क्या पहली पत्नी के निधन के बाद दूसरी महिला पत्नी का होने का दावा करते हुए पति के पेंशन की मांग कर सकती है? यही सवाल पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के सामने आया, जब एक महिला ने दिवंगत मेजर हरि सिंह की दूसरी पत्नी होने के नाते फैमिली पेंशन की मांग की। महिला ने याचिका में हाई कोर्ट को बताया कि पहली पत्नी की मृत्यु के बाद अब वह पेंशन की हकदार है। सुनवाई के दौरान महिला ने ये भी दावा किया कि उसकी शादी तब हुई थी जब पहली पत्नी जीवित थी।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह मामला मेजर हरि सिंह से जुड़ा है, जो सेना से रिटायर होने के बाद एनसीसी (NCC) में होल टाइम ऑफिसर के तौर पर कार्यरत थे। चूंकि ये पद सिविल नेचर का था, इसलिए इसमें पेंशन देने का प्रावधान CCS नियमों के अधीन आता है। वहीं, जब हरि सिंह की दूसरी पत्नी ने विभाग से फैमिली पेंशन का दावा किया। विभाग को सर्विस रिकॉर्ड में ब्यौरा ना मिलने दावे से इंकार कर दिया। महिला ने इस फैसले को पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी।
पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस संदीप मौदगिल ने स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पहली शादी के रहते की गई दूसरी शादी शून्य (Void) मानी जाती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पहली पत्नी की मृत्यु हो जाने मात्र से दूसरी अवैध शादी अपने आप कानूनी रूप से वैध नहीं हो जाती। इंडियन एक्सप्रेस के एक रिपोर्ट के मुताबिक, मेजर हरि सिंह की पहली पत्नी स्वर्ण कौर थी। स्वर्ण कौर के निधन के बाद 1966 में उन्होंने मोहिंदर कौर से दूसरी शादी की, जिनसे उनके दो बच्चे हुए, लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही मोहिंदर कौर उन्हें छोड़कर चली गईं। साल 1989 में हरि सिंह ने प्रिया, जो खुद NCC में मेजर थीं, से गुरुद्वारे में आनंद कारज के जरिए तीसरी शादी की।
वहीं, प्रिया से शादी करने के वक्त हरि सिंह ने झूठ बोलकर खुद को विधुर बताया और यह छिपा लिया कि उनकी दूसरी पत्नी मोहिंदर कौर अभी जीवित हैं। प्रिया ने इस सच्चाई से अनजान रहते हुए शादी के बाद अपनी नौकरी छोड़ दी और 17 नवंबर 1995 को हरि सिंह की मृत्यु तक उनके साथ रहीं। हरि सिंह ने अपनी वसीयत में अपनी सारी संपत्ति प्रिया के नाम कर दी थी, लेकिन दूसरी पत्नी के जीवित रहते ऐसा संभव नहीं था। क्योंकि दोनों के बीच कानूनी रुप से तलाक नहीं हुआ था। वहीं, पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए फैसला सुनाया कि याचिकाकर्ता को विधवा का दर्जा नहीं दिया जा सकता। कानूनी रूप से केवल वही पत्नी पेंशन की हकदार है, जिसकी शादी वैध हो। अदालत ने फैसले के आखिर में कहा कि अवैध रिश्ते में रहने वाली महिला को पत्नी या विधवा के लाभ नहीं मिल सकते।
Picture Source :

