मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोपाल के कलेक्टर को आदेश दिया है कि राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया से जुड़े सभी निशानेबाजों को ट्रेनिंग और खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए तुरंत 1000 कारतूस दिए जाएं। पहले भोपाल के कलेक्टर ने 30 निशानेबाजों को मिलने वाले कारतूसों की संख्या घटा दी थी। उन्होंने कहा था कि ये खिलाड़ी पर्याप्त खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले रहे हैं।
निशानेबाजों ने दायर की थी याचिका
इब्राहिम जावेद खान और भोपाल के तीन अन्य निशानेबाजों ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने कहा कि आर्म्स एक्ट के तहत नियम बने हुए हैं। इन नियमों में अलग-अलग कैटेगरी के निशानेबाजों के लिए कारतूसों का कोटा तय है। एक बड़े निशानेबाज को साल में 1 लाख कारतूस मिल सकते हैं और वह एक बार में 50 हजार कारतूस रख सकता है। वहीं, उभरते हुए खिलाड़ियों को साल में 30,000 कारतूस मिल सकते हैं और वे एक बार में 15,000 कारतूस रख सकते हैं।
1000 से घटाकर किए थे 500 कारतूस
जिला कलेक्टर के आदेश के बाद, निशानेबाजों का कोटा घटाकर एक बार में 500 कारतूस और साल में 1,000 कारतूस कर दिया गया था। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वे खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले पा रहे हैं और ट्रेनिंग के लिए भी उनके पास पर्याप्त कारतूस नहीं हैं। राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि जरूरत पड़ने पर कोटा बढ़ाया जा सकता है और 500 की जगह 1,000 कारतूस दिए जा सकते हैं।
कोर्ट ने जारी किया आदेश
जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने भोपाल के राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की लिस्ट में शामिल सभी निशानेबाजों को तुरंत 1000 कारतूस जारी करने का आदेश दिया। बेंच ने यह भी कहा कि जब ट्रेनिंग के लिए उनके कारतूस खत्म हो जाएं, तो वे कलेक्टर को सूचित करें ताकि उन्हें और कारतूस दिए जा सकें।
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