सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को एक महिला अधिवक्ता पर हुए क्रूर हमले की जांच जल्द पूरी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने पीड़िता और उसके बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को भी कहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने जांच को निष्पक्ष और तटस्थ तरीके से करने पर जोर दिया।

मामले का सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: लिया था संज्ञान

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने अधिवक्ता स्नेहा कलिता के एक पत्र के बाद स्वतः संज्ञान लिया था। पत्र में तत्काल हस्तक्षेप और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) पीड़ित मुआवजा योजना के तहत मुआवजे की मांग की गई थी। आरोपों के अनुसार, पीड़िता को 22 अप्रैल को सोनिया विहार में उसके पति ने तलवार से वार कर घायल कर दिया था। पुलिस की स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, प्राथमिकी में जांच अभी जारी है। पीठ ने जांच अधिकारी को जल्द से जल्द जांच पूरी करने का निर्देश दिया। दिल्ली पुलिस को पीड़िता और बच्चों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने को भी कहा गया।

बच्चों की शिक्षा और वित्तीय सहायता

पीठ ने दिल्ली सरकार को पीड़िता की बेटियों को मुफ्त शिक्षा, जिसमें प्लेस्कूल और नियमित स्कूल शामिल हैं, प्रदान करने का निर्देश दिया। शिक्षा विभाग स्कूल फीस, वर्दी, किताबें और सार्वजनिक परिवहन सहित सभी खर्च वहन करेगा। बेटियों को दिल्ली सरकार की नीति के अनुसार वजीफा या वित्तीय सहायता भी मिलेगी। अदालत ने निर्देश दिया कि चार साल और एक साल की दो नाबालिग बेटियों की कस्टडी पीड़िता-मां को सौंपी जाए। नालसा को पीड़िता के पक्ष में 3 लाख रुपये की अंतरिम राशि जारी करने का भी निर्देश दिया गया।

एनटीए भंग करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट पहुंची यूडीएफ

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद के बाद यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (यूडीएफ) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। संगठन ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को उसके वर्तमान स्वरुप में भंग करने की मांग की है। यह याचिका कथित पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद दायर की गई है। यूडीएफ ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल की है। इसमें नीट-यूजी 2026 के संचालन में 'प्रणालीगत और विनाशकारी विफलता' का आरोप लगाया गया है। साथ ही, परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधारों की भी मांग की गई है।

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