सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (23 जून, 2026) को एक याचिकाकर्ता से कहा कि वह पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनके नाम राशन सूची से भी हटाए जाने के आरोप से जुड़े अपने मामले को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख करे।
यह मामला जस्टिस बी। वी। नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के समक्ष पेश किया गया और इसे तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा, 'एसआईआर के दौरान जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें राशन सूची से भी हटाया जा रहा है, जिससे बड़ी समस्या पैदा हो रही है। बड़ी संख्या में लाभार्थियों के बाहर होने का खतरा है।'
इस पर जस्टिस नागरत्ना ने सवाल किया कि याचिकाकर्ता ने कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख क्यों नहीं किया। बेंच ने कहा, 'कलकत्ता हाईकोर्ट काम कर रहा है, वहां जाइए।' वकील ने तर्क दिया कि एसआईआर प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। इस पर पीठ ने टिप्पणी की कि राशन कार्ड से जुड़े मामले में कार्रवाई का एक अलग आधार है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'कृपया इसे हाईकोर्ट में ले जाइए।' चार जून को पश्चिम बंगाल के खाद्य और आपूर्ति विभाग ने राज्यव्यापी सत्यापन अभियान का आदेश दिया था, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली से अयोग्य लाभार्थियों की पहचान कर उनके नाम हटाना था। यह प्रक्रिया मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के परिणामों से जुड़ी हुई थी।
आधिकारिक आदेश के अनुसार, इस अभियान के दायरे में वे राशन कार्ड धारक आएंगे जिनके नाम एसआईआर के दौरान हटाए गए या जिन्हें अयोग्य पाया गया था और इस अभियान को 15 जून तक पूरा किया जाना था।
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