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मोटर परिवहन कर्मकार अधिनियम, 1961 ( Motor Transport Workers Act, 1961 )


 

मोटर परिवहन कर्मकार अधिनियम, 1961

(1961 का अधिनियम संख्यांक 27)

[20 मई, 1961]

मोटर परिवहन कर्मकारों के कल्याण का उपबन्ध करने और उनकी

काम की परिस्थितियों का विनियमन करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के बारहवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार, प्रारम्भ और लागू होना-(1) यह अधिनियम मोटर परिवहन कर्मकार अधिनियम, 1961 कहा जा सकेगा ।

(2) इसका विस्तार । । । सम्पूर्ण भारत पर है । 

(3) यह 1962 के मार्च के 31वें दिन के पश्चात् की न होने वाली उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जिसे केन्द्रीय सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे, और विभिन्न राज्यों के लिए विभिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी:

 [परन्तु यह जम्मू-कश्मीर राज्य में केन्द्रीय श्रम विधि (जम्मू-कश्मीर पर विस्तारण) अधिनियम, 1970 (1970 का 51) के प्रारम्भ पर प्रवृत्त होगा ।] 

(4) यह पांच या अधिक मोटर परिवहन कर्मकारों को नियोजित करने वाले हर मोटर परिवहन उपक्रम को लागू होता है:

परन्तु राज्य सरकार, ऐसा करने के अपने आशय की कम से कम दो मास की सूचना देने के पश्चात् शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के सभी या किन्हीं उपबन्धों को पांच से कम मोटर परिवहन कर्मकारों को नियोजित करने वाले किसी भी मोटर परिवहन उपक्रम को लागू कर सकेगी । 

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

(क) कुमार" से कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसने अपना [चौदहवां] वर्ष पूरा कर लिया है, किन्तु अपना अठारहवां वर्ष पूरा नहीं किया है; 

(ख) वयस्थ" से कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसने अपना अठारहवां वर्ष पूरा कर लिया है; 

(ग) बालक" से कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसने अपना 4[चौदहवां] वर्ष पूरा नहीं किया है; 

(घ) दिन" से मध्यरात्रि को आरम्भ होने वाली चौबीस घंटों की कालावधि अभिप्रेत है: 

परन्तु जहां कि मोटर परिवहन कर्मकार का कर्तव्य-काल मध्यरात्रि से पहले आरम्भ होता है किन्तु मध्यरात्रि के पश्चात् तक चलता है वहां उसके लिए आगामी दिन उस समय से जब ऐसा कर्तव्य-काल समाप्त होता है, आरम्भ होने वाली चौबीस घंटों की कालावधि समझा जाएगा और मध्यरात्रि के पश्चात् जितने घंटे उसने काम किया है उनकी गणना पूर्व दिन में की जाएगी;

(ङ) नियोजक" से किसी मोटर परिवहन उपक्रम के सम्बन्ध में वह व्यक्ति या प्राधिकारी अभिप्रेत है जिसका मोटर परिवहन उपक्रम के कार्यकलाप पर अन्तिम नियंत्रण है, और जहां कि उक्त कार्यकलाप किसी अन्य व्यक्ति को, चाहे वह प्रबन्धक, प्रबन्ध निदेशक, प्रबन्ध अभिकर्ता या किसी भी अन्य नाम से पुकारा जाए, न्यस्त किए गए हों, वहां ऐसा अन्य व्यक्ति अभिप्रेत है;

(च) काम के घंटे" से वह समय अभिप्रेत है, जिसके दौरान मोटर परिवहन कर्मकार की सेवाएं, नियोजक या उसकी सेवाओं का दावा करने के हकदार किसी अन्य व्यक्ति के आज्ञाधीन हों और इसके अन्तर्गत निम्नलिखित आते हैं :-

(i) परिवहन यान के चालन-काल के दौरान किए गए काम में बिताया गया समय, 

(ii) समनुषंगी काम में बिताया गया समय, तथा 

(iii) मार्गान्तों पर पंद्रह मिनट से कम की हाजिरी मात्र की कालावधियां ।

स्पष्टीकरण-इस खण्ड के प्रयोजनों के लिए- 

(1) चालन-काल" से कार्य-दिवस के संबंध में वह समय अभिप्रेत है जो उस क्षण से लेकर जब कार्य दिवस के आरम्भ में परिवहन यान काम करना आरम्भ करता है उस क्षण तक का है जब परिवहन यान कार्य-दिवस के अन्त में काम बन्द करता है और उसमें से ऐसा समय अपवर्जित है जिसके दौरान परिवहन यान का चलना उस कालावधि के लिए रुका रहता है जो ऐसी अवधि से अधिक हो जो विहित की जाए और जिस कालावधि के दौरान वे व्यक्ति जो यान चाहते हैं या उस परिवहन यान के संसंग में कोई अन्य काम करते हैं, अपना समय अपनी इच्छानुसार व्यतीत करने को स्वतन्त्र रहते हैं या समनुषंगी काम में लगे रहते हैं;

(2) समनुषंगी काम" से परिवहन यान, उसके यात्रियों या उसके भार के संसंग में ऐसा काम अभिप्रेत है, जो परिवहन यान के चालन-काल के बाहर किया जाता है और जिसके अन्तर्गत विशिष्टतः निम्नलिखित आते हैं- 

(i) लेखाओं के, नगदी जमा कराने के रजिस्टरों पर हस्ताक्षर करने के, सेवा-पत्र सौंपने के और टिकटों की जांच के संसंग में काम और इसी प्रकार का अन्य काम; 

(ii) परिवहन यात्रा को अपने हाथ में लेना और गराज में रखना; 

(iii) उस स्थान में, जहां व्यक्ति काम पर आने के हस्ताक्षर करता है, उस स्थान तक यात्रा करना जहां वह परिवहन यान अपने हाथ में लेता है और उस स्थान से, जहां वह परिवहन यान को छोड़ता है, उस स्थान तक यात्रा करना जहां वह काम पर से चले जाने के हस्ताक्षर करता है; 

(iv) परिवहन यान के अनुरक्षण और मरम्मत के संसंग में काम; तथा 

(v) परिवहन यान पर लदाई और इससे उतराई; 

(3) हाजिरी मात्र की कालावधि" से वह कालावधि अभिप्रेत है जिसके दौरान कोई व्यक्ति अपने पद स्थान पर केवल इसलिए रहता है कि सम्भावित बुलावों का अनुपालन करे या कर्तव्य सूची में नियत किए गए समय पर कार्य पुनः प्रारम्भ करे; 

(छ) मोटर परिवहन उपक्रम" से वह मोटर परिवहन उपक्रम अभिप्रेत है जो सड़क द्वारा यात्रियों या माल या दोनों का भाड़े या इनाम के लिए वहन करने में लगा हुआ है और इसके अन्तर्गत प्राइवेट वाहक आता है; 

(ज) मोटर कर्मकार" से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जो किसी परिवहन यान पर वृत्तिक हैसियत में काम करने के लिए या ऐसे परिवहन यान के आगमन, प्रस्थान और उस पर लदाई या उससे उतराई के संसंग में कर्तव्य करने के लिए, चाहे मजदूरी पर या मजदूरी के बिना, सीधे या किसी अभिकरण के माध्यम से, मोटर परिवहन उपक्रम में नियोजित है और इसके अन्तर्गत ड्राइवर, कन्डक्टर, क्लीनर, स्टेशन कर्मचारिवृन्द, लाइनजांच कर्मचारिवृन्द, बुकिंग क्लर्क, रोकड़ क्लर्क, डिपो क्लर्क, टाइमकीपर, चौकीदार या परिचर आता है, किन्तु धारा 8 को छोड़कर इसके अन्तर्गत निम्नलिखित नहीं आते- 

(i) ऐसा कोई व्यक्ति जो कारखाना अधिनियम, 1948 (1948 का 63) में यथापरिभाषित कारखाने में नियोजित है; 

(ii) ऐसा कोई व्यक्ति जिसे दुकानों या वाणिज्यिक स्थापनों में नियोजित व्यक्तियों की सेवा की शर्तों का विनियमन करने वाली किसी तत्समय प्रवृत्त विधि के उपबन्ध लागू होते हैं; 

(झ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

(ञ) अर्हित चिकित्सा-व्यवसायी" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो भारतीय चिकित्सा उपाधि अधिनियम, 1916 (1916 का 7) की अनुसूची में विनिर्दिष्ट या उस अधिनियम की धारा 3 के अधीन अधिसूचित या भारतीय चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 1956 (1956 का 102) की अनुसूचियों में विनिर्दिष्ट किसी प्रधिकारी द्वारा अनुदत्त प्रमाणपत्र रखता है और किसी प्रान्तीय या राज्य चिकित्सा परिषद् अधिनियम के अधीन अनुदत्त प्रमाणपत्र रखने वाला व्यक्ति इसके अन्तर्गत आता है; 

(ट) विस्तृति" से किसी दिन कर्तव्य-काल के प्रारम्भ और उसी दिन के कर्तव्य-काल के पर्यवसान के बीच की कालावधि अभिप्रेत है; 

(ठ) मजदूरी" का वही अर्थ है जो मजदूरी संदाय अधिनियम, 1936 (1936 का 4) की धारा 2 के खण्ड (ध्त्) में उसे समनुष्टि है; 

(ड) सप्ताह" से शनिवार की मध्य रात्रि और उससे ठीक अगले शनिवार की मध्य रात्रि की कालावधि अभिप्रेत है; 

(ढ) अन्य सभी शब्दों और पदों के, जो इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं किन्तु पारिभाषित नहीं हैं और मोटर यान अधिनियम, 1939 (1939 का 4) में परिभाषित हैं, वे ही अर्थ होंगे जो उस अधिनियम में उन्हें क्रमशः समनुदिष्ट हैं । 

अध्याय 2

मोटर परिवहन उपक्रमों का रजिस्ट्रीकरण

3. मोटर परिवहन उपक्रम का रजिस्ट्रीकरण-(1) ऐसे मोटर परिवहन उपक्रम का जिसे यह अधिनियम लागू होता हो, हर नियोजक उपक्रम को इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत कराएगा । 

(2) मोटर परिवहन उपक्रम के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन, नियोजक द्वारा विहित प्राधिकारी से ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय के भीतर किया जाएगा, जो विहित किया जाए । 

(3) जहां कि मोटर परिवहन उपक्रम इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत किया जाए वहां नियोजक को एक रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र दिया जाएगा, जिसमें ऐसी विशिष्टियां होंगी जो विहित की जाएं । 

अध्याय 3

निरीक्षक कर्मचारिवृन्द

4. मुख्य निरीक्षक और निरीक्षक-(1) राज्य सरकार, सम्यक् रूप से अर्हित किसी व्यक्ति को, राज्य के लिए मुख्य निरीक्षक और सम्यक् रूप से अर्हित उतने व्यक्तियों को, जितने वह ठीक समझे, मुख्य निरीक्षक के अधीनस्थ निरीक्षक, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियुक्त कर सकेगी । 

(2) मुख्य निरीक्षक वे स्थानीय सीमाएं घोषित कर सकेगा जिनके भीतर निरीक्षक इस अधिनियम के अधीन की अपनी शक्तियों का प्रयोग करेंगे और ऐसी स्थानीय सीमाओं के भीतर, जो राज्य सरकार द्वारा उसे समनुदिष्ट की जाएं, निरीक्षक की शक्तियों का प्रयोग स्वयं कर सकेगा । 

(3) मुख्य निरीक्षक और सभी निरीक्षक भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ के अन्दर लोक सेवक समझे जाएंगे ।  

5. निरीक्षकों की शक्तियां-(1) ऐसी शर्तों और निबंधनों के अध्यधीन, जिन्हें राज्य सरकार, साधारण या विशेष आदेश द्वारा अधिरोपित करे, मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक- 

(क) ऐसी परीक्षा और जांच कर सकेगा जो वह यह अभिनिश्चित करने के लिए ठीक समझे, कि क्या इस अधिनियम के या तद्धीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुपालन किसी मोटर परिवहन उपक्रम के बारे में किया जा रहा है और उस प्रयोजन के लिए परिवहन यान के ड्राइवर से अपेक्षा कर सकेगा कि वह परिवहन यान को रोक ले और उतनी देर तक खड़ा रखे जितनी देर उसका खड़ा रखा जाना युक्तियुक्त रूप से आवश्यक हो; 

(ख) ऐसी सहायता के साथ, यदि कोई हो, जो वह ठीक समझे, किसी परिसर में, जिसकी बाबत वह यह विश्वास करने का कारण रखता हो कि वह किसी मोटर परिवहन उपक्रम के उपयोग या अधिभोग में है, इस अधिनियम के उद्देश्यों के कार्यान्वयन के प्रयोजन से, युक्तियुक्त समय पर प्रवेश कर सकेगा, उसका निरीक्षण कर सकेगा और उसकी तलाशी ले सकेगा;

(ग) किसी मोटर परिवहन उपक्रम में नियोजित किसी मोटर परिवहन कर्मकार की परीक्षा कर सकेगा या इस अधिनियम के अनुसरण में रखे गए किसी रजिस्टर या अन्य दस्तावेज के पेश किए जाने की अपेक्षा कर सकेगा और उसी स्थल पर अन्यथा किसी व्यक्ति के ऐसे कथन ले सकेगा, जिन्हें वह इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक समझे;

(घ) ऐसे रजिस्टरों या दस्तावेजों या उनके ऐसे प्रभागों को अभिगृहीत कर सकेगा या उनकी प्रतिलिपि ले सकेगा जिन्हें वह इस अधिनियम के अधीन किसी ऐसे अपराध के बारे में सुसंगत समझे जिसकी बाबत वह यह विश्वास करने का कारण रखता हो कि वह नियोजक द्वारा किया गया है; 

(ङ) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा जो विहित की जाएं:

                परन्तु इस उपधारा के अधीन कोई भी व्यक्ति किसी ऐसे प्रश्न का उत्तर देने या कोई ऐसा कथन करने के लिए विवश न किया जाएगा, जिसकी प्रवृत्ति उसे अपराध में फंसाने की हो ।  

(2) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898 (1898 का 5) के उपबन्ध, इस धारा के अधीन किसी तलाशी या अभिग्रहण को यथाशक्य ऐसे लागू होंगे जैसे वे उक्त संहिता की धारा 98 के अधीन निकाले गए वांरट के प्राधिकार के अधीन की तलाशी या अभिग्रहण को लागू होते हैं । 

6. निरीक्षकों को दी जाने वाली सुविधाएं-हर नियोजक, मुख्य निरीक्षक और निरीक्षक को इस अधिनियम के अधीन प्रवेश, निरीक्षण, परीक्षा या जांच करने के लिए सभी युक्तियुक्त सुविधाएं देगा । 

7.  प्रमाणकर्ता सर्जन-(1) राज्य सरकार अर्हित चिकित्सा-व्यवसायियों को ऐसी स्थानीय सीमाओं के अन्दर या ऐसे मोटर परिवहन उपक्रमों या मोटर परिवहन उपक्रमों के वर्ग के लिए, जिन्हें वह उन्हें क्रमशः समनुदिष्ट करे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए प्रमाणकर्ता सर्जन नियुक्त कर सकेगी । 

(2) प्रमाणकर्ता सर्जन उन कर्तव्यों का पालन करेगा जो निम्नलिखित के सम्बन्ध में विहित किए जाएं: -

(क) मोटर परिवहन कर्मकार की परीक्षा और प्रमाणन; 

(ख) जहां कि किसी मोटर परिवहन उपक्रम में कुमार किसी ऐसे काम में, जिससे उनके स्वास्थ्य को क्षति पहुंचना संभाव्य हो, मोटर परिवहन कर्मकारों के रूप में नियोजित किए जाते हैं, या किए जाने हैं वहां ऐसे चिकित्सीय पर्यवेक्षण का प्रयोग जो विहित किया जाए ।

अध्याय 4

कल्याण और स्वास्थ्य

8. कैंटीन-(1) राज्य सरकार यह अपेक्षा करने वाले नियम बना सकेगी कि हर स्थान में, जिसमें मामूली तौर पर यह होता है कि मोटर परिवहन उपक्रम में नियोजित सौ या अधिक मोटर परिवहन कर्मकार हर दिन के दौरान कर्तव्य के सिलसिले में वहां पर आते हैं मोटर परिवहन कर्मकारों के उपयोग के लिए एक या अधिक कैन्टीन नियोजक द्वारा उपबंधित की जाएंगी और बनाए रखी जाएंगी । 

(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित का उपबन्ध कर सकेंगे- 

(क) वह तारीख जिस तक कैंटीन का उपबन्ध कर दिया जाएगा; 

(ख) उन कैंटीनों की संख्या जो उपबंधित की जाएगी और कैंटीनों के सन्निर्माण, उनमें की जगह, फर्नीचर और अन्य उपस्कर के बारे में स्तरमान; 

(ग) वे खाद्य पदार्थ जो वहां परोसे जा सकेंगे और वे प्रभार जो उनके लिए, लिए जा सकेंगे; 

(घ) कैंटीन के लिए एक प्रबन्ध समिति का गठन और कैंटीन के प्रबंध में मोटर परिवहन कर्मकारों का प्रतिनिधित्व । 

(3) राज्य सरकार, उपधारा (2) के खण्ड (ग) के संबंध में नियम बनाने की शक्ति मुख्य निरीक्षक को ऐसी शर्तों के अध्यधीन, जिन्हें वह अधिरोपित करे, प्रत्यायोजित कर सकेगी ।

9. आराम कमरे-(1) हर ऐसे स्थान में, जहां मोटर परिवहन उपक्रम में नियोजित परिवहन कर्मकारों से रात्रि में रुकने की अपेक्षा की जाती हो, उन मोटर परिवहन कर्मकारों के उपयोग के लिए उतने आराम कमरे या ऐसी अन्य यथोचित आनुकल्पिक जगह जो विहित की जाए, नियोजक द्वारा उपबंधित की जाएगी और बनाए रखी जाएगी । 

(2) उपधारा (1) के अधीन उपबंधित किए जाने वाले आराम कमरे या आनुकल्पिक जगह पर्याप्त रूप से प्रकाशयुक्त और संवातित होगी तथा साफ और सुखद दशा में बनाए रखी जाएंगी ।

(3) राज्य सरकार, इस धारा के अधीन उपबन्धित किए जाने वाले आराम कमरे या आनुकल्पिक जगह के सन्निर्माण और उनमें की जगह, फर्नीचर और अन्य उपस्कर के बारे में स्तरमान विहित कर सकेगी । 

10. वर्दियां-(1) राज्य सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, मोटर परिवहन उपक्रम के नियोजक से यह अपेक्षा करने वाले नियम बना सकेगी कि वह उपक्रम में नियोजित ड्राइवरों, कंडक्टरों और लाइन जांच कर्मचारिवृन्द की वर्षा या ठंड से संरक्षा के लिए इतनी संख्या में और इस प्रकार की वर्दियों, बरसातियों अथवा ऐसी ही अन्य सुख-सुविधाओं का, जो नियमों में विनिर्दिष्ट की जाएं, उपबन्ध करें ।  

(2) ड्राइवरों, कंडक्टरों और लाइन-जांच कर्मचारिवृन्द को, उपधारा (1) के अधीन उपबंधित वर्दियों की धुलाई का भत्ता नियोजक द्वारा ऐसी दरों से दिया जाएगा, जो कि विहित की जाएं:

परन्तु ऐसा कोई भी भत्ता ऐसे नियोजक द्वारा देय न होगा जिसने वर्दियों की धुलाई का स्वयं अपने खर्च पर पर यथायोग्य इंतजाम किया है । 

11. चिकित्सीय सुविधाएं-नियोजक द्वारा मोटर परिवहन कर्मकारों के लिए आसानी से उपलभ्य ऐसी चिकित्सीय सुविधाएं, ऐसे संचालन केन्द्रों और विराम स्टेशनों पर, जैसे राज्य सरकार द्वारा विहित किए जाएं, उपबंधित की जाएंगी और बनाए रखी जाएंगी ।

12. प्राथमिक उपचार सुविधाएं-(1) विहित अन्तर्वस्तुओं से सज्जित प्राथमिक उपचार बक्स, नियोजक द्वारा हर परिवहन यान में इस प्रकार उपबंधित किया जाएगा और बनाए रखा जाएगा कि काम के सब घंटों में उस तक आसानी से पहुंच हो सके । 

(2) प्राथमिक उपचार बक्स में विहित अन्तर्वस्तुओं के सिवाय और कुछ नहीं रखा जाएगा । 

(3) प्राथमिक उचार बक्स को परिवहन यान के ड्राइवर या कंडक्टर के भारसाधन में रखा जाएगा, जिसे उसका प्रयोग करने में प्रशिक्षण की सुविधाएं दी जाएंगी ।

अध्याय 5

नियोजन के घंटे और उस पर निर्बन्धन

13. वयस्थ मोटर परिवहन कर्मकारों के लिए काम के घंटे-किसी भी वयस्थ मोटर परिवहन कर्मकार से एक दिन में आठ घंटे और एक सप्ताह में अड़तालीस घंटे से अधिक काम न तो अपेक्षित किया जाएगा, न उसे करने दिया जाएगा:

परन्तु जहां कि कोई ऐसा मोटर परिवहन कर्मकार ऐसे लंबी दूरी के मार्गों पर, या ऐसे त्यौहारों के या अन्य अवसरों पर, जो विहित रीति से और विहित प्राधिकारी द्वारा अधिसूचित किए जाएं, किसी मोटर परिवहन सेवा को चलाने में लगा हो, वहां नियोजक, ऐसे प्राधिकारी के अनुमोदन से, एक दिन में आठ घंटे से या एक सप्ताह में अड़तालीस घंटे से अधिक काम ऐसे मोटर परिवहन कर्मकार से अपेक्षित कर सकेगा या उसे करने दे सकेगा, किन्तु किसी भी दशा में वह, यथास्थिति, एक दिन में दस घंटे से और एक सप्ताह में चौवन घंटे से अधिक न होगा :

परन्तु यह भी मोटर परिवहन सेवा के ठप्प या अस्तव्यस्त हो जाने की, या यातायात को बाधा पहुंचाने की, या किसी दैवकृत की दशा में नियोजक, ऐसी शर्तों और निर्बंधनों के अध्यधीन, जो विहित किए जाएं, एक दिन में आठ घंटे से अधिक और एक सप्ताह में अड़तालीस घंटे से अधिक काम किसी ऐसे मोटर परिवहन कर्मकार से अपेक्षित कर सकेगा या उसे करने दे सकेगा । 

14. मोटर परिवहन कर्मकारों के रूप में नियोजित कुमारों के लिए काम के घंटे-किसी कुमार को किसी मोटर परिवहन उपक्रम में: -

(क) एक दिन में छह घंटे से अधिक, जिसमें आधे घंटे का विश्राम-अंतराल सम्मिलित है; 

(ख) 10 बजे अपराह्न और 6 बजे पूर्वाह्न के बीच,

मोटर परिवहन कर्मकार के रूप में काम करने के लिए न तो नियोजित किया जाएगा और न अपेक्षित किया जाएगा ।

15. दैनिक विश्राम अन्तराल-(1) वयस्थ मोटर परिवहन कर्मकारों के संबंध में हर एक दिन काम के घंटे ऐसे नियत किए जाएंगे कि काम की कोई भी कालावधि पांच घंटे से अधिक की न हो और ऐसा कोई भी मोटर परिवहन कर्मकार, कम से कम आधे घंटे का विश्राम-अन्तराल ले चुकाने के पूर्व, पांच घंटे से अधिक काम न करें:

परन्तु इस उपधारा के उपबंध जहां तक कि वे विश्राम-अन्तराल के संबंध में हैं, उस मोटर परिवहन कर्मकार को लागू नहीं होंगे जिससे उस दिन छह घंटे से अधिक काम करने की अपेक्षा न की जाए । 

(2) हर एक दिन के काम के घंटे इस प्रकार नियत किए जाएंगे कि मोटर परिवहन कर्मकार को, धारा 13 के द्वितीय परन्तुक में निर्दिष्ट किसी दशा में के सिवाय, किसी भी दिन कर्तव्य-काल के पर्यवसान और अगले दिन कर्तव्य-काल के प्रारंभ के बीच कम से कम नौ लगातार घंटों की विश्राम-कालावधि अनुज्ञात हो जाए । 

16. विस्तृति-(1) वयस्थ मोटर परिवहन कर्मकार के काम के घंटे, धारा 13 के द्वितीय परन्तुक में निर्दिष्ट दशा के सिवाय, ऐसे व्यवस्थित किए जाएंगे कि उनकी विस्तृति धारा 15 के अधीन विश्राम-अन्तराल सहित किसी दिन बारह घंटे से अधिक न हो ।

(2) कुमार मोटर परिवहन कर्मकार के काम के घंटे ऐसे व्यवस्थित किए जाएंगे कि उनकी विस्तृति धारा 14 के अधीन विश्राम-अन्तराल सहित किसी भी दिन नौ घंटे से अधिक न हो । 

17. विभाजित कर्तव्य-काल-इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट अन्य उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए यह है कि मोटर परिवहन कर्मकार के काम के घंटे किसी भी दिन दो से अधिक खंडों में विभाजित नहीं किए जाएंगे । 

18. काम के घंटों की सूचना-(1) ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, काम के घंटों की ऐसी सूचना हर एक नियोजक द्वारा संप्रदर्शित की जाएगी और सही रखी जाएगी, जिसमें हर दिन के लिए वे घंटे स्पष्ट तौर पर दर्शित किए गए हों जिनके दौरान मोटर परिवहन कर्मकारों से काम करने की अपेक्षा की जा सकती है ।

(2) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट अन्य उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए यह है कि इस प्रकार संप्रदर्शित काम के घंटों की सूचना के अनुसार से अन्यथा काम न तो किसी भी ऐसे मोटर परिवहन कर्मकार से अपेक्षित किया जाएगा, न उसे करने दिया जाएगा । 

19. साप्ताहिक विश्राम-(1) राज्य सरकार सात दिन की हर कालावधि में एक विश्राम दिन का, जो सभी मोटर परिवहन कर्मकारों को अनुज्ञात होगा, उपबंध करने वाले नियम शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा बना सकेगी । 

(2) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, नियोजक, मोटर परिवहन सेवा की किसी भी अस्तव्यस्तता का निवारण करने के लिए, किसी मोटर परिवहन कर्मकार से किसी भी विश्राम दिन को, जो अवकाश दिन न हो, काम करने की अपेक्षा कर सकेगा, किन्तु ऐसे कि मोटर परिवहन कर्मकार, बीच में एक पूरे दिन के अवकाश के बिना, लगातार दस दिन से अधिक काम न करे ।

(3) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट कोई भी बात किसी ऐसे मोटर परिवहन कर्मकार को लागू नहीं होगी जिसके नियोजन की कुल कालावधि छुट्टी पर बिताए गए दिन को सम्मिलित करते हुए, छह दिन से कम है । 

20. प्रतिकरात्मक विश्राम दिन-जहां कि नियोजक को धारा 19 के प्रवर्तन से इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन अनुदत्त छूट के परिणामस्वरूप, कोई मोटर परिवहन कर्मकार उन विश्राम-दिनों में से किसी से, जिनका वह उस धारा के अधीन हकदार हो, वंचित हो जाए, वहां मोटर परिवहन कर्मकार को उस मास के भीतर जिसमें उसे वे विश्राम दिन अनुज्ञेय हैं, या उस मास के अव्यवहित पश्चात्वर्ती दो मास के भीतर उतने प्रतिकरात्मक विश्राम-दिन अनुज्ञात किए जाएंगे जितने विश्राम-दिनों की हानि इस प्रकार हुई है । 

अध्याय 6

अल्पवय व्यक्तियों का नियोजन

21. बालकों के नियोजन का प्रतिषेध-किसी भी बालक से किसी मोटर परिवहन उपक्रम में किसी भी हैसियत में काम न तो अपेक्षित किया जाएगा, न उसे करने दिया जाएगा । 

22. मोटर परिवहन कर्मकारों के रूप में नियोजित कुमारों द्वारा टोकन अपने पास रखा जाना-किसी भी कुमार से किसी मोटर परिवहन उपक्रम में मोटर परिवहन कर्मकार के रूप में काम तब के सिवाय न तो अपेक्षित किया जाएगा, न उसे करने दिया जाएगा, जबकि-     

                (क) उसके बारे में धारा 23 के अधीन अनुदत्त योग्यता-प्रमाणपत्र नियोजक की अभिरक्षा में हो; तथा  

(ख) ऐसे कुमार के पास उस समय जब वह काम में लगा हो, ऐसे प्रमाणपत्र के प्रति निर्देश करने वाला टोकन हो । 

23. योग्यता प्रामणपत्र-(1) प्रमाणपत्र सर्जन, किसी कुमार अथवा उसके माता-पिता या संरक्षक के ऐसे आवेदन पर, जिसके साथ नियंत्रक द्वारा या उसकी ओर से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित इस बात का दस्तावेज हो कि यदि ऐसा व्यक्ति उस काम के लिए योग्य प्रमाणित हुआ हो तो वह मोटर परिवहन उपक्रम में मोटर परिवहन कर्मकार के रूप में नियोजित किया जाएगा, अथवा काम करने का आशय रखने वाले कुमार के प्रति निर्देश से नियोजक के या उसकी ओर से किसी अन्य व्यक्ति के आवेदन पर, ऐसे व्यक्ति की परीक्षा करेगा और मोटर परिवहन कर्मकार के रूप में काम करने की उनकी योग्यता अभिनिश्चित करेगा । 

(2) इस धारा के अधीन अनुदत्त योग्यता प्रमाणपत्र अपनी तारीख से बारह मास की कालावधि के लिए विधिमान्य होगा, किन्तु नवीकृत किया जा सकेगा ।

(3) इस धारा के अधीन प्रमाणपत्र के लिए संदेय फीस नियोजक द्वारा संदत्त की जाएगी और कुमार, उसके माता-पिता या संरक्षक से वसूलीय नहीं होगी ।

24. चिकित्सीय परीक्षा की अपेक्षा करने की शक्ति-जहां कि निरीक्षक की यह राय हो कि किसी मोटर परिवहन उपक्रम में योग्यता-प्रमाणपत्र के बिना काम करने वाला मोटर परिवहन कर्मकार कुमार है वहां वह नियोजक पर यह अपेक्षा करने वाली सूचना की तामील कर सकेगा कि ऐसे कुमार मोटर परिवहन कर्मकार की परीक्षा किसी प्रमाणकर्ता सर्जन द्वारा की जाए, और यदि निरीक्षक ऐसा निदेश दे तो ऐसे कुमार मोटर परिवहन कर्मकार को किसी मोटर परिवहन उपक्रम में तब तक न तो नियोजित किया जाएगा और न काम करने दिया जाएगा जब तक इस प्रकार उसकी परीक्षा न हो गई हो और धारा 23 के अधीन उसे योग्यता-प्रमाणपत्र अनुदत्त न कर दिया गया हो ।

अध्याय 7

मजदूरी और छुट्टी

25. 1936 के अधिनियम 4 का मोटर परिवहन कर्मकारों को मजदूरी के संदाय पर लागू होना-तत्समय यथा प्रवृत्त मजदूरी संदाय अधिनियम, 1936 (1936 का 4) जैसे वह किसी औद्योगिक स्थापना में संदेय मजदूरी को लागू होता है, वैसे ही मोटर परिवहन उपक्रम में, नियोजित मोटर परिवहन कर्मकारों को इस प्रकार लागू होगा मानो उक्त अधिनियम का विस्तार, उसकी धारा 1 की उपधारा (5) के अधीन, राज्य सरकार की अधिसूचना द्वारा, ऐसे मोटर परिवहन कर्मकारों की मजदूरी के संदाय पर कर दिया गया हो, और मानो परिवहन उपक्रम उक्त अधिनियम के अर्थ के अन्दर औद्योगिक स्थापन हो । 

26. अतिकाल के लिए अतिरिक्त मजदूरी-(1) जहां कि कोई वयस्थ मोटर परिवहन कर्मकार धारा 13 के प्रथम परन्तुक में निर्दिष्ट किसी दशा में किसी भी दिन आठ घंटे से अधिक काम करे या जहां कि धारा 19 की उपधारा (2) के अधीन उससे किसी विश्राम-दिन को काम करने की अपेक्षा की जाए, वहां, वह, यथास्थिति, अतिकालिक काम या विश्राम-दिन को किए गए काम के लिए अपनी मजूदरी की मामूली दर से दुगुनी दर से मजदूरी का हकदार होगा । 

(2) जहां कि कोई वयस्थ मोटर परिवहन कर्मकार, धारा 13 के द्वितीय परन्तुक में निर्दिष्ट किसी दशा में किसी भी दिन आठ घंटे से अधिक काम करे वहां वह अतिकालिक काम करने के लिए ऐसी दरों से मजदूरी का हकदार होगा जो विहित की जाएं । 

(3) जहां कि किसी कुमार मोटर परिवहन कर्मकार से किसी विश्राम-दिन को काम करने की अपेक्षा धारा 19 की उपधारा (2) के अधीन की जाए, वहां वह विश्राम-दिन को किए गए काम के लिए अपनी मजदूरी की मामूली दर से दुगुनी दर से मजदूरी पाने का हकदार होगा । 

(4) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, मोटर परिवहन कर्मकार के संबंध में मजदूरी की मामूली दर" से मंहगाई भत्ता सहित उसकी आधारिक मजदूरी अभिप्रेत है । 

27. मजदूरी सहित वार्षिक छुट्टी-(1) ऐसे अवकाश दिनों पर, जो विहित किए जाएं, प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, हर मोटर परिवहन कर्मकार को जिसने किसी कलैंडर वर्ष के दौरान किसी मोटर परिवहन उपक्रम में दो सौ चालीस या अधिक दिनों की कालावधि तक काम किया हो, निम्नलिखित दर से संगणित संख्या के दिनों की मजदूरी सहित छूट्टी पश्चात्वर्ती कलैंडर वर्ष के दौरान अनुज्ञात की जाएगी: 

(क) यदि वह वयस्थ हो तो पूर्ववर्ती कलैण्डर वर्ष के दौरान उसके द्वारा किए गए काम के हर बीस दिन पर एक दिन; तथा

(ख) यदि वह कुमार हो तो पूर्ववर्ती कलैण्डर वर्ष के दौरान उसके द्वारा किए गए काम के हर पन्द्रह दिन पर एक दिन । 

(2) वह मोटर परिवहन कर्मकार जिसकी सेवा जनवरी के प्रथम दिन को प्रारम्भ न होकर अन्यथा प्रारम्भ होती हो, यथास्थिति, उपधारा (1) के खण्ड (क) या खण्ड (ख) में अधिकथित दर से मजदूरी सहित छुट्टी का हकदार होगा, यदि उसने कलैण्डर वर्ष के अवशिष्ट भाग के दिनों की कुल संख्या के दो-तिहाई दिन काम किया हो । 

(3) यदि कोई मोटर परिवहन कर्मकार वर्ष के दौरान सेवा से उन्मोचित या पदच्युक्त कर दिया जाए, तो वह उपधारा (1) में अधिकथित दर से मजदूरी सहित छुट्टी का हकदार होगा, भले ही उसने उपधारा (1) या उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट उस पूरी कालावधि भर काम न किया हो जिससे वह उपार्जित छुट्टी का हकदार होता ।  

(4) इस धारा के अधीन छुट्टी की संगणना करने में आधे दिन या इससे अधिक की छुट्टी के भिन्न को पूरे एक दिन की छुट्टी माना जाएगा और आधे दिन से कम का भिन्न छोड़ दिया जाएगा । 

(5) यदि कोई मोटर परिवहन कर्मकार, यथास्थिति, उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन अपने को अनुज्ञात संपूर्ण छूट्टी किसी एक कलैण्डर वर्ष में न ले, तो उसके द्वारा न ली गई छुट्टी उस छुट्टी में जोड़ दी जाएगी जो उसे अगले कलैण्डर वर्ष के लिए अनुज्ञेय हो:

परन्तु छुट्टी के दिनों की कुल संख्या जो अगले वर्ष को अग्रनीत की जा सकेगी वयस्थ की दशा में तीस से और कुमार की दशा में चालीस से अधिक न होगी । 

(6) इस धारा में कलैण्डर वर्ष" से जनवरी के पहले दिन को प्रारम्भ होने वाला वर्ष अभिप्रेत है ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, छुट्टी के अन्तर्गत साप्ताहिक अवकाश दिन या त्यौहार के या ऐसे ही अन्य अवसरों के अवकाश दिन नहीं आएंगे, चाहे वे छुट्टी की कालावधि के दौरान या उसके किसी छोर पर पड़ते हों ।  

28. छुट्टी की कालावधि के दौरान मजदूरी-(1) उस छुट्टी के लिए, जो मोटर परिवहन कर्मकार को धारा 27 के अधीन अनुज्ञात हो उसे संदाय ऐसी दर से किया जाएगा, जो उसकी छुट्टी के अव्यवहित पूर्ववर्ती मास के उन दिनों की बाबत, जिनमें उसने काम किया, कुल पूर्णकालिक मजदूरी के उस दैनिक औसत के बराबर हो, जो उस मजदूरी में से किसी अतिकालिक उपार्जन और बोनस को, यदि कोई हो, अपवर्जित करके, किन्तु उसमें मंहगाई भत्ते को और कर्मकार को उन दिनों के लिए, जिनमें उसने काम किया, नियोजक द्वारा खाद्यान्नों के रियायती प्रदाय से प्रोद्भावी फायदे के, यदि कोई हो, नकद समतुल्य को सम्मिलित करके आए ।

(2) उस मोटर परिवहन कर्मकार को, जिसे चार दिन से अन्यून की छूट्टी धारा 27 के अधीन अनुज्ञात हुई हो, नियोजक से इस निमित्त उसके आवेदन करने पर, उसकी छुट्टी की कालावधि के लिए उसे वह रकम, जो उसे संदेय मजदूरी के लगभग समतुल्य हो, उसकी छुट्टी आरम्भ होने से पहले अग्रिम के रूप में संदत्त की जाएगी और इस प्रकार संदत्त रकम छुट्टी की पूर्वोक्त कालावधि के लिए उसे देय मजदूरी के विरुद्ध समायोजित की जाएगी । 

(3) यदि मोटर परिवहन कर्मकार को वह छुट्टी, जिसका वह धारा 27 की उपधारा (3) के अधीन हकदार हो, अनुदत्त न की जाए, तो उसके बजाय उसे उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट दरों से मजदूरी संदत्त की जाएगी । 

 

अध्याय 8

शास्तियां और प्रक्रिया

29. बाधा डालना-(1) जो कोई किसी निरीक्षक के उसके इस अधिनियम के अधीन के कर्तव्यों के अधीन निर्वहन में बाधा डालेगा, या किसी मोटर परिवहन उपक्रम में संबंध में इस अधिनियम द्वारा या के अधीन प्राधिकृत कोई निरीक्षण, परीक्षा या जांच करने के लिए निरीक्षक को युक्तियुक्त सुविधा देने से इन्कार करेगा या देने में जानबूझकर उपेक्षा करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा । 

(2) जो कोई इस अधिनियम के अनुसरण में रखे गए किसी रजिस्टर या अन्य दस्तावेज को निरीक्षक द्वारा मांगे जाने पर पेश करने से जानबूझकर इंकार करेगा, या किसी ऐसे निरीक्षक के, जो इस अधिनियम के अधीन के अपने कर्तव्यों के अनुसरण में कार्य कर रहा है, समक्ष उपसंजात होने से, या उसके द्वारा परीक्षा की जाने से किसी व्यक्ति को निवारित करेगा या निवारित करने का प्रयत्न करेगा या कोई ऐसी बात करेगा जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण हो कि उससे उसका इस प्रकार निवारित होना सम्भाव्य है, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।

30. योग्यता के मिथ्या प्रमाणपत्र का उपयोग-जो कोई धारा 23 के अधीन किसी अन्य व्यक्ति को अनुदत्त किसी योग्यता प्रमाणपत्र का, अपने को उस धारा के अधीन अनुदत्त प्रमाणपत्र के रूप में जानते हुए उपयोग करेगा या उपयोग करने का प्रयत्न करेगा, अथवा ऐसा योग्यता प्रमाणपत्र अपने को अनुदत्त किए जाने पर जानते हुए उसका अन्य व्यक्ति को उपयोग करने देगा, या करने का प्रत्यन करने देगा, वह कारावास से, जो एक मास तक का हो सकेगा, या जुर्माने से, जो पचास रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।

31. मोटर परिवहन कर्मकारों के नियोजन के बारे में उपबन्धों का उल्लंघन-जो कोई, उसके सिवाय जैसा कि इस अधिनियम द्वारा या के अधीन अन्यथा अनुज्ञात है, इस अधिनियम के या तद्धीन बनाए गए किन्हीं नियमों के किसी ऐसे उपबंध का उल्लंघन करेगा जो मोटर परिवहन उपक्रम में व्यक्तियों के नियोजन को प्रतिषिद्ध, निर्बन्धित या विनियमित करता हो, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा, और चालू रहने वाले उल्लंघन की दशा में अतिरिक्त जुर्माने से, जो हर ऐसे दिन के लिए, जिसके दौरान ऐसा उल्लंघन ऐसे प्रथम उल्लंघन के लिए दोषसिद्धि के पश्चात् चालू रहे, पचहत्तर रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।  

32. अन्य अपराध-जो कोई किसी ऐसे निदेश की, जो ऐसा निदेश देने के लिए इस अधिनियम के अधीन सशक्त किए गए किसी व्यक्ति या प्राधिकारी द्वारा विधिपूर्वक दिया गया हो, जानबूझकर अवज्ञा करेगा या इस अधिनियम के या तद्धीन बनाए गए किन्हीं नियमों के उपबन्धों में से किसी का, जिसके लिए इस अधिनियम द्वारा या के अधीन अन्यत्र कोई शास्ति उपबंधित न हो, उल्लंघन करेगा, वह कारावास से, जिसके अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा । 

33. पूर्व दोषसिद्धि के पश्चात् वर्धित शास्ति-यदि कोई व्यक्ति, जो इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध हो चुका हो, पुनः उसी उपबन्ध का उल्लंघन अन्तर्वलित करने वाले किसी अपराध का दोषी होगा तो वह पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर कारावास से, जो छह मास तक का हो सकेगा, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनो से, दण्डनीय होगा:

परन्तु जिस अपराध के लिए दण्ड दिया जा रहा हो, उसके किए जाने से दो वर्ष से अधिक पूर्व की गई दोषसिद्धि का इस धारा के प्रयोजनार्थ संज्ञान नहीं किया जाएगा ।

34. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) यदि इस अधिनियम के अधीन अपराध करने वाला व्यक्ति कम्पनी है तो कम्पनी और हर ऐसा व्यक्ति भी जो अपराध किए जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए कम्पनी का भारसाधक और उस कम्पनी के प्रति उत्तरदायी था, उस अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही की जाने और दण्डित किए जाने के दायित्व के अधीन होंगे: 

परन्तु इस धारा में अन्तर्विष्ट कोई भी बात ऐसे किसी व्यक्ति को किसी दण्ड के दायित्व के अधीन न करेगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या ऐसे अपराध का किया जाना निवारित करने के लिए उसने सब सम्यक् तत्परता बरती थी । 

(2) उपधारा (1) मे अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां कि इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध, किसी कम्पनी द्वारा किया गया है और यह साबित कर दिया जाता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक या प्रबन्ध-अभिकर्ता या अन्य किसी आफिसर की सम्मति या मौनानुकूलता से किया गया है या वह उसकी ओर से हुई किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसे निदेशक, प्रबन्धक, प्रबन्ध-अभिकर्ता या अन्य आफिसर भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही की जाने और दंडित किए जाने के दायित्व के अधीन होगा ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए- 

(क) कम्पनी" से कोई निगमित अभिप्रेत है और उसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का कोई अन्य संगम आता है; तथा 

(ख) फर्म के सम्बन्ध में, निदेशक" से फर्म का भागीदार अभिप्रेत है । 

35. अपराधों का संज्ञान-कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन के किसी अपराध का संज्ञान, निरीक्षक द्वारा, या उसकी लिखित पूर्व मंजूरी से, किए गए परिवाद पर करने के सिवाय न करेगा और प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट के न्यायालय से अवर कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का विचारण न करेगा ।

36. अभियोजनों की परिसीमा-कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का संज्ञान तब के सिवाय न करेगा, जबकि उसका परिवाद उस तारीख से, जब अभिकथित अपराध का किया जाना निरीक्षक के ज्ञान में आया, तीन मास के अन्दर किया गया हो:

परन्तु जहां कि अपराध निरीक्षक द्वारा किए गए लिखित आदेश की अवज्ञा करने का हो वहां उसका परिवाद उस तारीख से, छह मास के अन्दर किया जा सकेगा, जब उस अपराध का किया जाना अभिकथित हो ।

अध्याय 9

प्रकीर्ण

37. इस अधिनियम से असंगत विधियों और करारों का प्रभाव-(1) इस अधिनियम के उपबन्ध, किसी भी अन्य विधि में या इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व या पश्चात् किए गए किसी भी अधिनिर्णय, करार या सेवा की संविदा के निबन्धनों में उनसे असंगत किसी बात के अन्तर्विष्ट होते हुए भी प्रभावी होंगे:

परन्तु जहां कि ऐसे अधिनिर्णय, करार या सेवा की संविदा के अधीन अन्यथा कोई मोटर परिवहन कर्मकार किसी विषय के बारे में ऐसी प्रसुविधाओं का हकदार हो जो उसको उनसे अधिक अनुकूल हों जिनका वह इस अधिनियम के अधीन हकदार होगा वहां मोटर परिवहन कर्मकार, उस विषय के बारे में उन अधिक अनुकूल प्रसुविधाओं का हकदार इस बात के होते हुए भी बना रहेगा कि वह अन्य विषयों के बारे में इस अधिनियम के अधीन प्रसुविधाएं प्राप्त करता है । 

(2) इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह, किसी मोटर परिवहन कर्मकार को नियोजन से किसी विषय के बारे में ऐसे अधिकार या विशेषाधिकार अनुदत्त करने के लिए, जो उसके लिए उनसे अधिक अनुकूल हों जिनका वह इस अधिनियम के अधीन हकदार होगा, प्रवारित करती है ।

38. छूट-(1) इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट कोई भी बात उस परिवहन यान को या उसके सम्बन्ध में लागू नहीं होगी, जो- 

(i) रुग्ण या क्षत व्यक्तियों के परिवहन के लिए उपयोग में लाया जाता है; 

(ii) भारत की रक्षा या किसी राज्य की सुरक्षा या लोक-व्यवस्था बनाए रखने से संसक्त किसी प्रयोजन के लिए उपयोग में लाया जाता है ।

(2) उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, राज्य सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि ऐसी शर्तों और निर्बन्धनों के, यदि कोई हों, अध्यधीन, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं, इस अधिनियम के या तद्धीन बनाए बनाए गए नियमों के उपबन्ध- 

(i) उन मोटर परिवहन कर्मकारों को, जो राज्य सरकार की राय में किसी मोटर परिवहन-उपक्रम में पर्यवेक्षण या प्रबन्ध के पद धारण किए हुए हैं; 

(ii) किसी अंशकालिक मोटर परिवहन कर्मकार को; तथा 

(iii) नियोजकों के किसी वर्ग को,    

लागू नहीं होंगे:

                परन्तु इस उपधारा के अधीन कोई आदेश निकालने के पूर्व राज्य सरकार उसकी एक प्रति केन्द्रीय सरकार को भेजेगी ।

39. निदेश देने की शक्तियां-केन्द्रीय सरकार किसी राज्य सरकार की उस राज्य में इस अधिनियम में अंतर्विष्ट उपबन्धों का निष्पादन करने के सम्बन्ध में निदेश दे सकेगी ।

40. नियम बनाने की शक्ति-(1) राज्य सरकार, पूर्व प्रकाशन की शर्त के अध्यधीन रहते हुए, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, [राजपत्र में अधिसूचना द्वारा,] बना सकेगी:

परन्तु साधारण खण्ड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) की धारा 23 के अधीन विनिर्दिष्ट की जाने वाली तारीख उस तारीख से छह सप्ताह से कम की न होगी जिसको प्रस्थापित नियमों का प्रारूप प्रकाशित किया गया था ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित का उपबन्ध कर सकेंगे-

(क) मोटर परिवहन उपक्रम के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन का प्ररूप, वह समय जिसके भीतर और वह प्राधिकारी जिससे ऐसा आवेदन किया जा सकेगा;  

(ख) मोटर परिवहन उपक्रम के बारे में रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र का अनुदान और ऐसे रजिस्ट्रीकरण के लिए संदेय फीसें; 

(ग) मुख्य निरीक्षक और निरीक्षक के बारे में अपेक्षित अर्हताएं; 

(घ) वे शक्तियां जिनका निरीक्षकों द्वारा प्रयोग किया जा सकेगा, और वह रीति जिससे ऐसी शक्तियों का प्रयोग किया जा सकेगा; 

(ङ) चिकित्सीय पर्यवेक्षण, जो प्रमाणकर्ता सर्जनों द्वारा किया जा सकेगा; 

(च) मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक के किसी आदेश से अपीलें और वह प्ररूप जिसमें, वह समय जिसके भीतर और वे प्राधिकारी जिन्हें ऐसी अपीलें की जा सकेंगी; 

(छ) वह समय, जिसके भीतर उपबन्धित की जाने और बनाए रखी जाने के लिए इस अधिनियम द्वारा अपेक्षित सुविधाओं का इस प्रकार उपबन्ध किय जा सकेगा;

(ज) चिकित्सीय सुविधाएं, जिनको मोटर परिवहन कर्मकारों के लिए उपबन्ध किया जाना चाहिए; 

(झ) उस उपस्कर का प्रकार जिसका उपबन्ध प्राथमिक उपचार बक्सों में किया जाना चाहिए;

(ञ) वह रीति जिससे लम्बी दूरी के मार्ग, त्यौहार के और अन्य अवसर विहित प्राधिकारी द्वारा अधिसूचित किए जाएंगे;

(ट) वे शर्तें और निबंधन जिनके अध्यधीन धारा 13 के द्वितीय परन्तुक में निर्दिष्ट किसी दशा में एक दिन में आठ घंटे से अधिक या एक सप्ताह में अड़तालीस घंटे से अधिक काम किसी मोटर परिवहन कर्मकार से अपेक्षित किया जा सकेगा या उसे करने दिया जा सकेगा;

(ठ) वह प्ररूप और वह रीति जिसमें काम की कालावधि की सूचनाएं संप्रदर्शित की जाएंगी और बनाए रखी जाएंगी;

(ड) धारा 13 के द्वितीय परन्तुक में निर्दिष्ट किसी दशा में मोटर परिवहन कर्मकार द्वारा किए गए अतिकालिक काम के बारे में अतिरिक्त मजदूरी की दरें; 

(ढ) वे रजिस्टर जो नियोजकों द्वारा रखे जाने चाहिएं और वे कभी-कभी भेजे जाने वाली या कालिक विवरणियां जिनकी अपेक्षा राज्य सरकार की राय में इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए की जाए; तथा

(ण) कोई अन्य बात, जो विहित की जानी है या की जाए । 

 [(3) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र राज्य विधान-मंडल के समक्ष रखा जाएगा ।]

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