हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने मनाली नगर परिषद की कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने गीले कचरे को करीब 300 किलोमीटर दूर अंबाला भेजने के फैसले पर सवाल उठाते हुए नगर परिषद से इसका स्पष्ट कारण पूछा है।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई में मनाली नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी और SunTan Life Private Limited के अधिकृत प्रतिनिधि को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के आदेश दिए हैं।
निरीक्षण रिपोर्ट में सामने आई गंभीर खामियां
अदालत ने 21 फरवरी 2026 को हुई निरीक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कचरा संयंत्र के आसपास भारी दुर्गंध फैली हुई थी और गंध तथा मक्खियों को नियंत्रित करने की उचित व्यवस्था नहीं पाई गई।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 के तहत जरूरी 100 प्रतिशत स्रोत पृथक्करण नहीं किया जा रहा था। गीला कचरा खुले में पड़े रहने से लीचेट बनकर ब्यास नदी की ओर बह रहा था, जिससे पर्यावरणीय खतरा बढ़ गया।
हजारों टन कचरा अब भी बाकी
निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार नगर परिषद जनवरी 2026 तक 78,464 टन पुराने कचरे में से केवल 32,778।46 टन कचरे का ही निस्तारण कर पाई है। अभी भी 45,685।54 टन कचरे का प्रसंस्करण बाकी है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि जैव-खनन प्रक्रिया वैज्ञानिक तरीके से नहीं अपनाई जा रही और तय दिशा-निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है।
करोड़ों का पर्यावरणीय जुर्माना
ब्यास नदी में बिना उपचार के लीचेट छोड़ने के मामले में नगर परिषद पर 15।30 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया, जिसे परिषद द्वारा जमा किया जा चुका है।
इसके अलावा अवैज्ञानिक तरीके से ठोस कचरा निस्तारण करने पर अक्टूबर 2024 तक नगर परिषद पर 2 करोड़ 62 लाख 77 हजार 591 रुपये का जुर्माना भी लगाया जा चुका है।
हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा है।
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