अनुसूचित क्षेत्र (विधियों की एकरूपता) अधिनियम, 1953
(1953 का अधिनियम संख्यांक 16)
[6 मई, 1953]
अनुसूचित क्षेत्रों में प्रवृत्त कतिपय विधियों की आसाम राज्य के
नौगांग और शिवसागर जिलों में प्रवृत्त विधियों
से एकरूपता करने के लिए
अधिनियम
संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम अनुसूचित क्षेत्र (विधियों की एकरूपता) अधिनियम, 1953 है ।
(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में,-
(क) नियत दिन"् से इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के लिए धारा 1 की उपधारा (2) के अधीन नियत की गई तारीख अभिप्रेत है;
(ख) विधि"् से किसी अधिनियम, अध्यादेश, विनियम, नियम, आदेश या उपविधि का उतना भाग अभिप्रेत है जितना कि संविधान की सप्तम् अनुसूची की प्रथम और तृतीय सूचियों में प्रगणित मामलों में किसी से संबंधित है;
(ग) अनुसूचित क्षेत्र"् से अनुसूची में विनिर्दिष्ट क्षेत्र अभिप्रेत हैं ।
3. विधियों की एकरूपता-(1) समस्त विधियां जिनका नियत दिन के ठीक पहले अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार है या जो वहां प्रवृत्त हैं उक्त दिन से अनुसूचित क्षेत्रों में प्रवृत्त नहीं रह जाएंगी, सिवाय उन बातों के लिए जो उक्त दिन के पहले की गई थीं या नहीं की गई थीं, और संदेह दूर करने के लिए एतद्द्वारा यह घोषित किया जाता है कि साधारण खण्ड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) की धारा 6 ऐसी समाप्ति को उसी प्रकार लागू होगी जिस प्रकार वह केन्द्रीय अधिनियम द्वारा अधिनियमिति के निरसन पर होती है ।
(2) समस्त विधियां जिनका नियत दिन के ठीक पहले आसाम राज्य के नौगांग जिले पर विस्तार है या जो वहां प्रवृत्त हैं, उनका उक्त दिन को अनुसूची के पैराग्राफ 1 में विनिर्दिष्ट क्षेत्रों पर यथास्थिति विस्तार होगा या वे प्रवृत्त होंगी ।
(3) समस्त विधियां जिनका नियत दिन के ठीक पहले आसाम राज्य के शिवसागर जिले पर विस्तार है या जो वहां प्रवृत्त हैं, उनका उक्त दिन को अनुसूची के पैराग्राफ 2 में विनिर्दिष्ट क्षेत्रों पर यथास्थिति विस्तार होगा या वे प्रवृत्त होंगी ।
4. संक्रमणकालीन उपबंध-धारा 3 में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार या आसाम की राज्य सरकार, आदेश द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि नियत दिन के 12 मास से अनधिक अवधि के दौरान, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, कोई भी विधि जो अनुसूचित क्षेत्रों में नियत दिन के ठीक पहले प्रवृत्त थी उसमें या उसके किसी विनिर्दिष्ट भाग में प्रवृत्त बनी रही समझी जाएगी, और उसी प्रकार यह अतिरिक्त निदेश भी दे सकेगी कि कोई भी विधि जिसका नियत दिन को अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार होता या जो प्रवृत्त होती, उसमें या उसके किसी विनिर्दिष्ट भाग पर उसका विस्तार किया गया नहीं समझा जाएगा या वह प्रवृत्त नहीं समझी जाएगी ।
5. व्यावृत्तियां-धारा 3 में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी उन समस्त पक्षकारों के बीच के जो कि संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950 से उपाबद्ध अनुसूची के आसाम भाग 1-के मद 2 में विनिर्दिष्ट अनुसूचित जनजातियों में से है या ऐसी अन्य जनजाति या जनजातियों में से है जो कि इस निमित्त विनिर्दिष्ट की गई हो, समस्त वाद, मामले और अन्य विधिक कार्यवाहियां, शिवसागर और नौगांग मिकिर पहाड़ी भू-भाग में न्याय और पुलिस प्रशासन के नियमों के अधीन ऐसे विचारित की जाएंगी और विचारित की जाती रहेंगी मानो यह अधिनियम पारित नहीं हुआ था ।
6. कठिनाइयों को दूर करने के लिए उपबन्ध-यदि धारा 3 के अधीन किसी विधि या विधियों के समूह से अन्य विधि या विधियों के समूह में संक्रमण के संबंध में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचित आदेश द्वारा कठिनाई को दूर करने के लिए ऐसे उपबंध कर सकेगी जैसे कि वह ठीक समझे ।
अनुसूची
[धारा 2 (ग) देखिए]
1. (क) गोभा मौजा का भाग जो सोनाई कच्छी आरक्षित वन सहित मूलतः मिकिर पहाड़ी भू-भाग में था;
(ख) कोलाहाट आरक्षित वन;
(ग) लुमडींग आरक्षित वन का भाग जो मूल मिकिर पहाड़ी भू-भाग के लंका मौजा में आता है;
(घ) नीचे वर्णित रेखा के पश्चिम में लुमडींग मौजा का भाग :-
जहां निमाती मौजा की पूर्वी सीमा काकीजान से मिलती है, उस बिन्दु से वह रेखा काकीजान के ऊपर की ओर उसके उद्गम तक जाती है; वहां से दक्षिण पूर्वी दिशा में एक सीधी रेखा में पहाड़ी श्रेणियों को पार करते हुए पापरी धारा और लंकाजान के संगम तक जाती है; वहां से लंकाजान के ऊपर की ओर उसके उद्गम तक जाती है, वहां से दक्षिणी दिशा में लुमडींग आरक्षित वन की पूर्वी सीमा के साथ-साथ लंका नासांग नदी और बड़ा लंगफेर नदी के जंक्शन तक जाती हैं और वहां से एक सीधी रेखा में ठीक दक्षिण की तरफ वहां तक जाती है जहां वह रेखा लुमडींग मौजा की दक्षिणी सीमा से मिलती है;
(ङ) दवाक आरक्षित वन;
(च) स्वांग आरक्षित वन;
(छ) दीजू घाटी, दक्षिण आरक्षित वन;
(ज) बगसेर आरक्षित वन;
2. (क) पन्बरी आरक्षित वन;
(ख) अपर दायगुरंग आरक्षित वन;
(ग) लोअर दायगुरंग आरक्षित वन;
(घ) घटियानी पाथर, दोखारा पाथर और मूल मिकिर पहाड़ी भू-भाग के मौजा मारंगी का मुरफुलोनी की ग्राम भूमियां;
(ङ) धनसिरी नदी के पूर्व और गर्मपानी कालियानी मार्ग के उत्तर पूर्व के बरपाथर मौजा का भाग;
(च) मूल मिकिर पहाड़ी भू-भाग में घिलाधारी मौजा का भाग;
(छ) धनसिरी नदी के पूर्व में सरूपाथर मौजा का भाग ।
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