झारखंड उच्च न्यायालय ने महिला पर्यवेक्षिका (Female Supervisor) प्रतियोगिता परीक्षा में नियुक्ति को लेकर अभ्यर्थियों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद्द करने संबंधी नोटिस को खारिज कर दिया है।

दस्तावेज सत्यापन में त्रुटि का आधार गलत

अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि जेएसएससी ने दस्तावेज वेरिफिकेशन (DV) में त्रुटि निकालकर कई अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद्द कर दी थी। प्रार्थियों की ओर से दलील दी गई कि नियुक्ति नियमावली और विज्ञापन में यह कहीं भी उल्लेख नहीं था कि समाजशास्त्र, मनोविज्ञान या गृहविज्ञान विषय में तीन वर्षीय ऑनर्स की डिग्री अनिवार्य है। विज्ञापन की शर्तों के अनुसार, इन तीनों में से किसी भी विषय के साथ केवल स्नातक (Graduate) होना ही पर्याप्त शैक्षणिक अर्हता थी। प्रार्थी सभी आवश्यक शैक्षणिक योग्यताओं को पूरा करते हैं, इसके बावजूद आयोग ने उन्हें प्रक्रिया से बाहर कर दिया था।

अदालत का कड़ा निर्देश

दोनों पक्षों को सुनने के बाद, हाईकोर्ट ने जेएसएससी के उम्मीदवारी रद्द करने वाले नोटिस को निरस्त (Quash) कर दिया। अदालत ने निम्नलिखित आदेश जारी किए। सभी पात्र प्रार्थियों को तत्काल नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल किया जाए। राज्य सरकार और जेएसएससी आगामी छह सप्ताह के भीतर नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया संपन्न करें।

क्या है पूरा मामला

यह याचिका आकांक्षा कुमारी, अंजु कुमारी एवं अन्य अभ्यर्थियों द्वारा दायर की गई थी। महिला पर्यवेक्षिका के कुल 444 पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया था। अभ्यर्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार सहित अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा, जिसके बाद अदालत ने सुशासन और पारदर्शिता को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला सुनाया।

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