तेलंगाना हाई कोर्ट ने एक अहम आदेश दिया है। IDBI बैंक ने बडांगपेट के पास नादेरगुल में एक जमीन के टुकड़े से कब्रों को दूसरी जगह हटाने का आदेश देने को कहा था। हाई कोर्ट ने बैंक की इस मांग पर हैरानी जताई। बैंक ने कोर्ट से एक प्राइवेट कंपनी के पास गिरवी रखी जमीन से कब्रें हटाने के निर्देश देने की अपील की थी। बैंक का तर्क है कि वहां कब्रिस्तान होने की वजह से उसकी रिकवरी की कार्यवाही में रुकावट आ रही है।

बैंक ने 2009 में 'मेलेंज क्लोदिंग लिमिटेड' को 2,100 वर्ग गज से ज़्यादा जमीन गिरवी रखकर 3.90 लाख रुपये का टर्म लोन दिया था। कंपनी के डिफॉल्ट करने के बाद, बैंक ने रिकवरी की कार्यवाही शुरू की और 2025 में प्रॉपर्टी की नीलामी की। हालांकि, यह प्रक्रिया तब रुक गई जब जमीन का कब्जा लेने के लिए चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट द्वारा नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर को उस जगह पर हाल ही में दफनाए गए शव मिले।

हाई कोर्ट ने क्या कहा

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस बी. विजयसेन रेड्डी ने कहा कि मरने वालों के भी अधिकार होते हैं। ऐसी स्थितियों में भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। जज ने मामले की सुनवाई 1 जुलाई तक टाल दी और म्युनिसिपल अधिकारियों और पुलिस से जवाब मांगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे विवाद अक्सर लोन देने से पहले बैंकों की अधूरी और कमजोर वेरिफिकेशन प्रक्रिया के कारण पैदा होते हैं।
 

आईडीबीआई बैंक के वकील का तर्क

IDBI बैंक की ओर से पेश वकील सी. रविंदर ने तर्क दिया कि पुलिस और म्युनिसिपल वेरिफिकेशन से यह पुष्टि हुई है कि कब्रें अनधिकृत थीं और 'ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट' या 'तेलंगाना म्युनिसिपैलिटीज़ एक्ट' के तहत किसी मान्यता प्राप्त कब्रिस्तान का हिस्सा नहीं थीं।

बैंक ने आरोप लगाया कि उधार लेने वाले एन. राम ने दूसरों के साथ मिलकर स्थानीय निवासियों के साथ मिलीभगत की और जानबूझकर ज़मीन पर शव दफनाए। बैंक के अनुसार, इस कदम का मकसद धार्मिक भावनाओं का फायदा उठाना और नीलामी में खरीदने वालों को खाली कब्ज़ा सौंपने की अपनी कानूनी ज़िम्मेदारी को रोकना था, जबकि पास में ही गांव का एक पुराना और तय कब्रिस्तान मौजूद था।
 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

अधिकृत कब्रिस्तान के बाहर दफनाए गए शवों को निकालने और दूसरी जगह ले जाने के बारे में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए, बैंक ने कहा कि म्युनिसिपल अधिकारी हस्तक्षेप करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं। बैंक ने अधिकारियों से शवों को निकालने और उन्हें सम्मानपूर्वक किसी अधिकृत कब्रिस्तान में स्थानांतरित करने के निर्देश देने की मांग की।

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