ब्रह्मपुत्र बोर्ड अधिनियम, 1980
(1980 का अधिनियम संख्यांक 46)
[1 सितम्बर, 1980]
ब्रह्मपुत्र-घाटी में बाढ़ और तट-अपरदन के नियंत्रण के उपायों की योजना बनाने
और उनके एकीकृत क्रियान्वयन के लिए बोर्ड की स्थापना और
तत्सम्बन्धी विषयों का उपबन्ध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के इकतीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
अध्याय 1
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम ब्रह्मपुत्र बोर्ड अधिनियम, 1980 है ।
(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. संघ द्वारा नियंत्रण की समीचीनता की घोषणा-इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि लोक हित में यह समीचीन है कि केन्द्रीय सरकार को अन्तरराज्यिक ब्रह्मपुत्र नदी घाटी के विनियमन और विकास को, इसमें इसके पश्चात् उपबंधित विस्तार तक, अपने नियंत्रण में ले लेना चाहिए ।
3. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) बोर्ड" से धारा 4 के अधीन स्थापित ब्रह्मपुत्र बोर्ड अभिप्रेत है ;
(ख) ब्रह्मपुत्र-घाटी" से धारा 11 के अधीन सीमांकित अन्तरराज्यिक ब्रह्मपुत्र नदी घाटी अभिप्रेत है ;
(ग) निधि" से धारा 19 के अधीन स्थापित ब्रह्मपुत्र बोर्ड निधि अभिप्रेत है ;
(घ) मास्टर प्लान" से ब्रह्मपुत्र-घाटी में बाढ़ और तट-अपरदन के नियंत्रण तथा जल निकास के सुधार के लिए धारा 12 के अधीन तैयार किया गया मास्टर प्लान अभिप्रेत है और जहां इसे भागतः तैयार किया जाता है वहां इसका प्रत्येक भाग इसके अन्तर्गत है ;
(ङ) सदस्य" से बोर्ड का सदस्य अभिप्रेत है ;
(च) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
(छ) विनियम" से बोर्ड द्वारा इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियम अभिप्रेत हैं ;
(ज) नियम" से केन्द्रीय सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियम अभिप्रेत हैं ;
(झ) संघ राज्यक्षेत्र के सम्बन्ध में, राज्य सरकार" से संविधान के अनुच्छेद 239 के अधीन नियुक्त उसका प्रशासक अभिप्रेत है ।
अध्याय 2
बोर्ड की स्थापना
4. ब्रह्मपुत्र बोर्ड की स्थापना और निगमन-(1) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ब्रह्मपुत्र बोर्ड के नाम से एक बोर्ड उस तारीख से स्थापित किया जाएगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त नियत करे ।
(2) बोर्ड पूर्वोक्त नाम से शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला एक निगमित निकाय होगा जिसे इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए स्थावर और जंगम दोनों प्रकार की संपत्ति का अर्जन, धारण और व्ययन करने की और संविदा करने की शक्ति होगी और उक्त नाम से वह वाद लाएगा या उसके विरुद्ध वाद लाया जाएगा ।
(3) बोर्ड में निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात् :-
(क) एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे ;
(ख) बोर्ड का महाप्रबन्धक और बोर्ड का वित्तीय सलाहकार, पदेन ;
(ग) असम, मेघालय, नागालैण्ड, मणिपुर और त्रिपुरा की सरकारों और अरुणाचल प्रदेश तथा मिजोरम के प्रशासनों और पूर्वोत्तर परिषद् अधिनियम, 1971 (1971 का 84) की धारा 3 के अधीन गठित पूर्वोत्तर परिषद् का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रत्येक का एक-एक सदस्य, जिनकी नियुक्ति केन्द्रीय सरकार करेगी ;
(घ) केन्द्रीय सरकार के कृषि, सिंचाई, वित्त, विद्युत और परिवहन से सम्बद्ध मंत्रालयों का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रत्येक का एक-एक सदस्य, जिनकी नियुक्ति केन्द्रीय सरकार करेगी ;
(ङ) केन्द्रीय जल आयोग, केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण, भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण और भारतीय मौसम-विज्ञान का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रत्येक का एक-एक सदस्य, जिनकी नियुक्ति केन्द्रीय सरकार करेगी ।
(4) यदि कोई सदस्य अंगशैथिल्य के कारण या अन्यथा अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ है या ऐसी परिस्थितियों से, जिनमें उसका पद रिक्त नहीं होता, भिन्न परिस्थितियों में छुट्टी पर अनुपस्थित है, तो केन्द्रीय सरकार उसके स्थान पर कार्य करने के लिए किसी अन्य व्यक्ति को नियुक्त कर सकेगी ।
(5) यदि केन्द्रीय सरकार का कोई अधिकारी, जो बोर्ड का सदस्य नहीं है, उस सरकार द्वारा इस निमित्त प्रतिनियुक्त किया जाता है, तो उसे बोर्ड के अधिवेशनों में उपस्थित होने का और उसकी कार्यवाहियों में भाग लेने का अधिकार होगा किन्तु वह मत देने का हकदार नहीं होगा ।
(6) बोर्ड उस व्यक्ति को, जिसकी वह इस अधिनियम के किन्हीं उपबंधों का अनुपालन करने के लिए सहायता या सलाह लेना चाहे, ऐसी रीति से और ऐसे प्रयोजनों के लिए, जो विनियमों द्वारा अवधारित किए जाएं, अपने साथ सहयुक्त कर सकेगा और इस प्रकार सहयुक्त व्यक्ति को बोर्ड के ऐसे विचार-विमर्श में, जो उस प्रयोजन से संगत हो जिसके लिए वह सहयुक्त किया गया है, भाग लेने का अधिकार होगा किन्तु वह मत देने का हकदार नहीं होगा ।
(7) बोर्ड का कोई कार्य या कार्यवाही केवल इस कारण अविधिमान्य नहीं होगी कि,-
(क) बोर्ड में कोई रिक्ति या उसके गठन में कोई त्रुटि है, या
(ख) बोर्ड के सदस्य के रूप में कार्य करने वाले व्यक्ति की नियुक्ति में कोई त्रुटि है, या
(ग) बोर्ड की प्रक्रिया में कोई ऐसी अनियमितता है जो मामले के गुणागुण पर प्रभाव नहीं डालती है ।
(8) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, बोर्ड एक स्थायी समिति गठित कर सकेगा जिसमें बोर्ड का महाप्रबन्धक, बोर्ड का वित्तीय सलाहकार और बोर्ड के तीन अन्य सदस्य होंगे ।
(9) उपधारा (8) के अधीन गठित स्थायी समिति बोर्ड के ऐसे कृत्यों का पालन, शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों का निर्वहन करेगी, जो बोर्ड द्वारा उसे विहित या प्रत्यायोजित किए जाएं ।
5. सदस्यों की सेवा की शर्तें-बोर्ड के सदस्यों (पदेन सदस्यों से भिन्न) की पदावधि और सदस्यों की सेवा की अन्य शर्तें ऐसी होंगी जो विहित की जाएं ।
6. अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की शक्तियां-(1) अध्यक्ष बोर्ड के अधिवेशनों की अध्यक्षता करने के अतिरिक्त, बोर्ड की ऐसी शक्तियों का प्रयोग और उसके ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करेगा, जो बोर्ड द्वारा उसे प्रत्यायोजित किए जाएं और ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग और ऐसे अन्य कर्तव्यों का निर्वहन करेगा जो विहित किए जाएं ।
(2) बोर्ड का उपाध्यक्ष अध्यक्ष की ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करेगा जो विहित किए जाएं या जो अध्यक्ष द्वारा उसे प्रत्यायोजित किए जाएं ।
7. महाप्रबन्धक-(1) केन्द्रीय सरकार बोर्ड का महाप्रबन्धक नियुक्त करेगी ।
(2) महाप्रबन्धक की सेवा के निबन्धन और शर्तें ऐसी होंगी जो विहित की जाएं ।
(3) बोर्ड तथा बोर्ड के अध्यक्ष के साधारण अधीक्षण और नियंत्रण के अधीन रहते हुए महाप्रबन्धक बोर्ड का मुख्य कार्यपालक प्राधिकारी होगा ।
(4) महाप्रबन्धक अध्यक्ष की ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करेगा जो विहित किए जाएं या अध्यक्ष द्वारा उसे प्रत्यायोजित किए जाएं तथा ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग और ऐसे अन्य कर्तव्यों का निर्वहन करेगा जो नियमों द्वारा विहित या विनियमों द्वारा अवधारित किए जाएं ।
8. वित्तीय सलाहकार-(1) केन्द्रीय सरकार बोर्ड का वित्तीय सलाहकार नियुक्त करेगी ।
(2) वित्तीय सलाहकार की सेवा के निबन्धन और शर्तें ऐसी होंगी, जो विहित की जाएं ।
9. मुख्य इंजीनियर, सचिव और अन्य अधिकारी-केन्द्रीय सरकार-
(क) बोर्ड के महाप्रबन्धक की सहायता करने के लिए दो मुख्य इंजीनियर ; और
(ख) बोर्ड का सचिव,नियुक्त करेगी ।
(2) बोर्ड ऐसे अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को नियुक्त कर सकेगा जिन्हें वह इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्ष निर्वहन के लिए आवश्यक समझे ।
(3) बोर्ड के मुख्य इंजीनियरों, सचिव और अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारियों की सेवा के निबन्धन और शर्तें ऐसी होंगी, जो विनियमों द्वारा अवधारित की जाएं ।
10. सलाहकार समितियां-इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, बोर्ड अपने कृत्यों के दक्ष निर्वहन के लिए आवश्यकतानुसार सलाहकार समितियां समय-समय पर गठित कर सकेगा ।
अध्याय 3
बोर्ड के कृत्य और शक्तियां
11. ब्रह्मपुत्र-घाटी की सीमाएं-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात् यथासंभव शीघ्र, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ब्रह्मपुत्र-घाटी का सीमांकन इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए करेगी ।
(2) बोर्ड अपने ऐसे कृत्यों का पालन और अपनी ऐसी शक्तियों का प्रयोग ब्रह्मपुत्र-घाटी के ऐसे क्षेत्रों में करेगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, समय-समय पर विनिर्दिष्ट करे :
परन्तु केन्द्रीय सरकार इस उपधारा के अधीन किसी क्षेत्र के बारे में कोई अधिसूचना जारी करने के पूर्व उस राज्य सरकार से परामर्श करेगी जिस राज्य में ऐसा क्षेत्र स्थित है ।
12. ब्रह्मपुत्र-घाटी में बाढ़ आदि के नियंत्रण के लिए मास्टर प्लान-(1) इस अधिनियम और नियमों के अन्य उपबन्धों के अधीन रहते हुए बोर्ड ब्रह्मपुत्र-घाटी में सर्वेक्षण और अन्वेषण करेगा तथा ब्रह्मपुत्र-घाटी में बाढ़ और तट-अपरदन के नियंत्रण तथा जल निकास के सुधार के लिए मास्टर प्लान तैयार करेगा :
परन्तु बोर्ड ब्रह्मपुत्र-घाटी के विभिन्न क्षेत्रों के बारे में या ऐसे क्षेत्रों की बाबत विभिन्न विषयों के बारे में मास्टर-प्लान भागों में तैयार कर सकेगा और जब कभी वह ऐसा करना आवश्यक समझे तो वह मास्टर प्लान या उसके किसी भाग का पुनरीक्षण कर सकेगा ।
(2) मास्टर प्लान तैयार करने में बोर्ड सिंचाई, जलविद्युत्, नौपरिवहन या अन्य लाभप्रद प्रयोजनों के लिए ब्रह्मपुत्र-घाटी के जल स्रोतों के विकास और उपयोग को ध्यान में रखेगा और जहां तक संभव हो ऐसे प्लान में उन संकर्मों तथा अन्य उपायों को उपदर्शित करेगा जो ऐसे विकास के लिए हाथ में लिए जा सकेंगे ।
(3) मास्टर प्लान, यथास्थिति, तैयार किए जाने या पुनरीक्षित किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र केन्द्रीय सरकार को प्रस्तुत किया जाएगा और केन्द्रीय सरकार सम्बद्ध राज्य सरकारों से परामर्श करके उसका अनुमोदन ऐसे परिवर्तनों के साथ करेगी जो वह ठीक समझे ।
13. बोर्ड के अन्य कृत्य-(1) बोर्ड-
(क) केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित मास्टर प्लान में प्रस्तावित बांधों और अन्य परियोजनाओं के बारे में विस्तृत रिपोर्टें और प्राक्कलन तैयार करेगा और प्रत्येक मामले में विभिन्न प्रयोजनों या उपयोग के लिए लागत उपदर्शित करेगा ;
(ख) ऐसे बांधों और अन्य परियोजनाओं के सन्निर्माण, संचालन और अनुरक्षण के लिए मानकों और विनिर्देशों को तैयार करेगा ;
(ग) केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित मास्टर प्लान में प्रस्तावित बहु-उद्देशीय बांधों और उनसे सम्बद्ध संकर्मों का सन्निर्माण केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से करेगा और ऐसे बांधों तथा संकर्मों का अनुरक्षण और संचालन करेगा ;
(घ) केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित मास्टर प्लान में प्रस्तावित सभी बांधों और अन्य परियोजनाओं का, जो खण्ड (ग) में निर्दिष्ट से भिन्न हैं, राज्य सरकारों द्वारा सन्निर्माण किए जाने के लिए सम्बद्ध राज्य सरकारों से परामर्श कर के योजनाबद्ध कार्यक्रम तैयार करेगा ;
(ङ) ऐसे किसी अन्य कृत्य का पालन करेगा जो इस अधिनियम के समुचित कार्यान्वयन के लिए विहित किया जाए ;
(च) ऐसे अन्य कृत्यों का पालन करेगा जो धारा 12 में या इस उपधारा के खण्ड (क) से (घ) तक में विनिर्दिष्ट हैं या इस उपधारा के खण्ड (ङ) के अधीन विहित कृत्यों के अनुपूरक, आनुषंगिक या पारिणामिक हैं ।
(2) उपधारा (1) के खण्ड (घ) में किसी बात के होते हुए भी, यदि बोर्ड का उस खण्ड में निर्दिष्ट किसी बांध या परियोजना के सन्निर्माण की लागत और उसके लिए अपेक्षित विशेष ज्ञान को ध्यान में रखते हुए यह समाधान हो जाता है कि उसका सन्निर्माण करना समीचीन है तो वह केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन से ऐसे बांध या परियोजना का सन्निर्माण कर सकेगा ।
(3) बोर्ड उपधारा (2) में निर्दिष्ट किसी बांध या परियोजना का अनुरक्षण और संचालन तब तक कर सकेगा जब तक वह ऐसा करना आवश्यक समझे ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए बहु-उद्देशीय बांध" से ऐसा बांध अभिप्रेत है जो बाढ़ नियंत्रण तथा अन्य प्रयोजनों के लिए सन्निर्मित किया गया है ।
14. वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए बार्ड अपने कृत्यों का पालन कर सकेगा-धारा 12 और 13 में विनिर्दिष्ट या उनके अधीन विहित कृत्यों का बोर्ड द्वारा पालन किया जाना निम्नलिखित शर्तों के अधीन होगा, अर्थात् :-
(क) बोर्ड धारा 13 की उपधारा (1) के खण्ड (ग) में निर्दिष्ट किसी बहु-उद्देशीय बांध का सन्निर्माण तब तक नहीं करेगा जब तक कि सम्बद्ध राज्य सरकारें उस प्रयोजन के लिए अपेक्षित भूमि उपलब्ध न करा दें ;
(ख) बोर्ड धारा 13 की उपधारा (1) के खण्ड (घ) में निर्दिष्ट किसी बांध या परियोजना का सन्निर्माण तब तक नहीं करेगा जब तक कि सम्बद्ध राज्य सरकारें उसके निष्पादन के लिए भूमि मुफ्त उपलब्ध न करा दें और उसके पूरा हो जाने के पश्चात् ऐसी अवधि के अवसान से ही, जो बोर्ड द्वारा निर्दिष्ट की जाए, उसके अनुरक्षण का भार अपने हाथ में न ले लें ;
(ग) बोर्ड किसी बांध या अन्य संकर्म को अपने हाथ में तब तक नहीं लेगा जब तक कि सम्बद्ध राज्य सरकारें ऐसी सब सहायता प्रदान करने के लिए सहमत न हो जाएं जो उसके सन्निर्माण, संचालन और अनुरक्षण के लिए अपेक्षित हों ;
(घ) ऐसी अन्य शर्तें (जिनके अन्तर्गत बोर्ड द्वारा सन्निर्मित बांध या अन्य संकर्मों की लागत में सम्बद्ध राज्य सरकारों द्वारा पूर्णतः या भागतः हिस्सा देने से संबंधित शर्तें भी हैं) जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में प्रकाशित साधारण या विशेष आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे :
परन्तु बोर्ड ऐसे किसी बांध या संकर्म के सन्निर्माण को अपने हाथ में लेने के पूर्व सम्बद्ध राज्य सरकारों को ऐसे बांध या अन्य संकर्म के सन्निर्माण की लागत और उनसे होने वाले फायदों और उस अनुपात के बारे में अवगत कराएगा जिस अनुपात में राज्य सरकारें लागत में हिस्सा देंगी और फायदों में हिस्सा पाएंगी :
परन्तु यह और कि यदि बोर्ड और राज्य सरकारें ऐसे किसी बांध या अन्य संकर्म की लागत में हिस्सा देने और फायदों में हिस्सा पाने के बारे में सहमत होने में असमर्थ हैं तो बोर्ड यह विषय केन्द्रीय सरकार को विनिश्चय के लिए निर्देशित करेगा और केन्द्रीय सरकार राज्य सरकारों से परामर्श करके ऐसे विषय का विनिश्चय करेगी और केन्द्रीय सरकार का विनिश्चय अंतिम होगा ।
15. बोर्ड की साधारण शक्तियां-(1) इस अधिनियम और नियमों के उपबंधों के अधीन रहते हुए, बोर्ड को ऐसी सभी बातें करने की शक्ति होगी जो इस अधिनियम के अधीन उसके कृत्यों के पालन के प्रयोजन के लिए आवश्यक या समीचीन हों ।
(2) उपधारा (1) के उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड-
(क) ब्रह्मपुत्र-घाटी में बाढ़ नियंत्रण, तट-अपरदन और जल निकास के विभिन्न पहलुओं से संबंधित आंकड़े या अन्य जानकारी प्रकाशित कर सकेगा ;
(ख) सम्बद्ध राज्य सरकारों से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वे उसे उन उपायों के संबंध में जानकारी दें जो उन्होंने ब्रह्मपुत्र-घाटी में बाढ़ और तट-अपरदन के नियंत्रण तथा जल निकास के सुधार के लिए किए हैं, और स्थलाकृतिक, मौसम-विज्ञान और जल-विज्ञान सम्बन्धी तथा अन्य सम्बन्धित आंकड़े और ऐसी अन्य जानकारी दें, जिनकी बोर्ड इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के पालन के लिए अपेक्षा करे ।
16. बोर्ड द्वारा तैयार की गई योजनाओं आदि का भेजा जाना और उनके बारे में परामर्श-(1) बोर्ड अपने द्वारा तैयार किए गए मास्टर प्लान, रिपोर्टें, प्राक्कलन, मानक और विनिर्देश केन्द्रीय सरकार और सम्बद्ध राज्य सरकारों को भेजेगा ।
(2) केन्द्रीय सरकार और सम्बद्ध राज्य सरकारें ऐसी योजना, रिपोर्टों, प्राक्कलनों या मानकों और विनिर्देशों से संबंधित या उद्भूत किसी विषय के बारे में बोर्ड से परामर्श कर सकेंगी ।
(3) यदि कोई राज्य सरकार किसी कारणवश यह समझती है कि ब्रह्मपुत्र-घाटी में बाढ़ और तट-अपरदन के नियंत्रण तथा जल निकास संकर्म के लिए किसी परियोजना का निष्पादन करना आवश्यक है और ऐसी परियोजना मास्टर प्लान में परिकल्पित नहीं है या ऐसी परियोजना राज्य सरकार द्वारा ऐसी रीति से निष्पादित की जाने के लिए आशयित है जो मास्टर प्लान के अनुरूप नहीं है तो राज्य सरकार ऐसी परियोजना के निष्पादन के बारे में बोर्ड से परामर्श कर सकेगी और बोर्ड ऐसी सिफारिशें कर सकेगा जो वह ठीक समझे :
परन्तु इस उपधारा की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि इसमें किसी राज्य सरकार से यह अपेक्षित है कि वह बोर्ड से किसी ऐसे संकर्म के निष्पादन के बारे में परामर्श करे जो किसी आपात या अन्य असाधारण परिस्थितियों के कारण अत्यावश्यक हो गया है ।
अध्याय 4
केन्द्रीय सरकार द्वारा नियंत्रण
17. केन्द्रीय सरकार द्वारा निदेश और अनुदेश-(1) केन्द्रीय सरकार बोर्ड को ऐसे निदेश और अनुदेश, समय-समय पर, जारी कर सकेगी जो वह इस अधिनियम के दक्ष प्रशासन के लिए आवश्यक समझे और बोर्ड ऐसे निदेशों और अनुदेशों का पालन करेगा ।
(2) विशिष्टतया और उपधारा (1) के उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, केन्द्रीय सरकार धारा 13 की उपधारा (1) के खंड (घ) में निर्दिष्ट किसी बांध या परियोजना के किसी राज्य सरकार द्वारा निष्पादन के लिए उधारों या अनुदानों के रूप में कोई वित्तीय सहायता (चाहे सीधे या बोर्ड की मार्फत और संसद् द्वारा विधि द्वारा उस निमित्त किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात्) प्रदान करते समय राज्य सरकार का इस निमित्त अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात्, बोर्ड को ऐसी सभी शक्तियों का प्रयोग करने का निदेश दे सकेगी जो उसका यह समाधान करने के लिए आवश्यक हों कि बोर्ड द्वारा संकर्मों के लिए अधिकथित मानकों और विनिर्देशों के अनुसार संकर्म निष्पादित किए जा रहे हैं ।
अध्याय 5
वित्त, लेखा और लेखापरीक्षा
18. केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुदान और उधार-केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा विधि द्वारा इस निमित्त किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात्, बोर्ड को ऐसी धनराशियों का संदाय कर सकेगी जो केन्द्रीय सरकार आवश्यक समझे ।
19. ब्रह्मपुत्र बोर्ड निधि की स्थापना-(1) ब्रह्मपुत्र बोर्ड निधि के नाम से एक निधि स्थापित की जाएगी और उसमें केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा बोर्ड को संदत्त राशियां और बोर्ड द्वारा प्राप्त अन्य सभी राशियां जमा की जाएंगी ।
(2) निधि का उपयोग निम्नलिखित के लिए किया जाएगा, अर्थात् :-
(क) बोर्ड के सदस्यों, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और अन्य पारिश्रमिक और बोर्ड के अन्य प्रशासनिक व्यय की पूर्ति ;
(ख) बोर्ड द्वारा अपने हाथ में लिए गए सर्वेक्षण और अन्वेषणों के व्यय की पूर्ति ;
(ग) बोर्ड द्वारा अपने हाथ में ली गई परियोजनाओं के सन्निर्माण, संचालन और अनुरक्षण की लागत की पूर्ति ;(घ) इस अधिनियम के अधीन बोर्ड के कृत्यों के निर्वहन में बोर्ड के अन्य व्यय की पूर्ति ; और
(ङ) यदि बोर्ड द्वारा धारा 17 की उपधारा (2) के अधीन कोई राशि प्राप्त की जाती है तो सम्बद्ध राज्य सरकार को ऐसी राशि का संदाय ।
20. बजट-बोर्ड ऐसे प्ररूप में और प्रत्येक वर्ष ऐसे समय पर, जो विहित किया जाए, आगामी वित्तीय वर्ष के लिए अपना बजट तैयार करेगा, जिसमें प्राक्कलित व्यय और व्यय की वह रकम, जिसे देने के लिए किसी राज्य सरकार ने वचन दिया है, दर्शित होगी और उसे केन्द्रीय सरकार को भेजेगा ।
21. वार्षिक रिपोर्ट-बोर्ड ऐसे प्ररूप में और प्रत्येक वर्ष ऐसे समय पर, जो विहित किया जाए, अपनी वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसमें पूर्ववर्ती वर्ष के दौरान उसके क्रियाकलापों का पूरा विवरण दिया जाएगा और उसकी प्रतियां केन्द्रीय सरकार को भेजेगा और वह सरकार उसे संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।
22. लेखा और लेखापरीक्षा-बोर्ड के लेखे ऐसी रीति से रखे जाएंगे और उनकी ऐसी रीति से परीक्षा की जाएगी, जो भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के परामर्श से विहित की जाए ।
अध्याय 6
प्रकीर्ण
23. बोर्ड और राज्य सरकारों के बीच विवाद-(1) यदि इस अधिनियम के अन्तर्गत आने वाले या इससे सम्बद्ध या उद्भूत किसी विषय के बारे में कोई विवाद बोर्ड और किसी राज्य सरकार के बीच उठता है तो वह केन्द्रीय सरकार को निर्दिष्ट किया जाएगा ।
(2) केन्द्रीय सरकार विवाद को ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, वार्ता या सुलह द्वारा तय करने का प्रयास करेगी ।
(3) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, यदि केन्द्रीय सरकार वार्ता या सुलह द्वारा विवाद तय करने के लिए कार्रवाई प्रारम्भ करने के पूर्व या ऐसी कार्रवाई प्रारम्भ करने के पश्चात् किसी भी प्रक्रम में यह आवश्यक समझती है कि विवाद ऐसी प्रकृति का है कि उसे माध्यस्थम् के लिए निर्दिष्ट करना आवश्यक या समीचीन है तो केन्द्रीय सरकार ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, विवादग्रस्त विषय मध्यस्थ को, जो भारत के मुख्य न्यायमूर्ति द्वारा नियुक्त किया जाएगा, निर्दिष्ट करेगी ।
(4) मध्यस्थ अपने समक्ष कार्यवाहियों में अपनी सहायता के लिए असेसरों के रूप में दो या अधिक व्यक्तियों को नियुक्त कर सकेगा ।
(5) मध्यस्थ का विनिश्चय अन्तिम और विवाद के पक्षकारों पर आबद्धकर होगा और उनके द्वारा क्रियान्वित किया जाएगा ।
(6) माध्यस्थम् अधिनियम, 1940 (1940 का 10) की कोई बात इस धारा के अधीन किसी माध्यस्थम् को लागू नहीं होगी ।
24. सदस्यों का हटाया जाना आदि-(1) यदि केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि-
(क) कोई सदस्य कार्य करने से इंकार करता है ;
(ख) कोई सदस्य कार्य करने में असमर्थ हो गया है ;
(ग) किसी सदस्य ने सदस्य के रूप में अपने पद का ऐसा दुरुपयोग किया है कि उसका बोर्ड का सदस्य बने रहना लोकहित के लिए हानिकर हो गया है ; या
(घ) कोई सदस्य ऐसे सदस्य के रूप में बने रहने के लिए अन्यथा अयोग्य है,
तो वह ऐसे सदस्य को बोर्ड से हटा सकेगी ।
(2) केन्द्रीय सरकार किसी सदस्य को उसके विरुद्ध जांच लंबित रहने तक निलंबित कर सकेगी ।
(3) इस धारा के अधीन हटाए जाने का कोई आदेश तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि सम्बद्ध सदस्य को अपना स्पष्टीकरण केन्द्रीय सरकार को प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान न कर दिया गया हो और ऐसा आदेश पारित कर दिए जाने पर हटाए गए सदस्य का स्थान रिक्त घोषित किया जाएगा ।
(4) कोई सदस्य, जो इस धारा के अधीन हटा दिया गया है, बोर्ड के सदस्य के रूप में या बोर्ड के अधीन किसी हैसियत में पुनर्नियुक्त किए जाने का पात्र नहीं होगा ।
(5) यदि बोर्ड इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों या केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किए गए निदेशों का पालन करने में असफल रहता है तो केन्द्रीय सरकार को बोर्ड का पुनर्गठन करने की शक्ति होगी ।
25. प्रवेश करने की शक्ति-इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए बोर्ड का कोई अधिकारी, जो बोर्ड द्वारा इस निमित्त साधारणतया या विशिष्टतया प्राधिकृत किया गया है, किसी भूमि या परिसर में किसी भी उचित समय पर प्रवेश कर सकेगा और वहां ऐसी बातें कर सकेगा जो बोर्ड का कोई संकर्म या ऐसा कोई सर्वेक्षण, परीक्षण या अन्वेषण, जो इस अधिनियम के अधीन बोर्ड द्वारा शक्तियों के प्रयोग या कृत्यों के पालन में प्रारम्भिक या आनुषंगिक है, विधिपूर्वक करने के प्रयोजन के लिए उचित रूप से आवश्यक हो :
परन्तु ऐसा कोई अधिकारी किसी भवन में या निवासगृह से संलग्न किसी घिरे हुए आंगन या बगीचे में तब तक प्रवेश नहीं करेगा जब तक कि उसके अधिभोगी को अनुमति न मिली हो और उसने अपने ऐसे प्रवेश करने की लिखित सूचना ऐसे अधिभोगी को कम से कम सात दिन पूर्व न दे दी हो ।
26. बोर्ड के सदस्यों, अधिकारियों और कर्मचारियों का लोक सेवक होना-इस अधिनियम के किसी उपबन्ध के अनुसरण में कार्य करते हुए या कार्य करने का तात्पर्य रखने वाले बोर्ड के सभी सदस्य, अधिकारी और कर्मचारी भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक होंगे ।
27. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-(1) कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही किसी ऐसी बात के बारे में, जो इस अधिनियम या नियमों या विनियमों के अधीन सद्भावपूर्वक की गई हो या की जाने के लिए आशयित हो, सरकार के विरुद्ध या सरकार के किसी अधिकारी या बोर्ड के किसी सदस्य, अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध न होगी ।
(2) कोई भी वाद या अन्य विधिक कार्यवाही किसी ऐसे नुकसान के बारे में, जो इस अधिनियम या नियमों या विनियमों के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए तात्पर्यित किसी बात से कारित हो या जिसका ऐसे कारित होना सम्भाव्य हो, बोर्ड के विरुद्ध न होगी और विशिष्टतया, बाढ़ के कारण या संकर्मों के भग्न होने और उनके खराब होने के कारण आवश्यक राहत उपायों की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी बोर्ड की नहीं होगी ।
28. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को क्रियान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या उनमें से किसी विषय के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात् :-
(क) वे विषय, जो धारा 4 की उपधारा (8) और (9) में निर्दिष्ट बोर्ड की स्थायी समिति से सम्बन्धित हैं ;
(ख) धारा 5 के अधीन बोर्ड के सदस्यों (पदेन सदस्यों से भिन्न) की पदावधि और सदस्यों की सेवा की अन्य शर्तें ;
(ग) धारा 6 के अधीन अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की शक्तियां और कर्तव्य ;
(घ) धारा 7 के अधीन महाप्रबन्धक की सेवा के निबन्धन और शर्तें तथा उसकी शक्तियां और कर्तव्य ;
(ङ) धारा 8 के अधीन वित्तीय सलाहकार की सेवा के निबन्धन और शर्तें ;
(च) धारा 12 की उपधारा (1) के अधीन सर्वेक्षण और अन्वेषण करने तथा मास्टर प्लान तैयार करने के बारे में शर्तें और निर्बन्धन तथा उनसे सम्बन्धित अन्य विषय ;
(छ) धारा 13 की उपधारा (1) के खण्ड (ङ) के अधीन बोर्ड के अतिरिक्त कृत्य ;
(ज) धारा 15 की उपधारा (1) के अधीन बोर्ड की साधारण शक्तियों के बारे में शर्तें और निर्बन्धन तथा उनसे सम्बन्धित अन्य विषय ;
(झ) वह प्ररूप जिसमें और वह समय जब बोर्ड धारा 20 के अधीन अपना बजट और धारा 21 के अधीन अपनी वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा तथा वह रीति जिससे बोर्ड के लेखे धारा 22 के अधीन रखे जाएंगे और उनकी परीक्षा की जाएगी ;
(ञ) वह रीति जिससे केन्द्रीय सरकार धारा 23 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट विवादों को उक्त उपधारा के अधीन तय करने का प्रयास करेगी तथा वह प्ररूप जिसमें और वह रीति जिससे ऐसे विवादों को माध्यस्थम् के लिए उक्त धारा की उपधारा (3) के अधीन निर्दिष्ट किया जा सकेगा ;
(ट) धारा 25 के अधीन प्रवेश करने की शक्ति के प्रयोग के बारे में शर्तें और निर्बन्धन तथा उससे सम्बन्धित अन्य विषय ;
(ठ) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या किया जाए या जिसके बारे में नियमों द्वारा उपबन्ध किया जाना है या किया जाए ।
29. विनियम बनाने की शक्ति-(1) बोर्ड, इस अधिनियम के प्रयोजनों को साधारणतया क्रियान्वित करने के लिए इस अधिनियम और नियमों से सुसंगत विनियम, केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगा ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित विषयों में से सभी या उनमें से किसी के लिए, उपबंध कर सकेंगे, अर्थात् :-
(क) वह रीति जिससे और वे प्रयोजन जिनके लिए बोर्ड किसी व्यक्ति को अपने साथ धारा 4 की उपधारा (6) के अधीन सहयुक्त कर सकेगा ;
(ख) बोर्ड के महाप्रबन्धक की वे शक्तियां और कर्तव्य जो धारा 7 की उपधारा (4) के अधीन अवधारित किए जाएं ;
(ग) धारा 9 की उपधारा (3) के अधीन बोर्ड के मुख्य इंजीनियरों, सचिव और अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारियों की सेवा के निबन्धन और शर्तें ;
(घ) कोई अन्य विषय, जिसके बारे में विनियमों द्वारा उपबन्ध किया जाना है या किया जाए ।
30. नियमों और विनियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और प्रत्येक विनियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किन्तु नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
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