पाक्सो अधिनियम के तहत झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देकर जबरन धन वसूली तथा मारपीट के आरोपित कानपुर निवासी अधिवक्ता अखिलेश दुबे को जमानत देने से इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इन्कार कर दिया है। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद निर्णय में कहा, ‘अपीलार्थी प्रभावशाली व्यक्ति है और रिहा किए जाने की स्थिति में वह गवाहों को डराने के अलावा सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है। गवाहों का बयान दर्ज होने के बाद अपीलार्थी नया जमानत आवेदन प्रस्तुत करने के लिए स्वतंत्र होगा।’
अधिवक्ता पर कानपुर में केस दर्ज है
अखिलेश दुबे के खिलाफ किदवईनगर थाने में अगस्त 2025 में बीएनएस की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कराया गया है। वादी मुकदमा व्यवसायी रवि सतीजा ने एफआइआर में आरोप लगाया कि उसने अखिलेश को कुछ पैसे दिए थे। जब और पैसे देने से इन्कार किया तो अखिलेश ने उसके खिलाफ वर्ष 2022 में नौबस्ता थाने में विभिन्न धाराओं के साथ-साथ पाक्सो एक्ट में एफआइआर लिखवा दी। बाद में विवाद सुलझाने के नाम पर करीब ढाई करोड़ रुपये ले लिए। यह रकम याची ने खुद तथा सह अभियुक्त लवी मिश्रा के माध्यम से ली।
पुलिस रिपोर्ट कोर्ट ने 2024 में स्वीकार कर ली थी
नौबस्ता में दर्ज मामले में पुलिस रिपोर्ट कोर्ट ने 2024 में स्वीकार कर ली थी। कोर्ट ने कहा, याची और वादी मुकदमा के बेटे के बीच हुई बातचीत की आडियो रिकार्डिंग से पता चलता है कि याची न पीड़िता का वकील था और न ही आरोपित का, लेकिन उसने पीड़िता पर अपने आरोप वापस लेने के लिए दबाव डाला। यह मामला ट्रायल के अधीन है। रिकार्ड की जांच से स्पष्ट है कि याची के खिलाफ एफआइआर में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है। पीड़िताओं के बयान पैसे उगाहने के लिए झूठे आरोप लगाने संबंधी आरोपों का समर्थन करते हैं।
याची के अधिवक्ता ने झूठा फंसाए जाने की बात कही
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि याची ने पैसे के बदले आरोपितों के साथ समझौता करने के बाद अंतिम रिपोर्ट में हेरफर कराई। याची के अधिवक्ता ने झूठा फंसाए जाने की बात कही। दावा किया कि रिकार्ड की गई बातचीत में कोई समय या तारीख अथवा पैसे की मांग नहीं है। इससे जुड़े पेनड्राइव के संबंध में भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 63(4) के तहत कोई उचित प्रमाण पत्र नहीं है। ऐसे ही एक मामले में याची को सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2025 में जमानत पर रिहा किया गया है। वह 14 अगस्त 2025 से जेल में है।
राज्य सरकार की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा
राज्य सरकार की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीष गोयल ने जमानत अर्जी का विरोध किया। कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने गुण-दोष के आधार पर विचार नहीं किया और केवल इस आधार पर कि आरोप पत्र दायर किया गया है, अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की जरूरत नहीं है, शर्तों के साथ जमानत दी है। सरकार की तरफ से कहा गया कि वादी मुकदमा के ड्राइवर कंचन कुशवाहा ने जो चश्मदीद गवाह है, घटनाओं का स्पष्ट रूप से वर्णन किया है।
यह भी आरोप लगाया
कहा कि इसमें याची द्वारा मोबाइल फोन पर धमकी, विभिन्न तारीखों पर जबरन वसूली धनराशि का उल्लेख है। बयान में उसने यह भी कहा है कि अखिलेश शुक्ला और अखिलेश दुबे के दबाव में उसने कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे 2022 में रवि सतीजा के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गई। बाद में अखिलेश शुक्ला और याची ने उस पर मामला वापस लेने के लिए दबाव डाला और उसका बयान संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने भी दर्ज करवाया।
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