इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बाराबंकी के सिटी इंटरमीडिएट कॉलेज में एक शिक्षक की पुनः ज्वाइनिंग के मामले में गंभीर अनियमितताएं पाते हुए डीजी एसटीएफ को मामले की जांच कराने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही शिक्षक को अवैध रूप से दिए गए वेतन की वसूली के निर्देश भी दिए हैं। न्यायालय ने मामले में बाराबंकी के जिला विद्यालय निरीक्षक, कॉलेज के प्रधानाचार्य और सम्बंधित शिक्षक की भूमिका पर संदेह जताते हुए जांच कराने के भी निर्देश दिए। इसके साथ ही न्यायालय ने यह भी पाया कि डीआईओएस ने रिकॉर्ड में हेरफेर और भ्रामक जानकारी देने का प्रयास किया, जिसके चलते निष्पक्ष जांच के लिए उनके तत्काल तबादले के भी निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त, अयोध्या मंडल के तत्कालीन संयुक्त शिक्षा निदेशक के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने को कहा गया है। न्यायालय ने मामले में अनुपालन रिपोर्ट तलब करते हुए, मामले की अगली सुनवाई 28 मई 2026 को निर्धारित की है।
कोर्ट ने शिक्षा विभाग में आदेशों के संप्रेषण में हो रही लापरवाही पर भी चिंता जताई
न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने यह आदेश कॉलेज की प्रबंध समिति की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। अपने आदेश में कोर्ट ने शिक्षा विभाग में आदेशों के संप्रेषण में हो रही लापरवाही पर भी चिंता जताई और मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि भविष्य में सभी आदेश ई-मेल व व्हाट्सएप के माध्यम से भी भेजे जाएं, ताकि विवाद की स्थिति न बने। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया पाया कि संबंधित शिक्षक अभय कुमार को बिना प्रबंध समिति की अनुमति के दोबारा कार्यभार ग्रहण कराया गया, जो विधि विरुद्ध है।
ऐसी पुनः नियुक्ति का कोई विधिक आधार नहीं
आदेश के अनुसार, अभय कुमार वर्ष 2018 में सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्त हुए थे, लेकिन उन्होंने जून 2024 में छत्तीसगढ़ के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में प्रवक्ता पद पर नियुक्ति ग्रहण कर ली थी। इसके लिए उन्होंने प्रबंध समिति से अनुमति नहीं ली और बाद में नौकरी पर अधिकार बनाए रखने का अनुरोध भी किया, जिसे प्रबंध समिति ने अस्वीकार कर दिया। इसके बावजूद संयुक्त शिक्षा निदेशक व जिला विद्यालय निरीक्षक के निर्देश पर सितंबर 2025 में उन्हें दोबारा कॉलेज में ज्वाइन करा दिया गया और अक्टूबर 2025 का वेतन भी दे दिया गया। न्यायालय ने इसे पूरी तरह अवैध बताते हुए कहा कि ऐसी पुनः नियुक्ति का कोई विधिक आधार नहीं है।
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