नेहरू कॉलोनी के निवासियों को सोमवार को बड़ी राहत मिली, जब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने क्षेत्र में चल रही ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर सात जुलाई तक अंतरिम रोक लगा दी। अदालत ने अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं, जिससे फिलहाल कॉलोनी में किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं की जाएगी।
नेहरू कॉलोनी के छह निवासियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि नगर निगम ने पर्याप्त सूचना और वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना मकानों को गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 30 मई से शुरू हुई कार्रवाई में धार्मिक स्थलों सहित सैकड़ों मकानों को नुकसान पहुंचा है, जिससे अनेक परिवार प्रभावित हुए हैं।
नगर निगम के अधिवक्ता सतीश आचार्य ने बताया कि छह याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने 7 जुलाई तक अंतरिम रोक लगाई है। मामले की अगली सुनवाई भी इसी दिन निर्धारित की गई है। याचिका में प्रभावित लोगों के पुनर्वास का मुद्दा भी उठाया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्हें न तो वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया गया और न ही घरों से सामान निकालने के लिए पर्याप्त समय दिया गया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फिलहाल ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने का आदेश दिया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कार्रवाई के भय से कॉलोनी में पिछले कई सप्ताह से अनिश्चितता का माहौल बना हुआ था। विरोध-प्रदर्शन के दौरान कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई थीं। निवासियों ने अपनी मांगों को लेकर कई बैठकों और पंचायतों का आयोजन किया था।
मिली जानकारी के अनुसार, नेहरू कॉलोनी का एक हिस्सा प्रस्तावित एलिवेटेड रोड और फरीदाबाद-गुरुग्राम रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) परियोजना के दायरे में आता है। बताया जा रहा है कि करीब 60 एकड़ में फैली कॉलोनी की 1.2 किलोमीटर लंबी पट्टी इस परियोजना से प्रभावित हो सकती है। नगर निगम अब तक इस क्षेत्र में करीब 300 मकान, एक मंदिर और एक मस्जिद को हटा चुका है।
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