Citation : 2024 Latest Caselaw 36818 ALL
Judgement Date : 8 November, 2024
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD, LUCKNOW BENCH Neutral Citation No. - 2024:AHC-LKO:73968 Court No. - 12 Case :- CRIMINAL REVISION No. - 1359 of 2024 Revisionist :- Smt. Saroj Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Deptt. Lko And Another Counsel for Revisionist :- Pankaj Kumar Singh Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Saurabh Lavania,J.
Heard.
By means of this criminal revision instituted under Section 19(4) of Family Court Act, 1984 (in short "Act of 1984"), the revisionist/Smt. Saroj has challenged the order dated 07.10.2024 passed by the Principal Judge, Family Court, District-Balrampur (in short "trial Court") in Case Misc. Case No.278 of 2017 (Smt. Saroj vs. Om Prakash @ Brahmchari) instituted under Section 125 Cr.P.C.
The relevant portion of the order impugned dated 07.10.2024 on reproduction reads as under:-
"10. अवधारण बिन्दु संख्या 4:- यह बिन्दु इस आशय का विरचित है कि क्या विपक्षी ने प्रार्थिनी को उपेक्षित कर रखा है अथवा प्रार्थिनी विपक्षी से बिना किसी पर्याप्त कारण से पृथक रह रही है? इस बिन्दु के निस्तारण के लिए मेरे द्वारा पत्रावली का अवलोकन किया गया। पत्रावली के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि प्रार्थिनी यह चाहती है कि उसका पति उसके मायके में रहकर उसका व उसकी माता की देखरेख करे। जो विवाद की स्थिति बताई गई कि उसे अतिरिक्त दहेज को लेकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता रहा है, इसका कोई साक्ष्य, सिवाय मौखिक साक्षियों के साक्ष्य में पत्रावली पर नहीं हैं पत्रावली के अवलोकन से यह भी स्पष्ट होता है कि दहेज की प्रताड़ना मात्र ऑरनामेन्टल है। वास्तविक जो परेशानी है, पृथक रहने की वह मां का अकेले रहने और प्रार्थिनी को उसका देखभाल करना है। विवाह का तात्पर्य यह है कि प्रार्थिनी वैवाहिक घर में रहकर दाम्पत्य सम्बन्धों की स्थापना करे, न कि पति अपना घर छोड़कर अपनी पत्नी के घर जाकर रहे। जिस सहमति पत्र की बात प्रार्थिनी द्वारा कही गई है और जिसका लेखबद्ध होना साक्षियों द्वारा अपने साक्ष्य में कहा गया है, ऐसा कोई सहमति पत्र पत्रावली पर दाखिल नहीं किया गया है, जिससे यह साबित हो कि शादी के पूर्व ऐसी कोई शर्त रही हो।
10.1 पत्रावली पर पीठासीन आधिकारी के दिनांक 09.12.2019 का आदेश पत्रक इनतथ्यों को और स्पष्ट करता है, जिस पर पीठासीन अधिकारी द्वारा आदेश पत्रक में यह अंकित किया गया है कि "न्यायालय द्वारा अपने विश्राम कक्ष में पक्षकारों के बीच में मध्यस्थता के लिए वार्ता चलाई और सुलह समझौते का प्रयास किया। पति अपनी पत्नी को अपने साथ रखने और सम्पूर्ण खर्च को वहन करने के लिए तैयार है, किन्तु प्रार्थिनी के द्वारा कहा गया है कि 15 दिन पूर्व एक पंचायत हुई थी, जिसमें विपक्षी द्वारा प्रार्थिनी की मां से प्रार्थिनी के इलाज के लिए ऋण लिये जाने का कथन किया गया। आगे पीठासीन अधिकारी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि विपक्षी उक्त धनराशि का भुगतान करने के लिए तैयार है, किन्तु प्रार्थिनी ने यह शर्त रखी है कि वह ओमप्रकाश के साथ नहीं जायेगी। वह हमेशा अपने माता-पिता के घर ही रहेगी, जबकि विपक्षी द्वारा यह प्रयास किया गया कि जब वह बाहर कमाने के लिए जायेगा, तो प्रार्थिनी को अपने मां के घर रहने में उसे कोई आपत्ति नहीं है, किन्तु जब वह बाहर से कमाकर आये और अपने घर पर रहे, उस समय प्रार्थिनी उसके साथ रहे, किन्तु इसके लिए प्रार्थिनी तैयार नहीं हुई।" जो यह स्पष्ट करता है कि प्रार्थिनी बगैर किसी पर्याप्त कारण के मात्र माता की देखरेख के लिए अपने मायके में रह रही है, न कि दहेज प्रताड़ना के कारण। इस प्रकार युक्ति-युक्त कारण के बगैर प्रार्थिनी अपने मायके में रह रही है। चूंकि वह अपना भरण पोषण करने में समर्थ है। अतः ऐसी स्थिति में प्रार्थिनी कोई भरण पोषण पाने की अधिकारिणी नहीं पाई जाती है। तद्नुसार प्राथिनी का प्रार्थना पत्र निरस्त किये जाने योग्य है।
आदेश
तद्नुसार प्रार्थिनी सरोज की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र उक/1 अन्तर्गत धारा 125 दं०प्र०सं० निरस्त किया जाता है।"
Having considered the aforesaid, on being asked regarding observation made in Para 10 of the judgment and order dated 07.10.2024 particularly Para 10.1 passed by the trial Court, learned counsel for the revisionist failed to controvert the same.
Taking note of the aforesaid facts of the case as also the law on the issue and Section 125(4) Cr.P.C., this Court is not inclined to interfere in the matter. It is accordingly dismissed. No order as to costs.
Order Date :- 8.11.2024
Vinay/-
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