मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक पिता को अपनी 2 बेटियों की उच्च शिक्षा पूरी करवाने के लिए 46.26 लाख रुपये चुकाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाना माता-पिता की जिम्मेदारी है, यह केवल बुनियादी जरूरतों तक सीमित नहीं है। यह फैसला तब आया, जब मां और बेटियों ने यह दलील दी कि पहले का गुजारा भत्ता (मेंटेनेंस) का आदेश कॉलेज की फीस के लिए पर्याप्त नहीं था।
कॉलेज की फीस के लिए गुजारा भत्ता आदेश नाकाफी
पारिवारिक न्यायालय ने मां के लिए 6,000 रुपये और हर बेटी के लिए 3,000 रुपये का मासिक गुजारा भत्ता तय किया था। मगर, कॉलेज की फीस के मुकाबले यह रकम बहुत कम पड़ रही थी। बेटियों में से एक किर्गिस्तान में मेडिसिन की पढ़ाई कर रही है, जबकि दूसरी जयपुर की मणिपाल यूनिवर्सिटी से BTech कर रही है। हालांकि, पिता ने पैसों की तंगी का दावा किया था, लेकिन उनके वित्तीय रिकॉर्ड कुछ और ही दर्शा रहे थे। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बेटियों की शिक्षा के खर्च से बचना गलत है और पिता को 4 महीने के भीतर यह रकम चुकाने का निर्देश दिया। यदि वे इसमें देरी करते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त ब्याज भी देना पड़ेगा।
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