भारतीय दंड संहिता की धारा 280 के अनुसार, जो कोई किसी जलयान को ऐसे उतावलेपन या उपेक्षा से चलाएगा, जिससे मानव जीवन संकटापन्न हो जाए या किसी अन्य व्यक्ति को उपहति या क्षति कारित होना सम्भाव्य हो, वह दोनों में किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी , या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
1 भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937 द्वारा भारत सरकार द्वारा या किसी सरकार द्वारा के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
2 विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा केन्द्रीय या किसी प्रादेशिक शब्दों का लोप किया गया ।
3 भारतीय स्वतंत्रता (केन्द्रीय अधिनियम तथा अध्यादेश अनुकूलन) आदेश, 1948 द्वारा या क्राउन प्रतिनिधि शब्दों का लोप किया गया । भारतीय दंड संहिता, 1860 53
| अपराध | सजा | संज्ञेय | जमानत | विचारणीय |
|---|---|---|---|---|
| किसी भी पोत को इतनी जल्दबाजी या लापरवाही से नेविगेट करना कि मानव जीवन को खतरे में डालना आदि | 6 महीने या जुर्माना या दोनों | संज्ञेय | जमानतीय | कोई भी मजिस्ट्रेट |

