दो अक्तूबर को रिटायर हो जाएंगे उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा

उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा दो अक्तूबर को रिटायर हो जाएंगे। अगर बीते दो दशकों की बात की जाए तो मिश्रा के अलावा ऐसा कोई दूसरा मुख्य न्यायाधीश नहीं रहा है, जिसने इतनी अधिक संवैधानिक पीठों का नेतृत्व किया हो। मिश्रा ने ऐसी कई बेंचों का भी नेतृत्व किया है, जो देश की राजनीतिक, धार्मिक और आर्थिक परिस्थिति के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं।

पिछले दिनों दीपक मिश्रा की पांच सदस्यीय नेतृत्व वाली संवैधानिक बेंच ने समलैंगिकों को अपराध बताने वाली धारा 377 को हटाने का फैसला दिया जिसके बाद वह पूरे देश में छा गए। इनके अलावा आधार कार्ड से लेकर अयोध्या तक के गंभीर मामलों की सुनवाई की जानी है। आधार मामले पर कई पक्षों ने याचिका दायर की है।इन याचिकाओं में कहा गया है कि आधार कार्ड से देशवासी की निजता भंग होती है। आधार कार्ड को लेकर करीब साढ़े 4 महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया

अब तक देश के 118 करोड़ लोगों तक आधार पहुंच चुका है और मोदी सरकार ने तमाम योजनाओं के लिए इसे अनिवार्य दस्तावेज के तौर पर मंजूरी दे दी है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने बैंक के खाता खोलने और मोबाइल नंबर लेने के लिए आधार की अनिवार्यता पर रोक लगा दी है। मोदी सरकार का एक राष्ट्र एक पहचान का स्लोगन करो या मरो की स्थिति बना हुआ है। और इसकी सफलता और असफलता दीपक मिश्रा के आने वाले इस फैसले पर निर्भर करती है।

 

इसके अलावा अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला तय करेगा कि आखिर अब कितने सालों में अंतिम निर्णय आ सकेगा।

इसी हफ्ते सबरीमाला मंदिर पर भी अपना फैसला सुनाएंगे। परंपरा के अनुसार इस मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं का प्रवेश वर्जित बताया गया है क्योंकि इस दौरान महिलाएं माहवारी से गुजरती हैं

दूसरा अहम फैसला सरकारी कर्मचारियों में जाति धर्म के नाम पर आरक्षण और प्रमोशन पर आनाहै।

 

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