मेट्रो में महिलाओं की जानकारी बगैर उनकी फोटो खींचने और Instagram पर शेयर करने के एक मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। उच्च न्यायालय ने मामले में आरोपी से कहा है कि तुमने महिलाओं को कहीं भी सुरक्षित नहीं छोड़ा। साथ ही नाराजगी जताई कि 'किस तरह के आदमी हो तुम?' आरोपी की तरफ से दाखिल की गई केस खत्म करने की याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है।

"सोमवार को आरोपी की याचिका पर जस्टिस एम नागप्रसन्न सुनवाई कर रहे थे। उन्होंने आरोपी पर जमकर नाराजगी जाहिर की। साथ ही इस मामले से जुड़े तथ्यों पर हैरानी भी जाहिर की है। लाइव लॉ के अनुसार, उन्होंने कहा, 'तुम आगे और पूछे से महिलाओं की तस्वीर लेते हो और इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हो? किस तरह के आदमी हो तुम? नॉनसेन्स...।'"

'महिलाओं को कहीं सुरक्षित नहीं छोड़ा'

उन्होंने इस मामले को लेकर महिला सुरक्षा के हालात पर भी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा, 'तुमने महिलाओं को मेट्रो में भी सुरक्षित नहीं छोड़ा...। तुमने महिलाओं को कहीं भी सुरक्षित नहीं छोड़ा है।' इस पर आरोपी की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा, 'इस मामले में जांचकर्ता अधिकारी खुद ही शिकायतकर्ता है… कोई अपराध नहीं हुआ है...।'

वकील पर भी भड़के जज

वकील का तर्क सुनकर भी जज ने नाराजगी जाहिर की और कहा कि कोई भी तर्क इसे सही साबित नहीं कर सकता। उन्होंने कहा, 'कोई भी तकनीकी तर्क या बहाना आपके किए हुए को सही नहीं ठहरा सकता... अब समय आ गया है कि हमें कुछ खास मामलों में तकनीकी बारीकियों और पेचीदगियों के पीछे छिपना बंद कर देना चाहिए।'

उच्च न्यायालय ने आरोपी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में जारी कार्यवाही को रोकने से इनकार कर दिया है।

क्या था मामला

बेंगलुरु मेट्रो की लड़कियाँ नाम के एक इंस्टाग्राम अकाउंट से महिलाओं की आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो शेयर किए जा रहे थे। हालांकि, अब यह अकाउंट बंद हो चुका है। अकाउंट यूजर की तरफ से महिलाओं की तस्वीरें उनकी जानकारी के बगैर खींची जा रहीं थीं और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा था।

BNS यानी भारतीय न्याय संहिता की धारा 77 के तहत, वॉयरिज्म को तब अपराध माना गया है जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को उसकी सहमति के बिना किसी निजी कार्य में लिप्त होते हुए देखता है या उसकी तस्वीरें/वीडियो लेता है।

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