बीते दो दिनों में देश की सर्वोच्च अदालत ने कई अहम फैसले सुनाए हैं। यह सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहेगा। दरअसल,सुप्रीम कोर्ट दो अहम मामलों पर आज अपना फैसला सुनाएगा। पहला मामला महिलाओं के केरल के सबरीमाला मंदिरमें प्रवेश का है तो दूसरा भीमा-कोरेगांव हिंसा से जुड़ा है।
भीमा-कोरेगांव हिंसा: 5 कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हो या नहीं भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ्तार पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई और उनकी गिरफ्तारी मामले में एसआईटी जांच की मांग वाली इतिहासकार रोमिला थापर एवं अन्य की याचिका पर उच्चतम न्यायालय शुक्रवार को अपना फैसला सुना सकता है।
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ की पीठ ने 20 सितंबर को दोनों पक्षों के वकीलों की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।पीठ ने महाराष्ट्र पुलिस को मामले में चल रही जांच से संबंधित अपनी केस डायरी पेश करने के लिये कहा। पांचों कार्यकर्ता वरवरा राव, अरुण फरेरा, वरनॉन गोंजाल्विस, सुधा भारद्वाज और गौतम नवलखा 29 अगस्त से अपने-अपने घरों में नजरबंद हैं।
थापर, अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक एवं देवकी जैन, समाजशास्त्र के प्रोफेसर सतीश देशपांडे और मानवाधिकारों के लिये वकालत करने वाले माजा दारुवाला की ओर से दायर याचिका में इन गिरफ्तारियों के संदर्भ में स्वतंत्र जांच और कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग की गयी है।
पिछले साल 31 दिसंबर को ‘एल्गार परिषद’ के सम्मेलन के बाद राज्य के कोरेगांव-भीमा में हिंसा की घटना के बाद दर्ज एक एफआईआर के संबंध में महाराष्ट्र पुलिस ने इन्हें 28 अगस्त को गिरफ्तार किया था। शीर्ष न्यायालय ने 19 सितंबर को कहा था। कि वह मामले पर ‘‘पैनी नजर’’ बनाये रखेगा क्योंकि ‘‘सिर्फ अनुमान के आधार पर आजादी की बलि नहीं चढ़ायी जा सकती है।’’
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री हो या नहीं सुप्रीम कोर्ट आज केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर अपना फैसला सुनाने वाला है। सबरीमाला मंदिर प्रबंधन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि 10 से 50 वर्ष की आयु तक की महिलाओं के प्रवेश पर इसलिए प्रतिबंध लगाया गया है क्योंकि मासिक धर्म के समय वे शुद्धता बनाए नहीं रख सकतीं।
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश दिए जाने को लेकर लंबे समय से मांग उठती रही है, जिसका मंदिर प्रबंधन लगातार विरोध करता रहा है। एंट्री को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली 5 सदस्यीय बेंच ने अगस्त में पूरी सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा लिया था।
इस मामले में 7 नवंबर, 2016 को केरल सरकार ने कोर्ट को सूचित किया था कि वह ऐतिहासिक सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश के पक्ष में है।
न्यायमूर्ति मिश्रा, न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति इंदू मल्होत्रा की पीठ ने पहले कहा था कि (महिलाओं को प्रवेश से) अलग रखने पर रोक लगाने वाले संवैधानिक प्रावधान का ‘उज्ज्वल लोकतंत्र’ में ‘कुछ मूल्य’ है। शीर्ष अदालत का फैसला इंडियन यंग लायर्स एसोसिएशन और अन्य की याचिकाओं पर आएगा।
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