झारखंड के बोकारो जिले से पांच साल पहले लापता हुई एक नाबालिग छात्रा का अब तक कोई सुराग नहीं मिलने पर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने मामले की जांच कर रही सीआईडी (CID) से सवाल किया कि आखिर इतने लंबे समय बाद भी छात्रा को खोजने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने जांच की धीमी रफ्तार पर चिंता जताते हुए कहा कि मामला लंबे समय तक "कोल्ड स्टोरेज" में पड़ा रहा।
पांच साल बाद भी छात्रा का नहीं लगा सुराग
यह मामला बोकारो जिले के पिंडराजोरा थाना क्षेत्र के कुरमा गांव का है। यहां 16 अक्टूबर 2020 को नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक छात्रा रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गई थी। छात्रा उस दिन सुबह करीब 10:45 बजे ट्यूशन पढ़ने के लिए घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। करीब एक घंटे बाद ग्रामीणों को सड़क किनारे उसकी साइकिल और स्कूल बैग मिला। बैग से किताबें बिखरी हुई थीं। इसके बाद से छात्रा का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है।
मां की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई
लापता छात्रा की मां उषा झा द्वारा दायर याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए जांच की प्रगति पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि पांच साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पीड़िता की बरामदगी नहीं हो पाई है, जो गंभीर चिंता का विषय है।
जांच अधिकारी ने चार लोगों पर जताया था संदेह
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि जांच अधिकारी ने 21 सितंबर 2022 को निचली अदालत को जानकारी दी थी कि इस मामले में चार लोग संदेह के दायरे में हैं। इनमें जनता तुरी, रहमाली अंसारी, राम नारायण हेंब्रम और गणेश लाल मिश्रा के नाम शामिल हैं। बताया गया कि इन चारों ने नार्को टेस्ट कराने के लिए सहमति भी दी थी।
तीन का हुआ नार्को टेस्ट, एक को बताया गया अयोग्य
कोर्ट को बताया गया कि चार संदिग्धों में से तीन लोगों का नार्को विश्लेषण (Narco Analysis) टेस्ट कराया गया था, जबकि रहमाली अंसारी को चिकित्सकीय रूप से इस परीक्षण के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इस पर हाईकोर्ट ने सीआईडी से पूछा कि अंसारी को मेडिकल रूप से अयोग्य साबित करने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज पेश किए गए थे।
हाईकोर्ट ने CID से पूछे सख्त सवाल
अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि जब रहमाली अंसारी को उस समय टेस्ट के लिए अयोग्य बताया गया था, तो बाद में यह जांचने की कोई कोशिश क्यों नहीं की गई कि वह अब परीक्षण के लिए फिट है या नहीं। कोर्ट ने कहा कि यह भी स्पष्ट नहीं है कि भविष्य में उसका नार्को टेस्ट कराने के लिए कोई कदम उठाया गया या नहीं।
"कोल्ड स्टोरेज" में पड़ा रहा मामला
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि यह मामला लंबे समय तक "कोल्ड स्टोरेज" में पड़ा रहा। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट के संज्ञान लेने के बाद ही इस वर्ष 20 अप्रैल को मामले की जांच सीआईडी को सौंपी गई। कोर्ट ने जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मामले में तेजी से कार्रवाई करने की जरूरत बताई।
छात्रा की तलाश अब भी जारी
पांच साल से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद छात्रा का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। हाईकोर्ट अब इस मामले की जांच की प्रगति पर लगातार नजर बनाए हुए है और सीआईडी से जवाब मांग रही है। मामले ने एक बार फिर लापता बच्चों की जांच और कानून-व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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