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अफ्रीकी विकास निधि अधिनियम, 1982 ( African Development Fund Act, 1982 )


 

अफ्रीकी विकास निधि अधिनियम, 1982

(1982 का अधिनियम संख्यांक 1)

[4 मार्च, 1982]

अफ्रीकी विकास निधि करार को कार्यान्वित करने

और उससे सम्बन्धित विषयों के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के तैंतीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम अफ्रीकी विकास निधि अधिनियम, 1982 है

(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।

(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

                (क) करार" से अफ्रीकी विकास निधि करार अभिप्रेत है ;

                (ख) निधि" से करार के अधीन स्थापित अफ्रीकी विकास निधि अभिप्रेत है ।

3. निधि को संदाय-(1) भारत की संचित निधि में से ऐसी सब धनराशियां, जो निम्नलिखित के संदाय के प्रयोजन के लिए समय-समय पर अपेक्षित हों, संसद् द्वारा विधि द्वारा इस निमित्त सम्यक् विनियोग किए जाने के पश्चात् संदत्त की जाएंगी,-

                (क) करार के अनुच्छेद 6, 7, 8 और 9 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा निधि को संदेय अभिदाय ;

                (ख) करार के अनुच्छेद 13 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा निधि को संदेय कोई धनराशि ; और

(ग) करार के अनुच्छेद 16 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा निधि को संदेय कोई प्रभार ।

                (2) यदि केन्द्रीय सरकार, ऐसा करना ठीक समझे, तो वह ऐसे प्ररूप में, जिसे वह ठीक समझे, ऐसा कोई ब्याज रहित और अपरक्राम्य नोट या अन्य बाध्यताएं, जिनके लिए करार के अनुच्छेद 9 में उपबंध किया गया है, सृष्ट कर सकेगी और निधि को पुरोधृत कर सकेगी ।

4. रिजर्व बैंक का निधि के लिए निक्षेपागार होना-भारतीय रिजर्व बैंक निधि की भारतीय करेन्सी धृतियों का निक्षेपागार होगा ।

5. निधि को प्रास्थिति और कतिपय उन्मुक्तियों, छूटों और विशेषाधिकारों का प्रदान किया जाना और उसके अधिकारियों और कर्मचारियों को कतिपय उन्मुक्तियों, छूटों और विशेषाधिकारों का प्रदान किया जाना-(1) किसी अन्य विधि में तत्प्रतिकूल बात के होते हुए भी, करार के उन उपबन्धों को, जो अनुसूची में दिए गए हैं, भारत में विधि का बल प्राप्त होगा :

परन्तु करार के अनुच्छेद 49 की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह-

                (क) सीमाशुल्क से मुक्त माल का भारत में आयात करने का हक, निधि को वहां उसके पश्चात्वर्ती विक्रय पर किसी निर्बन्धन के बिना, देती है ; या

(ख) निधि को उन शुल्कों या करों से कोई छूट प्रदान करती है, जो बेचे गए माल की कीमत के भाग हैं ; या

(ग) निधि को उन शुल्कों या करों से कोई छूट प्रदान करती है जो की गई सेवाओं के प्रभारों के सिवाय वास्तव में कुछ नहीं हैं ।

(2) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अनुसूची का संशोधन किन्हीं ऐसे संशोधनों के अनुरूप कर सकेगी जो करार के उन उपबंधों में, जो अनुसूची में उपवर्णित हैं, सम्यक् रूप से किए और अंगीकृत किए गए हैं ।

6. नियम बनाने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगी ।

7. धारा 5 के अधीन जारी की गई अधिसूचनाओं और धारा 6 के अधीन बनाए गए नियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना-धारा 5 की उपधारा (2) के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना और धारा 6 के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, जारी किए जाने या बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखी जाएगी या रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन, यथास्थिति, उस अधिसूचना या नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात्, यथास्थिति, वह अधिसूचना या वह नियम ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगी या   होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि, यथास्थिति, वह अधिसूचना जारी नहीं की जानी चाहिए या वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगी या हो जाएगा । किन्तु, यथास्थिति, अधिसूचना या नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

अनुसूची

(धारा 5 देखिए)

करार के वे उपबंध जो विधि का बल रखेंगे

अध्याय 8

प्रास्थिति, उन्मुक्तियां, छूटें और विशेषाधिकार

अनुच्छेद 41

अध्याय का प्रयोजन

                निधि को अपने प्रयोजन की पूर्ति और उसे सौंपे गए कृत्यों का कार्यान्वयन प्रभावी तौर पर करने में समर्थ बनाने के लिए, प्रत्येक भाग लेने वाले राज्य के राज्यक्षेत्र में निधि को, इस अध्याय में उपवर्णित प्रास्थिति, उन्मुक्तियां, छूटें और विशेषाधिकार दिए जाएंगे और प्रत्येक भाग लेने वाला राज्य निधि को ऐसे प्रयोजन के लिए उसके द्वारा की गई विनिर्दिष्ट कार्रवाई की जानकारी देगा ।

अनुच्छेद 42

प्रास्थिति

                निधि को पूर्ण न्यायिक व्यक्तित्व और विशिष्टतया :-

                                (i) संविदा करने,

                                (ii) स्थावर तथा जंगम संपत्ति अर्जित करने और उसका व्ययन करने ; और

                                (iii) विधिक कार्यवाहियां संस्थित करने,की पूर्ण सामर्थ्य प्राप्त होगी ।

अनुच्छेद 43

विधिक आदेशिका

                1. निधि हर रूप की विधिक आदेशिका से उन्मुक्ति का उपभोग उन दशाओं में के सिवाय करेगी जो अनुच्छेद 8 के अनुसार उधार प्राप्त करने की उसकी शक्ति का प्रयोग करने से, या उसके संबंध में, उद्भूत हो और इन दशाओं में सक्षम अधिकारिता वाले न्यायालय में निधि के विरुद्ध कार्रवाई उस देश के राज्यक्षेत्र में की जा सकती है जिसमें निधि का कार्यालय है या जिसमें निधि ने आदेशिका की तामील या आदेशिका की सूचना को स्वीकार करने के प्रयोजन के लिए कोई अभिकर्ता नियुक्त किया है या वाद लाए जाने के लिए अन्यथा करार किया है ।

2. पैरा 1 के उपबंधों के होते हुए भी, निधि के विरुद्ध कोई भी अनुयोग किसी भाग लेने वाले के द्वारा या भाग लेने वाले के किसी अभिकरण या माध्यम द्वारा या किसी ऐसी सत्ता या व्यक्ति द्वारा जो किसी भाग लेने वाले की या किसी भाग लेने वाले के अभिकरण या माध्यम की ओर से प्रत्यक्षतः या परतः कार्य कर रहा हो या उससे दावे व्युत्पन्न करता हो, नहीं की जाएगी । निधि और उसके भाग लेने वालों के बीच विवादों के निपटारे के लिए भाग लेने वाले ऐसी विशेष प्रक्रियाओं का आश्रय लेंगे जो इस करार में, निधि की उपविधियों और विनियमों में या निधि के साथ की गई संविदाओं में विहित हों ।

3. निधि उन मामलों में विवादों के निपटारे की समुचित रीतियों के लिए भी उपबंध करेगी, जो पैरा 2 के और अनुच्छेद 52 और 53 के उपबंधों के अन्तर्गत नहीं आते हैं और जो इस अनुच्छेद के पैरा 1 के आधार पर, निधि को दी गई उन्मुक्ति के अधीन हैं ।

4. जहां इस करार के किन्हीं उपबंधों के आधार पर निधि को विधिक आदेशिका से उन्मुक्ति प्राप्त नहीं है, वहां भी निधि और उसकी सम्पत्ति और आस्तियां, वे चाहे जहां भी स्थित हों, और चाहे किसी के भी द्वारा धारित हों, निधि के विरुद्ध अंतिम निर्णय के परिदान के पूर्व सभी प्रकार के अभिग्रहण, कुर्की या निष्पादन से उन्मुक्त रहेंगी ।

अनुच्छेद 44

आस्तियों की उन्मुक्ति

निधि की संपत्ति और आस्तियां, वे चाहे जहां भी स्थित हों, और चाहे किसी के भी द्वारा धारित हों, कार्यपालक या विधायी अनुयोग द्वारा की जाने वाली तलाशी, अधिग्रहण, अधिहरण, स्वत्वहरण या किसी भी अन्य रूप के ग्रहण या पुरोबन्ध से उन्मुक्त रहेंगी ।

अनुच्छेद 45

अभिलेखागारों की उन्मुक्ति

निधि के अभिलेखागार और साधारणतया वे सभी दस्तावेजें जो उसकी हैं या उसके द्वारा धारित हैं, वे चाहे जहां स्थित हों, अनतिक्रमणीय होंगी ।

अनुच्छेद 46

आस्तियों की निर्बन्धनों से मुक्ति

इस करार के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, निधि की सब संपत्ति और अन्य आस्तियां किसी भी प्रकार के वित्तीय नियंत्रणों, विनियमनों या अधिस्थगनों से वहां तक मुक्त रहेंगी जहां तक निधि के प्रयोजन और कृत्यों को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक हो ।

अनुच्छेद 47

संसूचनाओं के लिए विशेषाधिकार

                प्रत्येक भाग लेने वाला राज्य, निधि की शासकीय संसूचनाओं के प्रति वैसा ही व्यवहार करेगा जो वह उन अन्य अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं की, जिनका वह सदस्य है, शासकीय संसूचनाओं के प्रति करता है ।

अनुच्छेद 48

पदधारियों और कार्मिकों की उन्मुक्तियां और विशेषाधिकार

                सभी गवर्नर और निदेशक और उनके अनुकल्प, प्रधान और कार्मिक, जिनके अन्तर्गत निधि के लिए कार्य विशेष का पालन करने वाले विशेषज्ञ भी हैं,-

(i) अपने द्वारा पदीय हैसियत से किए गए कार्यों के बारे में विधिक आदेशिका से उन्मुक्ति प्राप्त होंगे ;

                (ii) जहां वे स्थानीय राष्ट्रिक नहीं हैं, वहां उनके आप्रवासन संबंधी निर्बन्धनों, अन्यदेशियों के रजिस्ट्रीकरण की अपेक्षाओं और राष्ट्रीय सेवा की बाध्यताओं से उससे कम अनुकूल उन्मुक्तियां नहीं दी जाएंगी और मुद्रा विनियमों के बारे में उससे कम अनुकूल सुविधाएं नहीं दी जाएंगी जो भाग लेने वाले संयुक्त राज्य द्वारा किसी अन्य ऐसी अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था के, जिसका वह सदस्य है, तुल्य पंक्ति के प्रतिनिधियों, पदधारियों और कर्मचारियों को दी जाती हैं ; और

(iii) यात्रा सुविधाओं के बारे में उससे कम अनुकूल व्यवहार नहीं किया जाएगा जो भाग लेने वाले संपृक्त राज्य द्वारा किसी अन्य ऐसी अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था के, जिसका वह सदस्य है तुल्य पंक्ति वाले प्रतिनिधियों, पदधारियों और कर्मचारियों के साथ किया जाता है ।

अनुच्छेद 49

कराधान से छूट

                1. निधि, उसकी आस्तियों, सम्पत्ति, आय, संक्रियाओं और संव्यवहारों को अपने शासकीय उपयोग के लिए आयात या निर्यात किए गए माल पर सब प्रत्यक्ष करों से और सभी सीमाशुल्कों से या ऐसे करों से जिनका समतुल्य प्रभाव हो, छूट प्राप्त होगी । निधि को किसी भी कर या शुल्क के संदाय, विधारण या संग्रहण की किसी बाध्यता से भी छूट प्राप्त होगी ।

2. पैरा 1 के उपबंधों के होते हुए भी, निधि ऐसे करों से छूट का दावा नहीं करेगी जो की गई सेवाओं के लिए प्रभार से अधिक कुछ नहीं हैं ।

3. पैरा 1 द्वारा जो छूट दी गई है उसके अधीन आयात की गई वस्तुओं को भाग लेने वाले उस राज्य के, जिसने छूट प्रदान की थी, राज्यक्षेत्र में उन शर्तों के अधीन के सिवाय, जो भाग लेने वाले उस राज्य के साथ करार पाई जाएं, नहीं बेचा जाएगा ।

4. निधि द्वारा प्रधान और कार्मिकों को, जिनके अन्तर्गत उसके लिए कार्य विशेष का पालन करने वाले विशेषज्ञ भी हैं, संदत्त वेतनों और उपलब्धियों पर या उनके बारे में कोई कर उद्गृहीत नहीं किया जाएगा ।

अनुच्छेद 50

निधि द्वारा अधित्यजन

1. इस अध्याय में दी गई उन्मुक्तियां, छूटें और विशेषाधिकार निधि के हित में दिए गए हैं । निदेशक बोर्ड ऐसी सीमा तक और ऐसी शर्तों पर, जो वह अवधारित करे, इस अध्याय में दी गई उन्मुक्तियों, छूटों और विशेषाधिकारों का, उन मामलों में जिनमें उसकी कार्रवाई उसकी राय में निधि के हितों को अग्रसर करेगी, अधित्यजन कर सकेगा ।

2. पैरा 1 के उपबंधों के होने पर भी, सभापति को किसी भी कार्मिक की जिसके अन्तर्गत निधि के लिए कार्य विशेष का पालन करने वाले विशेषज्ञ भी हैं, उन्मुक्ति का उन मामलों में अधित्यजन करने का अधिकार और कर्तव्य होगा जहां उसकी राय में, ऐसी उन्मुक्ति से न्याय का मार्ग अवरुद्ध होगा और जहां उसका निधि के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना अधित्यजन किया जा सकता है ।

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