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DRDO के तत्कालीन डायरेक्टर पर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने का आरोप, जमानत पर हाई कोर्ट में फैसला सुरक्षित


Bombay High Court.png
16 Mar 2026
Categories: Hindi News

देश की सुरक्षा से जुड़े एक बड़े मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने अहम सुनवाई की है। पुणे के DRDO वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुरुलकर की जमानत याचिका पर अदालत ने सोमवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। डॉ. कुरुलकर पर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के संगीन इल्जाम है। महाराष्ट्र ATS ने उसे मई 2023 में गिरफ्तार किया था। अदालत में इस मामले पर दोनों पक्षों की लंबी बहस हुई। अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग कर देश की सुरक्षा से जुड़ी अहम जानकारी साझा की। वहीं बचाव पक्ष ने दावा किया कि साझा की गई जानकारी पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में मौजूद थी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया।

DRDO में डायरेक्टर पद पर तैनात था आरोपी

डॉ. प्रदीप कुरुलकर पुणे स्थित डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) में वरिष्ठ वैज्ञानिक था। वो वहां डायरेक्टर और डीई इंजीनियर के पद पर भी कार्यरत था। DRDO को फरवरी 2023 में सूचना मिली कि कुरुलकर संदिग्ध विदेशी संपर्कों से बिना अनुमति बातचीत कर रहा है। यह जानकारी बेहद गंभीर मानी गई क्योंकि वह रक्षा अनुसंधान से जुड़े महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा था। इसी आधार पर DRDO ने पहले आंतरिक जांच शुरू की। जांच में शुरुआती संकेत मिलने के बाद उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए। इसके बाद मामला सुरक्षा एजेंसियों तक जा पहुंचा।

DRDO ने जब्त किए मोबाइल और लैपटॉप

24 फरवरी 2023 को DRDO के अधिकारी डॉ. एस.वी. गाडे ने कुरुलकर के दो मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और एक डेस्कटॉप जब्त कर लिए। इन सभी डिवाइस की फोरेंसिक जांच DRDO ने अपने स्तर पर करवाई। जांच के दौरान इन उपकरणों में संदिग्ध चैट और संचार के सबूत मिले। इसके बाद DRDO की आंतरिक स्टैंडिंग कमेटी के सामने मामला रखा गया। कमेटी ने मामले को गंभीर मानते हुए आगे की जांच की सिफारिश की। इसी सिफारिश के आधार पर अप्रैल 2023 में सभी जब्त उपकरण महाराष्ट्र ATS को सौंप दिए गए। इसके बाद ATS ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की।

व्हाट्सएप चैट और कॉल के जरिए भेजी जानकारी

ATS की जांच में सामने आया कि कुरुलकर ने व्हाट्सएप चैट, वॉयस कॉल और वीडियो कॉल के जरिए संवेदनशील जानकारी साझा की। जांच एजेंसी का आरोप है कि उसने यह जानकारी विदेशी दुश्मन एजेंसियों तक पहुंचाई। आरोप है कि उसने अपने पद का फायदा उठाते हुए गोपनीय दस्तावेज और तकनीकी जानकारी साझा की। यह सिलसिला कई महीनों तक चलता रहा। जांच में यह भी सामने आया कि बातचीत में कई रक्षा परियोजनाओं का जिक्र किया गया था। इसके बाद ATS ने आधिकारिक तौर पर जासूसी का केस दर्ज किया।

मिसाइल और ड्रोन प्रोजेक्ट से जुड़ी थी जानकारी

अभियोजन पक्ष का कहना है कि कुरुलकर ने कई अहम रक्षा परियोजनाओं से जुड़ी जानकारी साझा की। इनमें मिसाइल सिस्टम, रुस्तम प्रोजेक्ट, SAM, भारतीय ड्रोन प्रोजेक्ट और क्वाड-कॉप्टर जैसी तकनीक शामिल हैं। इसके अलावा UCAV, ब्रह्मोस, अग्नि-6 और राफेल जैसे संवेदनशील कार्यक्रमों से जुड़े पहलुओं का भी जिक्र किया गया। आरोप है कि फिलीपींस को होने वाले रक्षा निर्यात से जुड़ी जानकारी भी साझा की गई। अभियोजन के मुताबिक ये सभी जानकारी देश की सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं। इसलिए यह मामला बेहद गंभीर माना जा रहा है।

विदेशी नंबर से हुआ था संपर्क

सरकारी वकील मंखुनवार देशमुख ने अदालत में बताया कि कुरुलकर को एक विदेशी नंबर से हनीट्रैप किया गया था। यह नंबर यूके का था लेकिन उसका इस्तेमाल पाकिस्तान से किया जा रहा था। जांच में सामने आया कि आरोपी ने उस व्यक्ति द्वारा भेजी गई APK फाइलें भी डाउनलोड की थीं। इसके बाद दोनों के बीच कई बार बातचीत हुई। अभियोजन का कहना है कि कुरुलकर ने अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के दौरान भी जानकारी साझा की। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई चर्चाओं की जानकारी भी सामने वाले को दी।

बचाव पक्ष ने किया ये दावा

कुरुलकर की ओर से वरिष्ठ वकील अशोक मुंदरगी ने अदालत में बचाव पेश किया। उन्होंने कहा कि आरोपी ने जो भी जानकारी साझा की, वह पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में मौजूद थी। उनका कहना था कि कुरुलकर ने कोई भी दुर्भावनापूर्ण APK फाइल डाउनलोड नहीं की। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि गिरफ्तारी के समय कुरुलकर अपनी सेवानिवृत्ति के करीब थे। बचाव पक्ष ने दलील दी कि इस मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए।

अदालत 7 अप्रैल को सुनाएगी फैसला

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने फिलहाल फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस शिवकुमार डिगे की पीठ ने कहा कि इस मामले में विस्तृत आदेश जारी किया जाएगा। अदालत ने साफ किया कि जमानत याचिका पर अंतिम फैसला 7 अप्रैल को सुनाया जाएगा। यह मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। इसलिए अदालत हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है। अब सभी की नजरें 7 अप्रैल को आने वाले फैसले पर टिकी हुई हैं।

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