सुप्रीम कोर्ट में रोजाना विभिन्न मामलों की सुनवाई होती है। कई बार जज की टिप्पणियों या फिर मामले की गंभीरता के चलते इन पर चर्चा होती है। ऐसे ही एक तलाक से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को आया, जिसमें जज ने अहम टिप्पणी की। इस मामले में पत्नी ने तलाक के लिए अर्जी दाखिल की थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान पति ने कहा कि उसे तलाक नहीं चाहिए। बाद में कोर्ट ने पति को 50 लाख रुपये की एलिमनी देने का आदेश दिया। हालांकि, पति का कहना था कि उसकी पत्नी ने इतना एलिमनी तो मांगा भी नहीं है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पति पर बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जैसे ही तलाक की कार्यवाही शुरू होती है, हर कोई बेरोजगार बन जाता है।

सुप्रीम कोर्ट में तलाक से जुड़े मामले की सुनवाई चल रही थी। इस पर पति ने कहा कि मुझे तलाक नहीं चाहिए। कोर्ट ने पूछा कि तलाक के लिए अर्जी पत्नी ने दी है? किस आधार पर यह दी है, जिस पर पति ने जवाब दिया कि क्रूरता और परित्याग के आधार पर। कोर्ट ने कहा, ''व्यभिचार का झूठा आरोप, जिसे आप साबित नहीं कर पाए, यही अपने आप में तलाक का एक आधार है। क्या पत्नी गुजारा भत्ता (एलिमनी) नहीं मांग रही है?

"इस पर पति ने जवाब दिया कि नहीं। वह इसकी डिमांड नहीं कर रही। तब कोर्ट ने कहा कि इस पर तो आपको खुश होना चाहिए। क्या आप एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं? पति ने कहा कि अब मैं एक फ्रीलांसर हूं। कोर्ट ने इस पर कहा, ''तलाक की कार्यवाही शुरू होने के बाद हर कोई बेरोजगार बन जाता है। पत्नी कहती है कि उसने इस्तीफा दे दिया है, पति कहेगा कि उसने अपनी नौकरी छोड़ दी है, या उसे पत्नी की शिकायत पर नौकरी से निकाल दिया गया है। कुछ न कुछ ऐसा ही होता है। अब आप फ्रीलांसर बन गए हैं।

पत्नी को 50 लाख रुपये दें एलिमनी

कोर्ट ने फिर पति से पूछा, ''क्या आप उस पर व्यभिचार का आरोप साबित कर पाए?'' इस पर पति ने जवाब दिया कि नहीं। पत्नी ने कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा तलाक मंजूर किए जाने और हाई कोर्ट द्वारा उसे सही ठहराए जाने के बाद, मैंने दूसरी शादी कर ली है। पति ने फिर कहा कि कृपया मेरी बात एक पल के लिए सुन लें। इस पर कोर्ट ने ऑर्डर दिया कि 50 लाख रुपये एलिमनी के तौर पर पत्नी को दें। पति ने फिर कहा कि यह तो उसकी मांग भी नहीं है। इस पर कोर्ट ने कहा कि नहीं, यह हम कह रहे हैं। पति ने फिर से कहा, ''क्या मैं एक और बात कह सकता हूं? हम मध्यस्थता के जरिए बच्चे की कस्टडी के मामले पर विचार कर सकते हैं।'' इस पर कोर्ट ने खारिज कह दिया।

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