धार्मिक संस्था (दुरुपयोग निवारण) अधिनियम, 1988
(1988 का अधिनियम संख्यांक 41)
[1 सितंबर, 1988]
धार्मिक संस्थाओं का राजनीतिक और अन्य प्रयोजनों के लिए
दुरुपयोग निवारित करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के उनतालीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रांरभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम धार्मिक संस्था (दुरुपयोग निवारण) अधिनियम, 1988 है ।
(2) इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय संपूर्ण भारत पर है ।
(3) यह 26 मई, 1988 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) गोला-बारूद" का वही अर्थ है जो आयुध अधिनियम, 1959 (1959 का 54) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ख) में है ;
(ख) आयुध" का वही अर्थ है तो आयुध अधिनियम, 1959 (1959 का 54) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ग) में है ;
(ग) किसी धार्मिक संस्था के संबंध में, प्रबंधक" से अभिप्रेत है ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जो, तत्समय, अकेले या अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर उस संस्था के कार्यकलापों, कृत्यों या संपत्तियों का प्रशासन, प्रबंध या अन्यथा नियंत्रण करता है और इसके अंतर्गत कोई धार्मिक कृत्यकारी भी है (चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो) ;
(घ) राजनीतिक क्रियाकलाप" के अंतर्गत किसी राजनीतिक दल के लक्ष्यों या उद्देश्यों या राजनीतिक प्रकृति के किसी आंदोलन, समस्या या प्रश्न का, सभाएं, प्रदर्शन, जुलूस, निधि संग्रहण या संवितरण आयोजित करके, या निदेश या आदेश जारी करके, या किसी अन्य साधन से संप्रवर्तन या प्रचार करने का क्रियाकलाप है, और इसके अंतर्गत संसद्, किसी राज्य विधान-मंडल या किसी स्थानीय प्राधिकरण के किसी निर्वाचन के लिए अभ्यर्थी के रूप में निर्वाचन लड़ने वाले किसी व्यक्ति द्वारा या उसकी ओर से ऐसा क्रियाकलाप भी है ;
(ङ) राजनीतिक दल" से अभिप्रेत है व्यक्तियों का कोई ऐसा संगम या निकाय,-
(i) जो, तत्समय प्रवृत्त, निर्वाचन प्रतीक (आरक्षण और आबंटन) आदेश, 1968 के अधीन, किसी राजनीतिक दल के रूप में भारत के निर्वाचन आयोग के पास रजिस्ट्रीकृत है या रजिस्ट्रीकृत हुआ समझा जाता है ; या
(ii) जिसने किसी विधान-मंडल के निर्वाचन के लिए अभ्यर्थी खड़े किए हैं किंतु जो निर्वाचन प्रतीक (आरक्षण और आबंटन) आदेश, 1968 के अधीन किसी राजनीतिक दल के रूप में रजिस्ट्रीकृत नहीं है या रजिस्ट्रीकृत हुआ नहीं समझा जाता है ; या
(iii) जो कोई राजनीतिक क्रियाकलाप करने के लिए या निर्वाचन के माध्यम से या अन्यथा राजनीतिक शक्ति अर्जित करने या उसका प्रयोग करने के लिए संगठित किया गया है ;
(च) धार्मिक संस्था" से किसी धर्म या मत के संप्रवर्तन के लिए कोई संस्था अभिप्रेत है, और इसके अंतर्गत सार्वजनिक धार्मिक उपासना के स्थान के रूप में प्रयुक्त कोई स्थान या परिसर है, चाहे वह किसी भी नाम या अभिधान से ज्ञात हो ।
3. कतिपय प्रयोजनों के लिए धार्मिक संस्थाओं के उपयोग का प्रतिषेध-कोई भी धार्मिक संस्था या उसका प्रबंधक, संस्था के, या उसके नियंत्रण के अधीन, किसी परिसर का उपयोग निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए न तो करेगा न करने देगा,-
(क) किसी राजनीतिक क्रियाकलाप का संप्रवर्तन या प्रचार ; या
(ख) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन किसी अपराध के अभियुक्त या सिद्धदोष ठहराए गए किसी व्यक्ति को संश्रय देना ; या
(ग) कोई आयुध या गोला-बारूद जमा करना ; या
(घ) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के उल्लंघन में कोई माल या वस्तुएं रखना ; या
(ङ) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन किसी विधिमान्य अनुज्ञप्ति या अनुज्ञा के बिना कोई सन्निर्माण या किलेबंदी, जिसके अंतर्गत तहखाने, बंकर, टावर या दीवालें भी हैं, बनाना या खड़ी करना ;
(च) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन प्रतिषिद्ध या किसी न्यायालय द्वारा किए गए किसी आदेश के उल्लंघन में कोई विधिविरुद्ध या ध्वसंक कार्य करना ; या
(छ) कोई ऐसा कार्य करना जिससे विभिन्न धार्मिक, मूलवंशीय, भाषाई या प्रादेशिक समूहों या जातियों या समुदायों के बीच असामंजस्य या शत्रुता, घृणा या वैमनस्य की भावना की अभिवृद्धि होती है या अभिवृद्धि होने का प्रयास होता है ; या
(ज) कोई ऐसा क्रियाकलाप करना जो भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता के प्रतिकूल है ; या
(झ) राष्ट्र गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 (1971 का 69) के उपबंधों के उल्लंघन में कोई कार्य करना ।
4. धार्मिक संस्था के भीतर आयुध और गोला-बारूद ले जाने पर निर्बंधन-कोई भी धार्मिक संस्था या उसका प्रबंधक,धार्मिक संस्था के भीतर किन्हीं आयुधों या गोला-बारूद का, या कोई आयुध या गोला-बारूद ले जाने वाले किसी व्यक्ति का प्रवेश नहीं होने देगा :
परंतु इस धारा की कोई बात-
(क) सिक्ख धर्म के मानने वाले किसी व्यक्ति द्वारा कृपाण धारण करने और लेकर चलने पर लागू नहीं होगी ; या
(ख) ऐसे आयुधों पर लागू नहीं होगी जिनका प्रयोग संस्था के, रूढ़ि या प्रथा द्वारा स्थापित, किसी धार्मिक संस्कार या अनुष्ठान के भाग के रूप में किया जाता है ।
5. कतिपय क्रियाकलापों के लिए धार्मिक संस्थाओं की निधियों के उपयोग का प्रतिषेध-कोई भी धार्मिक संस्था या उसका प्रबंधक, संस्था की, या उसके नियंत्रण के अधीन, किन्हीं निधियों या अन्य संपत्तियों का उपयोग किसी राजनीतिक दल के फायदे के लिए या किसी राजनीतिक क्रियाकलाप के प्रयोजन के लिए या ऐसा कोई कार्य करने के लिए जो किसी विधि के अधीन अपराध के रूप में दंडनीय है, न तो करेगा न करने देगा ।
6. राजनीतिक विचारों का प्रचार करने के लिए धार्मिक मंच का प्रतिषेध-कोई भी धार्मिक संस्था या उसका प्रबंधक, उसके तत्वावधान में आयोजित या हो रहे किसी समारोह, उत्सव, सत्संग, शोभा यात्रा या सभा का उपयोग किसी राजनीतिक क्रियाकलाप के लिए नहीं होने देगा ।
7. शास्तियां-जहां कोई धार्मिक संस्था या उसका प्रबंधक धारा 3, धारा 4, धारा 5 या धारा 6 के उपबंधों का उल्लंघन करेगा वहां प्रबंधक और ऐसे उल्लंघन से संसक्त प्रत्येक व्यक्ति कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।
8. इस अधिनियम के अधीन सिद्धदोष ठहराए गए या आरोपपत्रित व्यक्तियों की निरर्हता-(1) किसी धार्मिक संस्था के किसी प्रबंधक या अन्य कर्मचारी को इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध के लिए दोषसिद्धि पर, उसकी पदवी या पद से हटा दिया जाएगा और वह, किसी अन्य विधि में इसके प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, किसी धार्मिक संस्था में प्रबंधक के रूप में या किसी अन्य हैसियत में नियुक्ति के लिए उसकी दोषसिद्धि की तारीख से छह वर्ष की अवधि के लिए निरर्हित होगा ।
(2) जहां किसी धार्मिक संस्था का कोई प्रबंधक या अन्य कर्मचारी इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का अभियुक्त है और ऐसे व्यक्ति के अभियोजन के लिए अरोप-पत्र किसी न्यायालय में दाखिल किया जाता है और आरोप-पत्र पर विचार करने के पश्चात् तथा अभियोजन पक्ष और अभियुक्त की सुनवाई के पश्चात् न्यायालय की यह राय है कि प्रथमदृष्ट्या मामला बनता है, वहां वह उस व्यक्ति को विचारण के लंबित रहने तक, उसकी पदवी या पद की शक्तियों का प्रयोग या कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोकने का आदेश या निदेश पारित करेगा ।
(3) जहां किसी प्रबंधक या अन्य कर्मचारी को उपधारा (1) के अधीन हटा दिया गया है, या उपधारा (2) के अधीन रोक दिया गया है, वहां ऐसे हटाए जाने या रोक दिए जाने के परिणामस्वरूप हुई रिक्ति को उस रीति से भरा जा सकेगा जो उक्त धार्मिक संस्था को लागू विधि में उपबंधित है ।
9. कतिपय व्यक्तियों का पुलिस को सूचना देने के लिए आबद्ध होना-धार्मिक संस्था का प्रत्येक प्रबंधक या अन्य कर्मचारी, उस पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर धार्मिक संस्था स्थित है, इस अधिनियम के उपबंधों के किसी उल्लंघन या किसी आसन्न उल्लंघन के बारे मे सूचना देने के लिए आबद्ध होगा और ऐसा करने में किसी असफलता के लिए वह भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 176 के अधीन दंडनीय होगा ।
10. निरसन और व्यावृत्ति-(1) धार्मिक संस्था (दुरुपयोग निवारण) अध्यादेश, 1988 (1988 का अध्यादेश 3) निरसित किया जाता है ।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी ।
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