"इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि गांव सभी के प्रस्ताव व एसडीएम के अनुमोदन से लोगों को दिए गए कृषि भूमि पट्टे के खिलाफ किसी पीड़ित को ही शिकायत करने का अधिकार है। जो पीड़ित न हो, उसकी शिकायत पर की गई कार्रवाई अवैध है। कोर्ट ने कहा कि पीड़ित वह है, जिसे इस कार्य से विधिक क्षति पहुंची हो या अनुचित तरीके से वंचित किया गया हो या उसे कुछ देने से इनकार कर दिया गया हो।"
"ऐसा व्यक्ति किसी कार्य के खिलाफ शिकायत कर सकता है। इसी के साथ कोर्ट ने भूमि आवंटन व अनुमोदन को निरस्त करने के एडिशनल कलेक्टर बुलंदशहर के आदेश व इस मामले में पुनरीक्षण अर्जी खारिज करने के अपर आयुक्त मेरठ के आदेश को विधि विरुद्ध करार देते हुए रद्द कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने बुलंदशहर की सिकंदरा तहसील के बिरौली ताजपुर गांव के सतीश व 97 अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।"
"मामले के तथ्यों के अनुसार 20 अप्रैल 1994 के गांव सभा के प्रस्ताव से याचियों को कृषि पट्टा दिया गया, जिसका अनुमोदन भी एसडीओ ने कर दिया। इसके बाद गांव के ही जयपाल सहित 36 लोगों ने जमींदारी विनाश अधिनियम की धारा 198(4) के तहत कलेक्टर से शिकायत की। इस मामले में दो केस दर्ज किए गए। एसडीओ की रिपोर्ट आई कि गांव सभा का प्रस्ताव उचित प्रक्रिया अपनाए बगैर दिया गया था। इसपर एडीएम ने अर्जी स्वीकार कर ली लेकिन आयुक्त ने इसके खिलाफ दाखिल निगरानी स्वीकार कर एडीएम का आदेश समाप्त कर दिया।"
"उसके खिलाफ राजस्व परिषद ने भी पुनरीक्षण खारिज कर दी और आयुक्त के आदेश को सही माना। हाईकोर्ट ने मामले को निर्णय के लिए एडीएम को वापस किया, जिसके बाद एडीएम ने पट्टा निरस्त कर दिया आयुक्त ने इसे सही माना और पुनरीक्षण अर्जी खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने इनके आदेश यह कहते हुए रद्द कर दिए कि जिनकी शिकायत पर कार्रवाई की गई और आदेश दिया गया, वे पीड़ित नहीं थे और उन्हें शिकायत करने का अधिकार ही नहीं था।"
प्रदेश के भीतर गाय का परिवहन अपराध नहीं
"इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि गोवध निरोधक कानून के तहत गाय या गोमांस प्रदेश के बाहर ले जाना अपराध है लेकिन प्रदेश के भीतर गाय का परिवहन करना अपराध नहीं है। इसी के साथ कोर्ट ने बलिया से दुधारू गाय खरीद कर मऊ जिले में ले जाने वाले वाहन को जब्त करने के डीएम बलिया के आदेश को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया और जब्त वाहन उसके मालिक के पक्ष में रिलीज करने का निर्देश दिया है।"
"यह आदेश न्यायमूर्ति एससी शर्मा ने मंजीत कुमार मौर्य की पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। याचिका पर अधिवक्ता सुधीर कुमार सिंह ने बहस की। अधिवक्ता सुधीर कुमार सिंह का कहना था कि बोलोरो पिकअप वाहन से एक गाय, चितबड़ा गांव से मऊ जिले के चकाघाट ले जाई जा रहीं थीं, जिसे बलिया जिले के फेफना थाने की पुलिस ने पकड़कर सीज कर दिया। फेफना पुलिस की इस कार्यवाही के विरुद्ध, डीएम बलिया के समक्ष प्रार्थना पत्र दिया गया। डीएम वाहन को अवमुक्त करने से इनकार कर दिया। डीएम बलिया के इस आदेश के विरुद्ध यह याचिका की गई थी। तर्क दिया गया कि गाय का परिवहन बलिया से मऊ के लिए था जो प्रदेश के ही भाग हैं इसलिये गोवध निवारण अधिनियम 1964 के नियम 16 के तहत कोई अपराध नहीं हुआ। सुनवाई के बाद कोर्ट ने डीएम बलिया के आदेश को निरस्त करते हुए वाहन को पंजीकृत स्वामी के पक्ष में अवमुक्त करने का आदेश किया।"
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