गुरुग्राम के शिकोहपुर में एक भूमि सौदे में अनियमितताओं से जुड़े मनी लाॅन्ड्रिंग मामले में ट्रायल कोर्ट की ओर से जारी समन को उद्यमी राॅबर्ट वाड्रा ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
याचिका काे बृहस्पतिवार को न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। वाड्रा ने ट्रायल कोर्ट के 15 अप्रैल के आदेश को चुनौती दी है।
वकील प्रतीक कृष्ण चड्ढा के माध्यम से दायर याचिका में राॅबर्ट वाड्रा ने दलील दी कि इसमें कोई गैर-कानूनी काम शामिल नहीं था और यह लेन-देन पूरी तरह से व्यावसायिक प्रकृति का था।
ट्रायल कोर्ट का आदेश रद करने की मांग
वाड्रा ने अपनी याचिका में कहा कि ट्रायल कोर्ट का आदेश गलत है और इसे रद किया जाना चाहिए। इस मामले में जुलाई 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आरोपपत्र दाखिल किया था और इसके बाद अदालत ने इसका संज्ञान लिया था।
अदालत ने राॅबर्ट वाड्रा को 16 मई को पेश होने का आदेश दिया है। यह पूरा मामला गुरुग्राम के शिकोहपुर में 3.53 एकड़ जमीन के एक प्लाट से जुड़ा है।
धोखाधड़ी से जमीन खरीदने का आरोप
ईडी ने आरोप लगाया कि राबर्ट वाड्रा की फर्म, स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी ने 12 फरवरी 2008 को ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से धोखाधड़ी करके यह जमीन खरीदी थी। ईडी ने राबर्ट वाड्रा को आरोपितों में से एक के रूप में नामित किया।
जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि जमीन अधिग्रहण में झूठे बयान दिए गए थे और दावा किया कि उनके निजी प्रभाव का इस्तेमाल करके एक व्यावसायिक लाइसेंस प्राप्त किया गया था।
ईडी ने ट्रायल कोर्ट के सामने दलील दी कि जमीन के भुगतान के रूप में दिखाए गए 7.5 करोड़ का भुगतान एक चेक के माध्यम से किया गया था, जिसे कभी भुनाया नहीं गया।
ईडी ने दावा किया कि बाद में इस जमीन को डीएलएफ को ज्यादा कीमत पर बेच दिया गया था। ईडी ने गत वर्ष मनी लांड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट (पीएमएलए) के तहत इस मामले के हिस्से के रूप में लगभग 37.64 करोड़ मूल्य की 43 अचल संपत्तियों को कुर्क किया गया था।
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