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UP में बेवजह मदरसों की जांच पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त, योगी सरकार और ATS को किया तलब


Hathras Gang Rape Case and Yogi Adityanath.PNG
22 Apr 2026
Categories: Hindi News

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली योगी सरकार के फैसले एक बार सवालों के घेर है। मदरसों से जुड़े एक मामहेल में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए कानून और संविधान की मर्यादा को मजबूती से थामे रखने का संदेश दिया है। अदालत के रुख ने साफ कर दिया है कि सिर्फ शक के आधार पर बड़े पैमान पर कार्रवाई को न्यायिक कसौटी पर नहीं परखा जाएगा।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में लगभग चार हजार मदरसों की एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) के जरिये की जा रही जांच के मामले में राज्य सरकार और एटीएस से जवाब मांगा है। अदालत ने निर्देश दिया है कि इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज और पूरी जानकारी 4 मई को कोर्ट में पेश की जाए। इसी दिन इस मामले की अगली सुनवाई भी होगी।

यह आदेश टीचर्स एसोसिएशन मदरसा अरबिया यूपी और मदरसा फारूकिया नदवा की मैनेजमेंट कमेटी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया । हाई कोर्ट जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्यवीर सिंह की पीठ ने मामले को सुनते हुए अहम टिप्पणी की कि अदालत ने कहा कि सरकार के जरिये जारी आदेशों में किसी भी खास मदरसे का नाम नहीं दिया गया है और न ही कथित आतंक वित्त पोषण के स्रोत या उससे जुड़ी कोई ठोस जानकारी सामने रखी गई है।

कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि सिर्फ संदेह के आधार पर हजारों मदरसों की जांच का कोई ठोस आधार नहीं बनता। इसलिए सरकार और एटीएस को पूरा रिकॉर्ड अदालत के सामने रखना होगा, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कार्रवाई किस आधार पर की जा रही है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वीके सिंह और अधिवक्ता मोहम्मद अली औसाफ ने अपनी दलीलें पेश कीं। उन्होंने अदालत को बताया कि मदरसा बोर्ड ने अपने सर्वे के आधार पर करीब चार हजार मदरसों, जिनमें सहायता प्राप्त हों, गैर सहायता प्राप्त या प्राइवेट, की लिस्ट अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को भेजी थी। इसके बाद सरकार ने कुछ मदरसों की बड़ी इमारतों और उनके फंडिंग स्रोतों पर संदेह जताते हुए एटीएस से जांच कराने का फैसला लिया।

अदालत ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि इस तरह की व्यापक जांच बिना ठोस आधार के नहीं की जा सकती। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि 4 मई को इस मामले को नई सूची में सुनवाई के लिए रखा जाएगा और उस दिन सभी जरूरी दस्तावेज पेश किए जाएं।

इस फैसले का स्वागत करते हुए एसोसिएशन के महासचिव और याचिकाकर्ता दीवान साहब जमां खान ने कहा कि यह निर्णय न्यायपालिका की स्वतंत्रता, संविधान की सर्वोच्चता और लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती का प्रतीक है। उनके मुताबिक, हाई कोर्ट ने शुरुआती नजर में ही यह माना है कि एटीएस के जरिये की जा रही जांच उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है और यह मदरसा बोर्ड अधिनियम 2004, मदरसा नियमावली 2016 के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि इस आदेश से मदरसों के खिलाफ फैलाए जा रहे गलत प्रचार पर भी रोक लगेगी और सच्चाई सामने आएगी।

गौरतलब है कि एटीएस की जांच के दौरान मदरसों के बैंक खातों, आर्थिक लेन-देन और भवन निर्माण के स्रोतों की गहन जांच की जा रही है। खास तौर पर विदेशी और संदिग्ध फंडिंग पर नजर रखी जा रही है, जिससे मदरसा मैनेजमेंट में चिंता का माहौल बना हुआ है। दूसरी ओर, मदरसा संगठनों का कहना है कि इस तरह की सामान्य जांच एटीएस के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती। साथ ही निजी बैंक खातों की जानकारी मांगे जाने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि लगातार चल रही इस जांच से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है और इसका असर छात्रों के भविष्य पर पड़ सकता है।

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