वापस ले लिया गया समझा जाएगा ।
(3) सिक्किम बैंक के शेयरों के उपधारा (1) के अधीन केन्द्रीय सरकार को अन्तरण के होते हुए भी, ऐसे शेयर धारण करने वाला कोई व्यक्ति, जो नियत दिन के ठीक पूर्व ऐसे शेयरों पर लाभांश का संदाय पाने का हकदार है, सहकारी बैंक से-
(क) उस आधे वर्ष की बाबत, जो नियत दिन के पूर्व समाप्त हो गया था, उसके शेयरों पर शोध्य प्रोद्भूत होने वाले और असंदत्त रह गए सभी लाभांश;
(ख) नियत दिन के ठीक पूर्व की किसी अवधि की बाबत, जिसके लिए सिक्किम बैंक ने कोई लाभांश घोषित नहीं किया है, केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाने वाली किसी दर से परिकलित लाभांश,
प्राप्त करने का हकदार होगा ।
अध्याय 3
सिक्किम बैंक के उपक्रमों का केन्द्रीय सरकार में निहित होना
4. सिक्किम बैंक के उपक्रमों का निहित होना-नियत दिन को सिक्किम बैंक के उपक्रम, इस अधिनियम के आधार पर, केन्द्रीय सरकार को अन्तरित और उसमें निहित हो जाएंगे ।
5. निहित होने का साधारण प्रभाव-(1) सिक्किम बैंक के उपक्रमों के बारे में यह समझा जाएगा कि उनके अन्तर्गत सभी आस्तियां, अधिकार, शक्तियां, प्राधिकार और विशेषाधिकार और सभी स्थावर तथा जंगम सम्पत्ति, रोकड़ बाकी, आरक्षित निधियां, विनिधान तथा ऐसी सम्पत्ति में या उससे उद्भूत होने वाले अन्य सभी अधिकार और हित, जो नियत दिन के ठीक पूर्व उसके उपक्रमों के संबंध में सिक्किम बैंक के स्वामित्व, कब्जे, शक्ति या नियंत्रण में थे, और तत्संबंधी सभी लेखाबहियां, रजिस्टर, अभिलेख और किसी भी प्रकार की अन्य सब दस्तावेजें भी हैं, और यह भी समझा जाएगा कि उनके अन्तर्गत उसके उपक्रमों के संबंध में सिक्किम बैंक के उस समय विद्यमान किसी भी किस्म के सभी उधार, दायित्व और बाध्यताएं भी हैं ।
(2) जब तक इस अधिनियम में अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबंधित न हो, ऐसी सभी संविदाएं, विलेख, बंधपत्र, करार, मुख्तारनामे, विधिक प्रतिनिधित्व की मंजूरी और किसी भी प्रकृति की अन्य लिखतें, जो नियत दिन के ठीक पूर्व अस्तित्वशील या प्रभावशील हों और जिसमें सिक्किम बैंक एक पक्षकार हो या जो उक्त बैंक के पक्ष में हों, केन्द्रीय सरकार के विरुद्ध या उसके पक्ष में वैसे ही पूर्णतया प्रवृत्त और प्रभावशील होंगी ।
(3) यदि नियत दिन को, ऐसे उपक्रमों के जो धारा 4 के अधीन अन्तरित हो गए हैं, किसी कारबार के संबंध में सिक्किम बैंक द्वारा या उसके विरुद्ध कोई वाद, अपील या किसी भी प्रकार की अन्य कार्यवाही लंबित है, तो सिक्किम बैंक के उपक्रमों के अन्तरण या इस अधिनियम की किसी बात के कारण, उसका उपशमन नहीं होगा, वह बन्द नहीं की जाएगी, या उस पर किसी भी रूप में प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, किन्तु वह वाद, अपील या अन्य कार्यवाही केन्द्रीय सरकार द्वारा या उसके विरुद्ध जारी रखी जा सकेगी, चलाई जा सकेगी या प्रवर्तित की जा सकेगी ।
6. सिक्किम बैंक के शेयरों और उपक्रमों का राज्य सरकार में निहित होना-(1) धारा 3, धारा 4 और धारा 5 में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि सिक्किम बैंक के वे शेयर, जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गए हैं, और सिक्किम बैंक के वे उपक्रम जो धारा 4 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गए हैं, केन्द्रीय सरकार में निहित बने रहने के बजाय, अधिसूचना की तारीख को सिक्किम राज्य सरकार में निहित हो जाएंगे ।
(2) जहां सिक्किम बैंक के शेयर और उपक्रम उपधारा (1) के अधीन राज्य सरकार में निहित हो जाते हैं, वहां राज्य सरकार, ऐसे निहित होने की तारीख से ही, ऐसे शेयरों और उपक्रमों के संबंध में स्वामी समझी जाएगी और ऐसे शेयरों और उपक्रमों के संबंध में केन्द्रीय सरकार के समस्त अधिकार और दायित्व, ऐसे निहित होने की तारीख से ही, उस राज्य सरकार के क्रमशः अधिकार और दायित्व समझे जाएंगे ।
7. सिक्किम बैंक के उपक्रमों के सिक्किम सहकारी बैंक में निहित किए जाने का निदेश देने की राज्य सरकार की शक्ति-(1) धारा 4, धारा 5 और धारा 6 में किसी बात के होते हुए भी, यदि राज्य सरकार का यह समाधान हो जाता है कि सहकारी बैंक ऐसे निबंधनों और शर्तों का, जिन्हें वह सरकार अधिरोपित करना ठीक समझे, जिनके अन्तर्गत उसके शेयरों के आबंटन की बाबत निबंधन और शर्तें भी हैं, अनुपालन करने के लिए रजामंद है या उसने उनका अनुपालन कर दिया है, तो वह अधिसूचना द्वारा निदेश दे सकेगी कि सिक्किम बैंक के उपक्रम जो धारा 4 के अधीन केन्द्रीय सरकार में और तत्पश्चात् धारा 6 के अधीन राज्य सरकार में निहित हो गए हैं, राज्य सरकार में निहित बने रहने के बजाय, या तो अधिसूचना की तारीख को या उससे पहले की या बाद की ऐसी तारीख को (जो नियत दिन से पूर्व की तारीख न हो), जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, सहकारी बैंक में निहित हो जाएंगे ।
(2) जहां सिक्किम बैंक के उपक्रम उपधारा (1) के अधीन सहकारी बैंक में निहित हो जाते हैं, वहां वह बैंक, ऐसे निहित होने की तारीख से ही, ऐसे उपक्रमों के संबंध में स्वामी समझा जाएगा और ऐसे उपक्रमों के संबंध में केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के समस्त अधिकार और दायित्व, ऐसे निहित होने की तारीख से ही, सहकारी बैंक के क्रमशः अधिकार और दायित्व समझे जाएंगे ।
अध्याय 4
रकमों का संदाय
8. रकमों का संदाय-(1) सिक्किम बैंक के शेयरों के धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार को अन्तरित और उसमें निहित होने के लिए, केंद्रीय सरकार द्वारा आठ लाख बारह हजार दो सौ पचानवे रुपए की रकम ऐसे शेयर धारकों को नकद और अनुसूची में विनिर्दिष्ट रीति से दी जाएगी ।
(2) उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट रकम पर, साढ़े पांच प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से साधारण ब्याज नियत दिन से प्रारम्भ होकर उस तारीख को जिसको ऐसी रकम का संदाय शेयर धारकों को किया जाता है, समाप्त होने वाली अवधि के लिए दिया जाएगा ।
अध्याय 5
सिक्किम बैंक के उपक्रमों का प्रबंध, आदि
9. सिक्किम बैंक के उपक्रमों का प्रबन्ध, आदि-(1) वह राज्य सरकार, जिसमें सिक्किम बैंक के उपक्रम धारा 6 के अधीन निहित हो गए हैं, ऐसी सभी शक्तियों का प्रयोग करने और ऐसे सभी कार्य करने की हकदार होगी, जिन शक्तियों का प्रयोग करने और जिन कार्यों को करने के लिए सिक्किम बैंक अपने उपक्रमों के सम्बन्ध में प्राधिकृत है ।
(2) सिक्किम बैंक के उन उपक्रमों के, जो धारा 4 के अधीन केन्द्रीय सरकार में और धारा 6 के अधीन राज्य सरकार में निहित हो गए हैं, कार्यकलाप और कारबार का साधारण अधीक्षण, निदेशन, नियंत्रण और प्रबन्ध वहां जहां धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन राज्य सरकार द्वारा कोई निदेश किया गया है, ऐसे निदेश में विनिर्दिष्ट सहकारी बैंक में निहित होगा और तदुपरि सहकारी बैंक ऐसी सभी शक्तियों का प्रयोग करने और ऐसे सभी कार्य करने का हकदार होगा जिन शक्तियों का प्रयोग करने और जिन कार्यों को करने के लिए सिक्किम बैंक अपने उपक्रमों के सम्बन्ध में प्राधिकृत है ।
10. अर्जित सम्पत्ति और उससे संबंधित दस्तावेजों के परिदान, कब्जे की तारीख-(1) सिक्किम बैंक के उपक्रमों के, धारा 6 के अधीन राज्य सरकार में निहित हो जाने पर, ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जिसके कब्जे या अभिरक्षा में अथवा जिसके नियंत्रणाधीन धारा 5 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोई सम्पत्ति हो, वह सम्पत्ति राज्य सरकार को परिदत्त करेगा ।
(2) ऐसा कोई व्यक्ति जिसके कब्जे में या जिसके नियंत्रणाधीन नियत दिन को सिक्किम बैंक के ऐसे उपक्रमों से सम्बन्धित, जो धारा 6 के अधीन राज्य सरकार में निहित हो गए हैं, और जो उस बैंक के हैं या उसके तब होते यदि सिक्किम बैंक के उपक्रम राज्य सरकार में निहित नहीं हुए होते, कोई लेखाबहियां, दस्तावेजें या अन्य कागजपत्र हैं, उक्त लेखाबहियों, दस्तावेजों या अन्य कागजपत्रों का राज्य सरकार को लेखा देने का दायी होगा और उन्हें राज्य सरकार को परिदत्त करेगा ।
(3) राज्य सरकार ऐसी सभी सम्पत्तियों का, जो इस अधिनियम के अधीन उस सरकार में निहित हो गई हैं, कब्जा लेने के लिए सभी आवश्यक कार्रवाइयां कर सकेगी या करवा सकेगी ।
अध्याय 6
सिक्किम बैंक के कर्मचारियों के बारे में उपबंध
11. सिक्किम बैंक के विद्यमान अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा का सहकारी बैंक को अंतरण-(1) सिक्किम बैंक का प्रत्येक अधिकारी या कर्मचारी (उसके प्रबन्ध निदेशक को छोड़कर) जो नियत दिन के ठीक पूर्व सिक्किम बैंक के नियोजन में है,-
(क) नियत दिन से ही राज्य सरकार का अधिकारी या अन्य कर्मचारी हो जाएगा, और
(ख) जहां सिक्किम बैंक के उपक्रम धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन सहकारी बैंक में निहित होने के लिए निदेशित हैं वहां ऐसे निहित होने की तारीख से ही उस सहकारी बैंक का अधिकारी या अन्य कर्मचारी हो जाएगा,
और, यथास्थिति, राज्य सरकार या सहकारी बैंक के अधीन पेंशन, उपदान और अन्य बातों के बारे में वैसे ही अधिकारों और विशेषाधिकारों के साथ अपना पद या सेवा धारण करेगा जो उसे तब अनुज्ञेय होते जब ऐसा निधान नहीं हुआ होता और वह तब तक ऐसा करता रहेगा जब तक, यथास्थिति, राज्य सरकार या सहकारी बैंक के अधीन उसका नियोजन सम्यक् रूप से समाप्त नहीं कर दिया जाता या जब तक उसका पारिश्रमिक और सेवा की अन्य शर्तें, यथास्थिति, राज्य सरकार द्वारा या सहकारी बैंक द्वारा सम्यक् रूप से परिवर्तित नहीं कर दी जातीं ।
(2) ऐसा कोई व्यक्ति जो नियत दिन को सिक्किम बैंक अथवा किसी भविष्य निधि, पेंशन या अन्य निधि या ऐसी निधि को प्रशासित करने वाला किसी प्राधिकारी से कोई पेंशन या अन्य अधिवार्षिकी या अनुकम्पा भत्ता या प्रसुविधा प्राप्त करने का हकदार है या प्राप्त कर रहा है, सहकारी बैंक या किसी भविष्य निधि, पेंशन या अन्य निधि या ऐसी निधि को प्रशासित करने वाले किसी प्राधिकारी द्वारा वही पेंशन, भत्ता या प्रसुविधा संदत्त की जाने का और उससे प्राप्त करने का तब तक हकदार होगा जब तक वह उन शर्तों का पालन करता है जिन पर पेंशन, भत्ता या प्रसुविधा दी गई थी और यदि इस बारे में यह प्रश्न पैदा होता है कि क्या उसने ऐसी शर्तों का पालन किया है तो उस प्रश्न का अवधारण राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा ।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, किसी व्यक्ति की 16 नवम्बर, 1976 के पश्चात् और नियत दिन के पूर्व की गई किसी नियुक्ति या उसको दी गई प्रोन्नति, वेतन-वृद्धि या पेंशन भत्ते या अन्य प्रसुविधा जो सामान्यतः नहीं दी गई होती या जो सिक्किम बैंक या किसी भविष्य निधि या 16 नवम्बर, 1976 के पूर्व प्रवृत्त किसी अन्य निधि के नियमों या प्राधिकारों के अधीन अनुज्ञेय नहीं हुई होती, प्रभावी या संदेय नहीं होगी या किसी सहकारी बैंक से या किसी भविष्य निधि, पेंशन या अन्य निधि से या उस निधि को प्रशासित करने वाले किसी प्राधिकारी से उनका दावा नहीं किया जा सकेगा, जब तक कि राज्य सरकार ने, यथास्थिति, साधारण या विशेष आदेश द्वारा उस नियुक्ति, प्रोन्नति या वेतन वृद्धि की पुष्टि न कर दी हो अथवा ऐसे पेंशन, भत्ते या अन्य प्रसुविधा के निरन्तर दिए जाने का निदेश न दे दिया हो ।
(4) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, सिक्किम बैंक के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी की सेवाओं का, राज्य सरकार या सहकारी बैंक को अन्तरण, ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी को उस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन किसी प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा और ऐसा कोई दावा किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी द्वारा ग्रहण नहीं किया जाएगा ।
(5) ऐसे व्यक्ति के बारे में जो नियत दिन के ठीक पूर्व सिक्किम बैंक के प्रबन्ध निदेशक का पद धारण कर रहा है, यह समझा जाएगा कि उसने नियत दिन को अपना पद रिक्त कर दिया है और इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि या किसी करार या संविदा में किसी बात के होते हुए भी, वह सिक्किम बैंक, राज्य सरकार या सहकारी बैंक से पदहानि के लिए या उसके नियोजन से सम्बन्धित किसी करार या संविदा के समय पूर्व परिसमापन के लिए किसी रकम का ऐसी पेंशन, रकम या अन्य प्रसुविधा के सिवाय हकदार नहीं होगा जो सहकारी बैंक उसे उस रकम का ध्यान रखते हुए मंजूर करे जो वह व्यक्ति सिक्किम बैंक के अधिकारी के रूप में तब प्राप्त करता, यदि यह अधिनियम पारित न हुआ होता और यदि वह अपने नियेाजन से मामूली अनुक्रम में निवृत्त हुआ होता ।
(6) जहां सिक्किम बैंक के प्रबन्ध निदेशक को, 16 नवम्बर, 1976 के बाद और नियत दिन के पूर्व, प्रतिकर या उपदान के रूप में कोई धनराशि संदत्त की गई है वहां सहकारी बैंक इस प्रकार संदत्त किसी धनराशि के प्रतिदाय का दावा करने का हकदार होगा यदि उस सदांय की, राज्य सरकार द्वारा, किसी साधारण या विशेष आदेश द्वारा, पुष्टि नहीं की जाती है ।
अध्याय 7
प्रकीर्ण
12. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव-इस अधिनियम के उपबन्ध, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या इस अधिनियम से भिन्न किसी विधि के आधार पर प्रभावी किसी लिखत में या किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी की किसी डिक्री या आदेश में, उनसे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे ।
13. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-(1) इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए केन्द्रीय सरकार, या उस सरकार के किसी अधिकारी, या राज्य सरकार या सहकारी बैंक या राज्य सरकार या सहकारी बैंक के किसी अधिकारी अथवा केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या सहकारी बैंक द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही न होगी ।
(2) इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात से हुए या हो सकने वाले किसी नुकसान के लिए, कोई भी वाद या अन्य विधिक कार्रवाई, केन्द्रीय सरकार या उस सरकार के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी या राज्य सरकार या सहकारी बैंक या राज्य सरकार या सहकारी बैंक के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी या राज्य सरकार या सहकारी बैंक के द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध न होगी ।
14. शास्तियां-जो कोई व्यक्ति,-
(क) सिक्किम बैंक के उपक्रमों की भागरूप किसी सम्पत्ति को, जो उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में है, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या सहकारी बैंक से सदोष विधारित करेगा; या
(ख) सिक्किम बैंक के किसी उपक्रम की भागरूप किसी सम्पत्ति का कब्जा सदोष अभिप्राप्त करेगा या उसे सदोष प्रतिधारित करेगा या ऐसे उपक्रम से संबंधित किसी ऐसे दस्तावेज को, जो उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में है, जानबूझकर विधारित करेगा अथवा केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या सहकारी बैंक या उस सरकार या राज्य सरकार या सहकारी बैंक द्वारा विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के निकाय को देने में असफल रहेगा अथवा सिक्किम बैंक के उपक्रमों से संबंधित किन्हीं आस्तियों, लेखा-बहियों, रजिस्टरों या अन्य दस्तावेजों को, जो उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में हैं, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या सहकारी बैंक अथवा केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या सहकारी बैंक द्वारा विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के निकाय को देने में असफल रहेगा; या
(ग) सिक्किम बैंक के किसी उपक्रम की भागरूप किसी सम्पत्ति को सदोष हटाएगा या नष्ट करेगा अथवा इस अधिनियम के अधीन कोई ऐसा दावा करेगा जिसके बारे में वह यह जानता है या उसके पास यह विश्वास करने का उचित कारण है कि वह मिथ्या या बिल्कुल गलत है,
वह कारावास से जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
15. कंपनी द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध कम्पनी द्वारा किया जाता है, वहां प्रत्येक व्यक्ति जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कम्पनी भी, उस अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही की जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे :
परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को किसी दण्ड का भागी नहीं बनाएगी, यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था अथवा उसने ऐसे अपराध के निवारण के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी, उस अपराध का दोषी समझा जाएगा तथा तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही की जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-
(क) कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है; तथा
(ख) फर्म के संबंध में, निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
16. शक्तियों का प्रत्यायोजन-(1) केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा प्रयोक्तव्य और धारा 17 और धारा 18 द्वारा प्रदत्त शक्तियों से भिन्न सभी या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग किसी ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा भी किया जा सकेगा, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं ।
(2) जब कभी उपधारा (1) के अधीन शक्ति का कोई प्रत्यायोजन किया जाता है तब वह व्यक्ति जिसे ऐसी शक्ति प्रत्यायोजित की गई है, केन्द्रीय सरकार के निदेशन, नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अधीन कार्य करेगा ।
17. नियम बनाने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगी ।
(2) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगा । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व, दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
18. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, जो इस अधिनियम के उपबन्धों से अंसगत न हो, उस कठिनाई को दूर कर सकेगी :
परन्तु ऐसा कोई आदेश नियत दिन से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।
19. अन्य विधियों में सिक्किम बैंक के प्रति निर्देश-नियम दिन से ही (इस अधिनियम या सिक्किम राज्य बैंक उद्घोषणा, 1968 से भिन्न), किसी विधि में या किसी संविदा या अन्य लिखत में सिक्किम बैंक के प्रति किसी निर्देश को, केन्द्रीय सरकार द्वारा किए गए किसी साधारण या विशेष आदेश में अन्यथा उपबन्धित के सिवाय, सहकारी बैंक के प्रति निर्देश समझा जाएगा ।
20. सिक्किम बैंक का विघटन-धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना जारी की जाने की तारीख को, सिक्किम बैंक विघटित हो जाएगा और सिक्किम राज्य बैंक उद्घोषणा, 1968 निरसित हो जाएगी, और साधारण खण्ड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) की धारा 6 के उपबंध ऐसे निरसन को उसी प्रकार लागू होंगे मानो उक्त उद्घोषणा केन्द्रीय अधिनियम थी ।
अनुसूची
[धारा 8 (1) देखिए]
सिक्किम स्टेट बैंक के शेयरों के केन्द्रीय सरकार को अंतरण के लिए रकम के संदाय की रीति
1. इस अनुसूची में शेयरधारक" से कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो नियत दिन के ठीक पूर्व, सिक्किम बैंक में, सिक्किम राज्य सरकार से भिन्न किसी शेयरधारक के रूप में रजिस्ट्रीकृत है ।
2. सिक्किम बैंक की शेयर पूंजी में के प्रत्येक शेयर के लिए, जो इस अधिनियम के कारण केन्द्रीय सरकार को अन्तरित और उसमें निहित हो गई है, केन्द्रीय सरकार उसके प्रत्येक शेयरधारक को इस अनुसूची के पैरा 3 में विनिर्दिष्ट रीति से, पचपन रुपए प्रति शेयर की दर से संगणित रकम देगी ।
3. प्रत्येक व्यक्ति को जो नियत दिन को सिक्किम बैंक में शेयरधारक के रूप में रजिस्ट्रीकृत है और जिसके शेयर इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन अर्जित कर लिए गए हैं, उसके द्वारा इस प्रकार धारित ऐसे प्रत्येक शेयर के लिए, पैरा 2 में विनिर्दिष्ट दर से संगणित रकम का, भारतीय रिजर्व बैंक के नाम दिए गए चैक द्वारा संदाय किया जाएगा ।
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