ग्वालियर। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने कोरोना की दूसरी लहर में हर तीसरे वकील को आर्थिक सहायता पहुंचाई है। साथ ही जो 100 वकील संक्रमित हुए थे, उन्हें इलाज के लिए पांच से दस हजार रुपये तक दिए गए। हाई कोर्ट के आदेश पर कोविड खाते में 31 लाख रुपये जमा हुए थे। साथ ही एफडीआर तोड़कर आठ लाख रुपये जुटाए गए। 39 लाख में से 37 लाख रुपये वकीलों को आर्थिक सहायता के रूप में बांटा गया।
कोरोना की दूसरी लहर के चलते न्यायालय बंद हो गए थे। जिला कोर्ट में रिमांड कार्य ही संचालित था। साथ ही हाई कोर्ट में गर्मी की छुटि्टयां लग गई थीं। इससे वकीलों की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। हर वकील के पास काम नहीं था। उन्हें संकट में पैसे की जरूरत थी। वकील हाई कोर्ट बार एसोसिएशन से आर्थिक सहायता की गुहार लगाने लगे। इसके बाद एक प्रोफार्मा तैयार कर बार ने वकीलों से आर्थिक सहायता के लिए आवेदन मांगे थे। आवेदनों की छानबीन की गई। उसके बाद करीब 1200 वकीलों को आर्थिक सहायता दी गई। शहर में 3700 वकील कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं।
ऐसे जुटे पैसे
- हाई कोर्ट से मिलने वाली जमानतों में एक शर्त जोड़ी गई। इस शर्त के अनुसार जिस व्यक्ति को जमानत मिल रही थी, उसे बार के खाते में पैसा जमा करना था। बार ने कोविड-19 के नाम से अलग खाता खोला। कोर्ट के आदेश पर 31 लाख रुपये जमा हुए।
- आठ लाख रुपये की एफडीआर तोड़ी गई। बार अध्यक्ष एमपीएस रघुवंशी का कहना है कि संकट की घड़ी में वकीलों की सहायता के लिए एफडीआर से पैसा लिया गया।
पुरानी कार्यकारिणी के पैसे वितरण का होगा आडिटः हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी ने पूर्व की कार्यकारिणी द्वारा बांटी गई आर्थिक सहायता के आडिट का फैसला लिया है। कोविड-19 की पहली लहर में आर्थिक सहायता बांटी गई थी, लेकिन आर्थिक सहायता बांटने में अनियमितताएं की गई थीं, जिसके चलते कार्यकारिणी में विवाद हुए थे। यहां तक कि कार्यकारिणी को भंग करना पड़ा। इस पूरे सच को वकीलों के सामने लाने के लिए पुरानी कार्यकारिणी के लेन-देन का आडिट कराया जाएगा। इसमें अनियमितता उजागर हो सकती है।
वर्जन-
वकीलों के हित को देखते हुए 1200 वकीलों को 37 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। इससे वकीलों को काफी राहत मिली। कोविड-19 के इलाज के लिए 50 बेड का हास्पिटल भी संचालित किया। इससे वकीलों को इलाज के लिए नहीं भटकना पड़ा।
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