नागा पहाड़ी-त्युएन्संग क्षेत्र अधिनियम, 1957
(1957 का अधिनियम संख्यांक 42)
[29 नवम्बर, 1957]
आसाम के नागा पहाड़ी-त्युएन्संग क्षेत्र को प्रशासनिक
एकक के रूप में बनाने हेतु उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के आठवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम नागा पहाड़ी-त्युएन्संग क्षेत्र अधिनियम, 1957 है ।
(2) यह ऐसी तारीख को प्रवृत्त होगा, जिसे केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे ।
2. नागा पहाड़ी-त्युएन्संग क्षेत्र का बनाया जाना-इस अधिनियम के प्रारम्भ से, आसाम राज्य में, ऐसे जनजाति क्षेत्रों का मिलाकर, जो ऐसे प्रारम्भ पर पूर्वोत्तर सीमान्त अभिकरण के नागा पहाड़ी जिला और त्युएन्संग सीमान्त खंड के रूप में ज्ञात थे, नागा पहाड़ी-त्युएन्संग क्षेत्र के नाम से एक नया प्रशासनिक एकक बनाया जाएगा ।
3. संविधान की षष्ठम् अनुसूची का संशोधन-संविधान की षष्ठम् अनुसूची में, पैरा 20 में,-
(क) उपपैरा (2क) के पश्चात्, निम्नलिखित उपपैरा अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
(2ख) नागा पहाड़ी-त्युएन्संग क्षेत्र में ऐसे क्षेत्र समाविष्ट होंगे, जो इस संविधान के प्रारम्भ पर नागा पहाड़ी जिला और नागा जनजाति क्षेत्र के नाम से ज्ञात थे ।" ;
(ख) उपपैरा (3) में, प्रशासनिक क्षेत्र" शब्दों के पश्चात् (नागा पहाड़ी-त्युएन्संग क्षेत्र से भिन्न)" कोष्ठक और शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे ;
(ग) सारणी के भाग क में, मद 4 लुप्त की जाएगी ; और
(घ) सारणी के भाग ख में, मद 2 के स्थान पर निम्नलिखित मद प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
2. नागा पहाड़ी-त्युएन्संग क्षेत्र ।" ।
4. परिसीमन आदेश का संशोधन-संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन आदेश, 1956 में,-
(क) प्रथम अनुसूची में, क्रम संख्या 37 के सामने स्तम्भ 3 में, प्रविष्टि में, नागा पहाड़ी" शब्द लुप्त किए जाएंगे ; और
(ख) द्वितीय अनुसूची में, आसाम से संबंधित भाग में, नागा पहाड़ी जिला" शीर्ष और क्रम संख्या 16, 17 तथा 18 के सामने की सभी प्रविष्टियां लुप्त की जाएंगी ।
5. [लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 का संशोधन ।]-निरसन और संशोधन अधिनियम, 1960 (1960 का 50) की धारा 2 और अनुसूची 1 द्वारा निरसित ।
6. संसद् के आसीन सदस्य के बारे में उपबंध-आसाम में स्वशासी जिला संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र के विस्तार में धारा 4 द्वारा परिवर्तन होने पर भी, उस निर्वाचन-क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले लोक सभा के आसीन सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि वह इस प्रकार यथापरिवर्तित उस निर्वाचन-क्षेत्र द्वारा लोक सभा के लिए निर्वाचित किया गया है ।
7. विधियों का राज्यक्षेत्रीय विस्तार पर प्रभाव नहीं होना-धारा 2 के उपबंधों के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कि वे, ऐसे क्षेत्रों में, परिवर्तन नहीं करते, जिन पर इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पूर्व प्रवृत्त कोई विधि विस्तारित होती है या जिन्हें लागू होती है, और किसी ऐसी विधि में नागा पहाड़ी जिले, नागा जनजाति क्षेत्र या त्युएन्संग सीमान्त खंड के प्रति राज्यक्षेत्रीय निर्देशों का जब तक किसी सक्षम विधान-मंडल या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा अन्यथा उपबंधित न हो, तब तक वही अर्थ बना रहेगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा में विधि से भारत में या उसके किसी भाग में विधि का बल रखने वाली कोई विधि, अध्यादेश, विनियम, आदेश, उपविधि, नियम, स्कीम, अधिसूचना या अन्य लिखत अभिप्रेत है ।
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