इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा है कि फरार आरोपी को पकड़ने के नाम पर उसके परिजनों को परेशान करना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि संविधान की भावना के भी विपरीत है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति जेजे मुनीर एवं तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने रिटायर कैप्टन मंगल सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए की है। याची का आरोप है कि पुलिस उसके घर पर लगातार दबिश दे रही है और उसे व उसकी पत्नी को थाने बुलाकर बेटे के ठिकाने के बारे में जानकारी देने के लिए दबाव बना रही है।
मामले में के तथ्यों के अनुसार याची का पुत्र संदीप तोमर दहेज हत्या के मामले में आरोपी है। उसकी अपील पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट से पहले ही खारिज हो चुकी है। वह फरार चल रहा है। पंजाब पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए कानपुर नगर की गुजैनी पुलिस की मदद ली, जिसके बाद पुलिस ने याची के घर पर कई बार दबिश दी। कोर्ट ने याची के अधिवक्ता आशुतोष कुमार सिंह को सुनकर कहा कि आरोपी की तलाश के नाम पर परिवार को प्रताड़ित करना कानून के दायरे में नहीं आता।
कोर्ट ने टिप्पणी कि कि किसी बेटे को त्यागने का कोई प्रमाण पत्र नहीं होता और इस आधार पर पुलिस द्वारा सवाल उठाना पूरी तरह गलत व भ्रामक है। कोर्ट ने पुलिस की इस कार्यप्रणाली को ब्रिटिश दौर की पुरानी और असंवैधानिक पद्धति बताया, जो आज के आधुनिक और तकनीकी युग में स्वीकार्य नहीं है।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि याची और उसकी पत्नी को बार-बार थाने बुलाया गया, जो उनकी निजता व गरिमा के अधिकार का उल्लंघन है। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए पुलिस को निर्देश दिया कि याची को किसी भी प्रकार से परेशान न करे, न ही थाने बुलाए और न ही उसके घर पर दबिश दे। साथ ही कानपुर नगर गुजैनी थाने के संबंधित थाना प्रभारी को चेतावनी देते हुए भविष्य में ऐसी कार्रवाई से बचने को कहा है।
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