गुजरात हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए आईआईटी गांधीनगर (आईआईटी-सामान्य) की छात्रा पहुंची। जज साहब की नजर उसके पकड़ों पर पड़ी और कोर्टरूम से बाहर जाने का आदेश दिया। छात्रा अपनी एक सेमेस्टर की सस्पेंशन के खिलाफ याचिका दायर करने आई थी। आईआईटी प्रशासन ने उसे स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार करने और धमकी देने के मामले सस्पेंड कर दिया है।
संस्थान ने उसके ‘व्यवहार को आईआईटी छात्रा के अनुरूप’ नहीं बताया है।छात्रा सुनवाई के दौरान जींस और शर्ट पहनकर कोर्ट पहुंची थी। जैसे ही सुनवाई शुरू हुई, जज निजार देसाई ने उसके कपड़ों पर आपत्ति जताई। छात्रा के वकील जब उसके कपड़ों का बचाव करने लगे तो जस्टिस देसाई ने साफ कहा, ‘हर व्यक्ति को अपनी पसंद का अधिकार है, लेकिन यह जगह पर निर्भर करता है। अदालत में आने वाले व्यक्ति को उचित पकड़ों में आना चाहिए।’
सुनवाई खत्म होने के बाद जज ने वकील से कहा, ‘मुझे खेद है, लेकिन मैं इस अदालत को न्याय का मंदिर मानता हूं। यहां आने वाले लोगों को इसकी गरिमा बनाए रखनी चाहिए।’ छात्रा सोशल डेवलपमेंट में एमए की अंतिम सेमेस्टर में पढ़ रही है। उसके वकील ने बताया कि अकाउंट्स अधिकारी से बहस की वजह से सस्पेंशन हुआ था।
छात्रा फील्डवर्क के लिए पर्याप्त ग्रांट नहीं मिलने पर नाराज थी। वकील ने यह भी कहा कि संस्थान का रवैया पहले की एक घटना से भी प्रभावित है, जिसमें छात्रा को लड़कों के हॉस्टल में रहने के आरोप में हॉस्टल से बाहर कर दिया गया है। उसके बाद से वह कैंपस के बाहर रह रही है। याचिका में छात्रा ने कोर्स पूरा करने के लिए हाईकोर्ट से मदद मांगी। वकील ने कोर्ट को बताया कि छात्रा संस्थान को माफी नामा सौंपने को तैयार है।
संस्थान का कहना था कि पिछली माफी में पछतावा नहीं है। कोर्ट ने मामले पर संज्ञान लिया और आईआईटी गांधीनगर को नोटिस जारी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि संस्थान को 29 अप्रैल 2026 तक जवाब देना होगा। नोटिस ईमेल के जरिए भी भेजने की इजाजत दी गई। मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी।यह घटना सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है।
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