पूर्णिया से लोकसभा सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की सुरक्षा बढ़ाने की मांग वाली याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से मिल रही लगातार धमकियों के मद्देनजर सांसद पप्पू यादव ने अपनी सुरक्षा को 'वाई' श्रेणी से बढ़ाकर 'जेड' श्रेणी करने की गुहार लगाई है। हालांकि, देश की शीर्ष अदालत ने इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करने के बजाय सांसद को अपनी लंबित याचिका पर जल्द सुनवाई के लिए वापस पटना हाईकोर्ट का रुख करने का निर्देश दिया है।

पटना हाईकोर्ट में लंबित है मामले की सुनवाई

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह निर्देश तब दिया जब सांसद पप्पू यादव के अधिवक्ता ने अदालत को पटना हाईकोर्ट की लेटलतीफी से अवगत कराया। अधिवक्ता ने पीठ को बताया कि पटना हाईकोर्ट ने 19 नवंबर, 2024 को सांसद की सुरक्षा बढ़ाने के अनुरोध वाली याचिका पर नोटिस तो जारी किया था, लेकिन उसके बाद न तो वह आदेश वेबसाइट पर अपलोड किया गया और न ही बार-बार अनुरोध करने के बावजूद मामले को सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया। इसी देरी के कारण सांसद को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

लॉरेंस बिश्नोई गैंग से है जान का खतरा

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अधिवक्ता से पूछा कि उनके मुवक्किल को आखिर 'जेड' कैटेगरी की सुरक्षा की जरूरत क्यों है? इस पर अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि पप्पू यादव को कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जान से मारने की धमकियां मिली हैं, जिसके कारण उनकी जान को गंभीर खतरा है। इसके बाद शीर्ष अदालत ने जानना चाहा कि क्या सांसद के पास अपने कोई निजी सुरक्षाकर्मी हैं? अधिवक्ता ने इसका जवाब 'ना' में दिया।

कागजों तक ही सीमित रही 'वाई प्लस' सुरक्षा

अदालत में यह बात भी सामने आई कि सांसद पप्पू यादव को पहले 'वाई प्लस' सुरक्षा दी गई थी, लेकिन वह जमीनी हकीकत में न होकर केवल कागजों पर ही सिमटी रही। पीठ ने पूरी स्थिति को समझने के बाद कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि पटना हाईकोर्ट याचिकाकर्ता के अनुरोध पर गंभीरता से विचार करेगा और उचित आदेश पारित करेगा। गौरतलब है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत 'वाई' श्रेणी में 11 सुरक्षाकर्मी आवंटित किए जाते हैं, जबकि 'जेड' श्रेणी की सुरक्षा में 22 सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाते हैं।

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