"शादी से जुड़े विवाद के एक मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने पति को जमकर फटकार लगाई। उसने दो टूक कहा कि आप किसी नौकरानी से शादी नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक जीवनसाथी चुन रहे हैं। आपको भी काम में हाथ बंटाना होगा। कोर्ट ने कहा कि आपको खाना बनाने, कपड़े धुलने जैसे काम में पत्नी के साथ हाथ बंटाना पड़ेगा। आज का जमाना पहले से अलग हो गया है।"
दरअसल, पति क्रूरता के आधार पर पत्नी से तलाक की मांग कर रहा था। कोर्ट ने कहा कि पत्नी अगर घर का काम ठीक से नहीं करती है तो यह क्रूरता की कैटेगरी में नहीं आता है। अब समय बदल गया है, पति को भी इन कामों में हाथ बंटाना चाहिए। कोर्ट ने पहले दोनों को मध्यस्थता के लिए कहा था, लेकिन दोनों के बीच बात नहीं बनी। इसके बाद शुक्रवार को कोर्ट ने अगली तारीख पर पेश होने के लिए कहा है।"
"पति-पत्नी की शादी साल 2017 में हुई थी और उनके एक आठ साल का बेटा भी है। पति इस मामले में याचिकाकर्ता है। उसने आरोप लगाया है कि शादी के हफ्तेभर बाद से ही पत्नी बदल गई और उसके साथ खराब व्यवहार करने लग गई। वह पति के माता-पिता के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करती थी। इसके अलावा, जब खाना बनाने के लिए कहा जाता था तो उससे भी इनकार कर देती थी।"
"वहीं, एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट एक फरार जोड़े की ओर से सुरक्षा देने का अनुरोध करने वाली एक याचिका शुक्रवार को दाखिल की गई जिस पर न्यायालय ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि इस राहत के लिए वे दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करें। दिलचस्प बात यह है कि जिस वकील ने फरार जोड़े की सुरक्षा के लिए याचिका दाखिल की थी उन्हें वह उच्चतम न्यायालय के पार्किंग क्षेत्र में ही मिला था। वकील ने कहा कि जोड़ा सोशल मीडिया रील्स से प्रभावित होकर और इस गलत धारणा के साथ उच्चतम न्यायालय आया था कि वह न्यायालय परिसर में ही शादी कर सकता है और भारत के प्रधान न्यायाधीश उसे तुरंत सुरक्षा प्रदान कर देंगे।"
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