सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसजेंडर अमेंडमेंट एक्ट 2026 की सुनवाई के दौरान माहौल गरमा गया। सीनियर वकील एएम सिंघवी और जस्टिस जोयमाल्या बागची के बीच तीखी नोक-झोंक हुई। सिंघवी ने आरोप लगाया कि नया कानून सीधे तौर पर नाल्सा जजमेंट को बेअसर कर रहा है। इस पर बेंच ने सख्त रुख अपनाते हुए कई सवाल दागे। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या 140 करोड़ के देश में इस कानून की आड़ में आरक्षण का खेल शुरू हो सकता है? सिंघवी ने कोर्ट से गुहार लगाई कि कानून के असर को देखते हुए इस पर तत्काल अंतरिम रोक लगाई जाए। हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत ने साफ कर दिया कि फिलहाल स्टे देने का कोई सवाल ही नहीं उठता। कोर्ट ने कहा कि इस संवैधानिक मुद्दे की गहराई से जांच के लिए तीन जजों की विशेष बेंच का गठन किया जाएगा।

फिलहाल सभी राज्यों को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा गया है। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने भी साफ किया कि यह कानून जबरन लिंग परिवर्तन को रोकने के लिए जरूरी है।

‘आप ऐसा नहीं कह सकते’: जब जस्टिस बागची ने सिंघवी को रोका

सुनवाई के दौरान एएम सिंघवी ने दलील दी कि यह संशोधन नाल्सा जजमेंट को शून्य करने की कोशिश है, जबकि फैसले का आधार नहीं हटाया गया। इस पर जस्टिस जोयमाल्या बागची ने तुरंत उन्हें टोकते हुए कहा, ‘आप ऐसा नहीं कह सकते!’

जस्टिस बागची ने साफ किया कि संशोधन ने उस कानून के बुनियादी ढांचे (Substratum) को ही बदल दिया है, जिसके तहत नाल्सा मामले की जांच हुई थी। अब ‘आत्म-पहचान’ की जगह ‘मेडिकल इवैल्यूएशन’ ने ले ली है। कोर्ट का इशारा था कि कानून में बदलाव करना संसद का अधिकार है, जिसे सीधे तौर पर अदालती फैसले की अवहेलना नहीं कहा जा सकता।

‘मानसिक बनावट और सर्जरी’ पर सिंघवी की दो टूक

सिंघवी ने जजों के सामने दलील रखी कि किसी व्यक्ति का मानसिक और मनोवैज्ञानिक मेकअप उसके जेंडर को तय करता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई अपनी मर्जी से ब्रेस्ट सर्जरी या लिंग परिवर्तन करवाना चाहता है, तो एक्ट उसे अवैध क्यों मान रहा है?

उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि अस्पताल अब ऑपरेशन करने से मना कर रहे हैं क्योंकि एक्ट इसकी इजाजत नहीं देता। सिंघवी ने इसे आर्टिकल 21 के तहत निजता के अधिकार का हनन बताया और मांग की कि जो लोग अभी इलाज के बीच में हैं, उन्हें राहत दी जाए।

सीजेआई ने पूछा- क्या यह आरक्षण के लिए ‘मुखौटा’ तो नहीं?

बहस के बीच सीजेआई सूर्यकांत ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया। उन्होंने पूछा कि इतने बड़े देश में क्या लोग आरक्षण जैसी सुविधाओं का फायदा उठाने के लिए ट्रांसजेंडर होने का ढोंग (Masquerade) नहीं करेंगे?

सिंघवी ने फौरन पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने पूरी जांच की है और फिलहाल इस श्रेणी में कोई आरक्षण नहीं दिया जा रहा है। सिंघवी ने यह भी साफ किया कि माता-पिता अपनी मर्जी बच्चों पर नहीं थोप सकते कि वे सर्जरी नहीं करा सकते।

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