इलाहाबाद हाईकोर्ट से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाए हैं। इतना ही नहीं कोर्ट ने स्वेच्छा से शादी करने वाले बालिग कपल पर दर्ज एफआईआर को लेकर सख्त टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा कि बालिग कपल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर पुलिस गलत कर रही है।

पुलिस की सक्रियता चिंताजनक-हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अन्य अपराधों के बजाय विवाह के मामलों की एफआईआर और फिर पुलिस की सक्रियता चिंताजनक है। हाईकोर्ट ने ऐसे मामलों को सुधारात्मक कदम उठाने के लिए डीजीपी को निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि कौन किसके साथ कैसे रहेगा? यह बताने का किसी को अधिकार नहीं है। कोर्ट ने आगे कहा कि प्रत्येक नागरिक को यह संदेश दिया जाना चाहिए कि वयस्कता की आयु और संवैधानिक संस्कृति का सम्मान करना चाहिए।

जानिए कोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने आगे कहा कि लड़की से बातचीत के बावजूद बालिग जोड़े के खिलाफ गुमशुदगी की एफआईआर दर्ज हुई। हाईकोर्ट ने इसे बेहद गंभीर और चिंताजनक बताते हुए युवा दंपत्ति के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि संविधान किसी भी वयस्क के जीवन में किसी को भी बाधा की अनुमति नहीं देता। बालिग माने जाने वाले जोड़े की इच्छा पर हावी होने की किसी को भी अनुमति नहीं है।

हाईकोर्ट ने डीजीपी को दिया निर्देश

हाईकोर्ट ने पुलिस को लेकर कहा कि ऐसे मामलों की एफआईआर दर्ज करके जोड़ो का पीछा करना गैरकानूनी है। कोर्ट ने कहा कभी कभी पुलिस जबरन अलग करने और दुल्हन को उसके परिवार के पास भेजने के इरादे से घोर अन्याय करती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐसे मामलों में दर्ज होने वाली एफआईआर में सुधारात्मक रवैया अपनाए जाने के लिए डीजीपी को निर्देश दिया।

हाईकोर्ट ने कहा कि बेशक, एक बच्चे का मामला जो बालिग नहीं है, वो अलग है। पुलिस ऐसी FIR दर्ज करके बहुत बड़ा अहित कर रही है और उससे भी ज्यादा जिसमें जवान जोड़े का पीछा कर रही है। कभी-कभी गलत मकसद से उन्हें जबरदस्ती अलग कर दिया जाता है और दुल्हन को उसके माता-पिता या उसके परिवार के पास वापस भेज दिया जाता है। ये काम बिल्कुल गैर-कानूनी है और इनमें से कुछ तो जुर्म भी है। 

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