Citation : 2023 Latest Caselaw 780 Patna
Judgement Date : 15 February, 2023
IN THE HIGH COURT OF JUDICATURE AT PATNA
Civil Writ Jurisdiction Case No.12258 of 2009
======================================================
Manoj Kumar Thakur, Son of Late Satya Narayan Singh, Village - Amritpur, P.S. - Tajpur, District - Samastipur, Bihar.
... ... Petitioner/s Versus
1. Chairman Cum Managing Director represented through Zonal Manager (Appellate Authority), Central Bank of India, Zonal Office, Pawapuri Vihar, N.H. 28, Bhagwnapur, Muzaffarpur - 1.
2. Regional Manager (Disciplinary Authority), Central Bank of India, Regional Office, Alalpatti, Darbhanga - 846003.
3. Senior Manager (Enquiry Officer), Central Bank of India, Zonal Officer, Muzaffarpur.
4. Assistant Manager (Presenting Officer), Central Bank of India, Regional Office, Darbhanga.
5. Senior Manager, Central Bank of India, Branch Office, Pusa Farm, Samastipur, Bihar.
6. Manager (Cash), Central Bank of India, Branch Office, Pusa Farm, Samastipur, Bihar.
... ... Respondent/s ====================================================== Appearance :
For the Petitioner/s : Mr. Mirtyunjay Kumar Mishra, Advocate For the Respondent/s : Mr. Ajay Kumar Sinha, Sr. Advocate Mr. Ajit Kumar Sinha, Advocate Ms. Minu Kumari, Advocate Mr. Dilkash Khan, Advocate Mr. Pravin Kumar, Advocate ====================================================== CORAM: HONOURABLE MR. JUSTICE P. B. BAJANTHRI ORAL JUDGMENT Date : 15-02-2023
The petitioner has unnecessarily impleaded respondents by
name insofar as respondent Nos. 3 to 6 without alleging any
allegation of malafide or bias against such of those persons who Patna High Court CWJC No.12258 of 2009 dt.15-02-2023
have been impleaded therefore, petitioner's counsel is hereby
directed to delete their names during the course of the day.
2. In the instant petition, petitioner has prayed for the
following relief/reliefs:
"(i) For setting aside the order of dismissal dated 16.06.2007 passed by respondent no. 2 in his capacity as Disciplinary Authority in the matter of departmental inquiry held against the petitioner, Head Cashier - II Pusa Farm Branch of the respondent Bank.
(ii) For a direction to the respondents to reinstate the petitioner with full back wages.
(iii) For holding that the major punishment of dismissal from service without notice is against the doctrine of proportionality in administrative law.
(iv) For holding that the punishment of dismissal being disproportionate to the misconduct alleged against the petitioner is violative of Article 14 of the Constitution of India.
(v) For holding that the entire disciplinary proceeding is vitiated by non-observance of principle of Natural Justice and has proceeded in a pre-judicial manner without application of mind.
(vi) For any other relief or reliefs to which the petitioner may deemed entitled."
3. The petitioner while working as Head Cashier - II
alleged to have committed misdeeds for which he was subjected
to disciplinary proceedings in framing two charges. The following
are the two charges:
"आरोप संखया- 1: "Sri. Manjoj Kumar Thakur was incharge of Cash Department. On 18.10.2006 he tried to close cash safe by inflating the Cash Patna High Court CWJC No.12258 of 2009 dt.15-02-2023
Balance by an amount of Rs. 172000/-, Sri. Thakur written the cash memo and inflated the demomination of notes to the tune of Rs. 172000/- and produced the cash memo before Sri. Bharat Bhushan, ABM, Pusa Farm, who was second signatory of the cash memo. During the course of counting the notes, Sri. Bhushan found that amount of Rs. 172000/- was less in the packets of Rs. 500/- and 100/- denominations. After enquiry from Sri. Thakur, he told that he has given Rs. 172000/- to one customer who has assured him to pay the amount by 4 PM. Thus, Sri. Thakur misappropriated the Bank's fund and tried to conceal the fact."
उपरर रकत आरोप को साववत करने हे तर प्रबनधन प्रवतवनवध दारा प्रबनधन प्रदरर 2,3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 एवं 10 प्रसतर त वकरा गरा एवं प्रबनधन गवाह 1 एवं 2 के बरान दारा भी वसतर वससवत को काररवाही पर लाने का प्ररास वकरा गरा। प्र . प्रद. 7 एवं 8 मे आरोवपत कमरचारी दारा वलवखत तथरो को प्र.ग. 1 के मर खर परीकण प्रशन सं . 19 एवं 20 के उतर दारा भी काररवाही पर लारा गरा।
प्र.प्रर 7 दारा आरोवपत कमरचारी ने राखा प्रबनधक को सूवचत वकरा है वक उसने र. 172000/- एक कसटमर को वदरा वजसने 4 बजे राम तक रपरा पहरंचा दे ने की बात कही सी परनतर पहरँबारा नहीं । प्र. प्रद 8 दारा आरोवपत कमरचारी ने राखा प्रबनधक से अनर रोध वकरा है वक उसके दारा खजर की गई र. 172000/- की रावर की पूवतर की जार वजसे वे कल तक पूरा कर दे ने
र्री भारत भूषण, प्रबनधक दारा प्रबनधन प्रदरर 10 मे वलवखत तथरो, प्र. प्रदरर 4 एवं 5 तसा प्र. गवाह 1 दारा मर खर परीकण प्रशन सं . 22 के उतर तसा प्र. गवाह- 2 दारा मर खर परीकण प्रशन से 4 के उतर का सं दभर दे ते हरए प्रबनधन प्रवतवनवध दारा रह आरोप वसद करने का प्ररास वकरा गरा है । प्रबनधन प्रवतवनवध ने प्र. प्रद 4 एवं 5 के 'पे ड टू डे कॉलम मे वदखाई गई रावर के अनतर एवं प्र. प्रद. 6 की रावर तसा इस सं बंध मे गवाहो के बरान का सं दभर दे ते हरए भी इस आरोप को साववत करने का प्ररास वकरा है । इस आरोप के सं दभर मे प्रबनधन प्रवतवनवधने प्र. प्रद. 2 मे राखा के ववरषठ प्रबनधक दारा ववणरत घटना के ववसतृ त वववरण का भी उलले ख वकरा है वजसके दारा के तर् ीर प्रबनधक को र. 500/- एवं र. 100/- पै केट मे करल र172000/- की कमी की सूचना दी गई है ।
दसू री तरफ बचाव पक दारा रह तकर वदरा गरा है वक कारर वनषपादन के दौरान घटी रावर की भरपाई उसी वदन रानी 18.10.2006 को ही आरोवपत कमरचारी दारा कर दी गई। बचाव पक के वलवखत तकर मे र भी ववणरत है वक वजस तरह की घटना वदनांक 18.10.2006 को घटी ऐसी वससवत मे कोई भी कमरचारी सामानर वससवत मे नहीं रह सकता और नौकरी के छट ू ने के भर से वह करछ भी कर दे ने को तै रार हो सकता है । आगे ववणरत है वक पवरवससवत ववरे ष मे वरीर प्रबनधक के दवाब पर आरोवपत कमरचारी दारा वलवखत रप से वदए गए पत्र उनके सामानर वससवत मे नहीं होने का सं केत दे ती है । बचाव पक ने अपने वलवखत तकर मे इसे वलवपकीर भूल भी कहा है ।
पर नः बचाव पक ने प्र. प्रद. 6 की तर लना प्र. प्रद. 5 से करते हरए इनके मौवलकता पर सं देह जावहर वकरा है तसा रोकड जवरन वमलाने एवं आरोवपत कमरचारी से जबरन मनचाहा पत्र प्रापत करने का वजक् र वकरा है ।
बचाव पक ने अपने वलवखत तकर के पृ षठ सं . 4 पर वलखा है "18.10.2006 को रोकड बनदी के समर असवाभाववक रप से जो रावर घट गई उससे मे री वचनता इस सतर पर बढ गई वजससे मै पूणरत: मानवसक रप से असं तरवलत हो गरा, एक तरफ घटे Patna High Court CWJC No.12258 of 2009 dt.15-02-2023
रावर को पूरा करना दसू री ओर सं भाववत वनषकलं वकत से वा पर प्रवतकू ल असर का खतरा, दोनो ही वससवत करछ इस तरह बन गई मै हतास हो गरा और राखा प्रबनधक ने जै सा वडकटे रन वदरा मै वलखता गरा रारद इसवलए वक मे री नौकरी पर इसका दरषप्रभाव न पडे सास ही मै पूरी तरह असहार एवं भरभीत सा।" आगे रह भी वलखा गरा है वक रवद आरोवपत कमरचारी की नीरत अनरसा होती तो रारद वह र. 172000/- जै सी बडी रकम का भरपाई नही करता।
प्रसतर त प्रदरी,र गवाहो के बरान एवं दोनो पको के वलवखत तकर के सावधानी पूवरक अधररन एवं ववशले षण से सपषट होता है वक वदनांक 18.10.2006 को आरोवपत कमरचारी ने भौवतक रप मे उपलबध नगदी रे ष से र. 172000/- की अवधक रावर वदखाते हरए कैर मे मो (प्र. प्रद.- 4) तै रार वकरा और उसपर अपना हसताकर करने के उपरानत उसे दस ू रे हसताकरकतार र्री भारत भूषण, प्रबनधक को सर पद ू र वकरा। नकदी रे ष के भौवतक सतरापन के दौरान नोटो के वगनती के क् रम मे र्री भारत भूषण दारा र. 172000/- की कमी पाई गई जो वक र. 500/- और र.100/- के मूलरवगर के नोटो मे सी अतः प्रबनधक दारा प्र.प्रद. 4 पर हसताकर नहीं वकरा गरा । इस सं बंध मे पूछ ताछ करने पर आरोवपत कमरचारी दारा मौवखक व वलवखत (प्र. प्रद. 7 एवम 8) मे बतारा गरा वक उसने एक ग्राहक को र.172000/- की रावर दी है जो 4 बजे तक लौटाने का आशवासन वदरा परनतर पहरँचारा नही। पर न: आरोवपत कमरचारी के अनर रोध पर र्री भारत भूषण, प्रबनधक दारा वदए गए चे क की रावर से र. 172000/- की कमी की भरपाई करने के उपरानत दस ू रा कैर मे मो (प्र.प्रद. 5) तै रार वकरा गरा वजसपर दोनो चाभी धारक दारा हसताकर कर कैर बनद वकरा गरा । इस प्रकार रह सपषट होता है वक आरोवपत कमरचारी दारा बै क वनवध का दरवनरोजन वकरा गरा एवं प्र. प्रद.- 4 को तै रार कर तथर को छरपाने का प्ररास वकरा गरा।
इस आरोप के सं दभर मे बचाव पक के वलवखत तकर मे कही कैर मे पाई गई कभी को कारर वनषपादन के दौरान असवभाववक रप से घटी रावर बताई गई है तो कही इसे वलवपकीर भूल बतारा गरा है । सास ही रह भी वलखा गरा है वक कमी की रावर की भरपाई उसी वदन आरोवपत कमरचारी दारा कर दी गई । इस तरह बचाव पक के वलवखत तकर मे उलले वखत बाते परसपर ववरोधी है ।
बचाव प्रवतवनवध दारा प्रबनधन गवाह 1 एवं 2 का ववसतृ त प्रवतपरीकण वकरा गरा परनतर आरोप का खं डन कमरचारी दारा नहीं वकरा जा सका। बचाव पक का रह तकर वक पवरवससवत ववरे ष मे वरीर प्रबनधक के दवाब पर आरोवपत कमरचारी दारा वलवखत रप मे पत्र वदरा गरा रह सवीकारर नहीं प्रतीत होता करोवक प्रदान गवाह- 2 ने प्रवत परीकण प्रशन सं . 17 के उतर दारा सपषट वकरा है वक आरोवपत कमरचारी ने प्रपद- 7 को सवरं अपने हसतवलवप मे सववववे क से वलखा । सास ही प्र. ग.- 2 दारा प्रवत परीकण प्रशन सं . 15 के उतर से रह भी सपषट होता है वक आरोवपत कमरचारी तनाव की वससवत मे नहीं से । बचाव पक के वलवखत तकर मे भी कैर मे पाई गई र.172000/- की कमी एवं उसकी भरपाई को अप्रतरक रप से सवीकार वकरा गरा है ।
उपरर कत तथरो के आलोक मे आरोप सं खरा 1 सावबत हरआ।
आरोप संखया 2 "Sri. Thakur borrowed cash from Sri. Bharat Bhushan. ABM. Pusafarm from his centconvenient a/c and deposited the amount and cash count be closed on 18.10.2006".
Patna High Court CWJC No.12258 of 2009 dt.15-02-2023
उपरर रकत आरोप को सावबत करने के वलए प्रबनधन प्रवतवनवध ने प्रबनधन प्रदरर 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 एवं 10 प्रसतर त वकरा। प्रबनधन प्रवतवनवध ने आरोप के समसरन मे प्र. प्रद. 7 एवं 8 जो वक आरोवपत कमरचारी वजसमे आरोवपत कमरचारी दारा र. दारा सववलवखत आवे दन पत्र है , मे ववणरत तथरो का वजक् र वकरा 172000/- की रावर, 4 बजे तक रपरा लौटा दे ने के आशवासन पर, एक ग्राहक को वदए जाने , रपरा नही लोटाने एवं इस समसरा के हल करने हे तर राखा प्रबनधक से अनर रोध एवं रपरा कलतक लौटा दे ने का उलले ख है ।
प्रबं धन प्रवतवनवध दारा आरोप के समसरन मे प्र.ग. 1 के मर खर परीकण प्रशन सं 19 एवं 20 के उतर का भी सं दभर वदरा गरा है वजसमे प्र.ग. 1 ने प्र. प्रद. 7 एवं 8 के ववषर वसतर को बतलारा है जो उपरोकत ववणरत तथरो के अनर कूल है । आगे प्रबनधन गवाह 1 ने पर नः परीकण प्रशन सं . 1 के उतर मे भी बतारा वक वदनांक 18.10.2006 को रोकड वमलान के समर र 172000/- रोकड मे कमी पाई गई ओर प्रधान खजांबी के अनर रोध पर प्रबनधक ने कमी रावर की भरपाई हे तर अपने से नटकमे वनएनट खाता स. 454 पर र. 172000/- का चे क वनगरत वकरा प्रबनधन प्रवतवनवध ने आरोप को वसद करने हे तर प्र . ग. 2 दारा मर खर परीकण प्रशन सं 4 एवं 6 के उतर को भी सं दवभरत वकरा है वजससे अनर बातो के अलावा रह भी सपषट होता है वक आरोवपत कमरचारी ने र्री भारत भूषण प्रबनधक, (प्र.ग. 2) से कैर राटर ज रावर की वरवससा करने का अनर रोध वकरा और उसी आलोक मे प्रबनधक ने अपने से नटकनभे वनएनट खाता से र. 172000/मनोज करमार ठाकरर को उधार वदए और उसी से जो कैर राटर ज हरआ सा उसकी भरपाई की गई। उसके बाद नोट के सही मूलर वगर सास दस ू रा कैर मे मो वलखकर दोनो चाभो धारक दारा कैर को बनद वकरा गरा। गर खर परी. प्रशन 6 के उतर मे प्र. ग. 2 ने सपषट वकरा वक भर गतान सवरप उनहे करछ नहीं वमला। चे क का र. 172000/- उनहोने र्री मनोज करमार ठाकरर, प्रधान खजांची को उधार वदरा वजससे वदनांक 18.10.06 की कैर के राटर ज की भरपाई की जा सकी। प्र. ग. 2 ने प्रवत परीकण प्रशन सं खरा 12, 13, एवं 14 एवं 28 के उतर दारा भी उपरोकत तथरो की पर वषट की । प्रबनधन प्रवतवनवध ने आरोप के समसरन मे प्र. प्रद. 6 जो वक र्री भारत भूषण प्रबनधक के से नट कनभे वनरएनट खाता सं . 454 का चे क सं . 001101 र.172000/- वदनांक 18.10.2006 है , को भी प्रसतर त वकरा वजसके सं बंध मे प्र.ग. 1 र्री बी के पोदार, वरीर प्रबनधक ने मर खर परीकण प्रशन सं 23 एवं पर नः परीकण प्रशन सं खरा 1 के उतर मे बतारा वक आरोवपत कमरचारी के आग्रह पर र्री भारत भूषण प्रबनधक ने अपने से नटकनभे वनएनट खाता सं खरा 454 पर उकत चे क वनगरत वकरा वजससे वदनांक 18 10.2006 को कैर राटर ज की रावर को समारोवजत वकरा जा सकासबनधन माह 2 र्री भारत भूषण प्रबनधक ने मर खर परीकण प्रशन सं 6 एवं प्रवतपरीकण प्रशन सं . 12 के उतर दारा भी उकत तथरो को समपर षट वकरा ।
बचाव पक दारा प्रबनधन गवाह 1 एवं 2 के प्रवतपरीकण के दौरान रा अनर वकसी अवभले ख दारा उकत आरोप का खं डन नहीं वकरा जा सका। बचाव पक ने अपने वलवखत तकर मे भी इस आरोप के खं डन हे तर कोई समीचीन तकर प्रसतर त नही कर पाए बवलक वलवखत तकर के पृ षठ सं . 4 पर रह ववणरत वकरा है वक रवद आरोवपत कमचाररी की नीरत अनरसा होती तो रारद वह र. 172000/ जै सी बडी रकम का भरपाई नही करता रा इसका दोषारोपण अनर समबवनधत अवधकारी पर भी करता, परनतर घटे रावर की पूरी वजममे दारी अपने उपर ले कर तसा उसकी भरपाई कर बै क के आवसरक वहतो को सर रवकत रखा गरा।
प्रसतर त प्रबनधन प्रदरोर, गवाहो के बरान एवं दोनो पको के वलवखत तकोरं के ववशले षण से रह सपषट होता है वक आरोवपत कमरचारी के अनर रोध पर र्री भारत भूषण प्रबनधक ने अपने से नटकनभे वनएनट खाता पर काटे गए र. 172000/- के चे क Patna High Court CWJC No.12258 of 2009 dt.15-02-2023
के रप मे आरोवपत कमरचारी को र. 172000/- का उधार वदरा वजसकी रावर का समारोजन करते हरए केर राटर ज र. 17/2000/- की भरपाई के सास वद. 18.10.2006 को कैर बनद
उपरर रकत तथरो के आलोक मे आरोप सं खरा 2 साववत हरआ।
सं केप मे आरोपो के सं दभर मे मे रा वनषकषर इस प्रकार है
आरोप सं . 1 सावबत हरआ
आरोप सं 2 सावबत हरआ
ववभागीर जॉच काररवाही की मूल प्रवत आपको पूवर मे ही प्रेवषत है । एतद् दारा आपको सभी प्रबनधन प्रदरर, प्रबनधन प्रवतवनवध का वलवखत तकर एवं बचाव प्रवतवनवध का वलवखत तकर प्रेवषत वकरा जा रहा है । कृपरा पावती सूवचत करने का कषट वकरा जार।
ववशवासभाजन, sd/-
(एस. एन. झा) जाँच अवधकारी
प्रवत-
1. के तर् ीर कारारलर, डी.ए.डबलू. दरभं गा।
2. आं चवलक कारारलर, डी.ए.डबलू. मर जफफरपर र ।
3. केनद्रीर कारारलर, सतकर ता ववभाग, मर मबई।"
4. Departmental inquiry was concluded in imposition of
penalty of dismissal from service on 16.06.2007 and it was subject
matter of appeal before the appellate authority in which also the
petitioner had suffered an order on 29.12.2008. Hence the present
writ petition.
5. Learned counsel for the petitioner submitted that having
regard to the alleged charges, imposition of penalty would be too
harsh. It is submitted that he has rendered 14 years of service.
During his entire service, it is an isolated case, therefore, Patna High Court CWJC No.12258 of 2009 dt.15-02-2023
imposition of penalty of dismissal from service and its
confirmation would be harsh.
6. Per contra, learned counsel for the respondents resisted
the aforesaid contention and submitted that there is no infirmity in
imposition of penalty and its confirmation by the appellate
authority. The alleged charges are relating to temporary
misappropriation of cash of Rs. 1,72,000/-. The charges are that
petitioner had lent the amount to one customer Sudhir Kumar
Singh on the assurance that he would return the alleged amount at
4:00 pm on 18.10.2006, the date on which the alleged transaction
has taken place. Thereafter, petitioner has borrowed money from
bank officials and remitted. In other words, it is temporary
misappropriation. The petitioner was working with the Central
Bank of India. The Bank is dealing with various money
transactions with the customers. The petitioner has temporarily
misappropriated customers' money, who have trusted the
respondent - Central Bank of India. Therefore, it is serious charge
which has been proved in the inquiry. Hence no interference is
called for.
7. Heard learned counsel for the respective parties.
8. Perusal of the charge memo, it is crystal clear that it is a
serious charge of temporary misappropriation of respondent Patna High Court CWJC No.12258 of 2009 dt.15-02-2023
Bank/customers' money. In fact, the petitioner has admitted
relating to temporary misappropriation in his memorandum of
appeal in para 4, it is stated that "He never denied the fact that
cash handed over by him at the closing hour on 18.10.2006 was
short by 1,72,000/- and he immediately made good the loss. This
is the single incident of shortage of cash in his entire service life."
9. In the light of the aforesaid admission, the petitioner has
not made out a case so as to interfere with the order of the
disciplinary/appellate authority. Moreover imposition of penalty
of dismissal with reference to the alleged proved charges is not
disproportionate, since the allegation of misappropriation money
and it is in respect of financial institution like Bank.
10. Accordingly, petition stand dismissed
(P. B. Bajanthri, J)
GAURAV S./-
AFR/NAFR CAV DATE Uploading Date 17.02.2023 Transmission Date
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