रेल यात्री सीमा-कर अधिनियम, 1956
(1956 का अधिनियम संख्यांक 69)
[12 दिसम्बर 1956]
कतिपय तीर्थ स्थानों अथवा ऐसे स्थानों से या उन जहां हाट-बाजार,
मेले या प्रदर्शनियां की जाती हैं, रेल द्वारा वहन किए जाने वाले
यात्रियों पर सीमा-कर के उद्ग्रहण का उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के सातवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम रेल यात्री सीमा-कर अधिनियम, 1956 है ।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) “अधिकतम दर" से सीमा-कर की वे दरें अभिप्रेत हैं जो अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं ;
(ख) “मेला" से किसी धार्मिक उत्सव के अवसर पर सार्वजनिक सम्मेलन अभिप्रेत है ;
(ग) “अधिसूचित स्थान" से ऐसा कोई तीर्थ स्थान या कोई स्थान अभिप्रेत है जहां कोई हाट-बाजार, मेला या प्रदर्शनी की जा रही है या की जानी सम्भाव्य है और जिसे केन्द्रीय सरकार ने, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अधिसूचित स्थान घोषित किया है ;
(घ) “रेल प्रशासन" का वही अर्थ है जो भारतीय रेल अधिनियम, 1890 (1890 का 9) में है ।
3. अधिसूचित स्थान से या वहां को रेल द्वारा ले जाए जाने वाले यात्रियों पर सीमा-कर-(1) इस अधिनियम के अन्य उपबन्धों के अधीन रहते हुए यह है कि किसी अधिसूचित स्थान से या वहां को रेल द्वारा ले जाए जाने वाले सभी यात्रियों पर, प्रत्येक रेलवे टिकट के लिए (चाहे वह एक तरफा टिकट हो या वापसी टिकट), अधिकतम दरों से अनधिक ऐसी दरों पर जिन्हें केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे, सीमा-कर उद्ग्रहीत किया जाएगा और ऐसी अधिसूचना में वह तारीख विनिर्दिष्ट होगी जिससे और वह अवधि भी विनिर्दिष्ट हो सकेगी जिस तक सीमा-कर उद्ग्रहीत होगा :
परन्तु यदि अधिसूचना में ऐसी अवधि विनिर्दिष्ट नहीं है तो सीमा-कर तब तक उद्ग्रहणीय होगा जब तक यह अधिनियम प्रवृत्त रहता है ।
(2) अधिकतम दरों के अधीन-
(क) विभिन्न अधिसूचित स्थानों के संबंध में सीमा-कर की विभिन्न दरें नियत की जा सकेंगी ; और
(ख) कम-दूरी वाले यात्रियों और अधिक दूरी वाले यात्रियों के संबंध में सीमा-कर की विभिन्न दरें नियत की जाए सकेंगी :
परन्तु कम-दूरी वाले यात्रियों के संबंध में दर अधिक दूरी वाले यात्रियों के संबंध में दर से सदा कम होगी ।
स्पष्टिकरण-इस उपधारा में, किसी अधिसूचित स्थान से या उसको एक सौ पचास मील से अनधिक दूरी तक रेल द्वारा यात्रा करने वाले यात्री को कम दूरी वाला यात्री माना जाएगा तथा रेल द्वारा यात्रा करने वाले किसी अन्य यात्री को अधिक-दूरी वाला यात्री माना जाएगा ।
4. कुछ सीमाओं के भीतर सीमा-कर उद्ग्रहीत न किया जाना-किसी अधिसूचित स्थान से या उसको किसी ऐसे रेलवे स्टेशन को या उससे जो, उसे अधिसूचित स्थान से चालीस मील की परिधि के भीतर या उस स्थान से इतनी कम दूरी के भीतर, जितनी केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे, स्थित है रेल द्वारा यात्रा करने वाले किसी यात्री पर सीमा-कर उद्ग्रहीत नहीं किया जाएगा ।
5. कर की दरों में परिवर्तन करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, समय-समय पर, सामान्यतया रेल यात्रियों के या किसी श्रेणी के रेल यात्रियों के संबंध में धारा 3 के अधीन अधिसूचित स्थान के संबंध में उद्ग्रहीत सीमा-कर की दरों को परिवर्तित कर सकेगी ।
6. उद्ग्रहण बंद करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, घोषित कर सकेगी कि किसी अधिसूचित स्थान के संबंध में उद्ग्रहीत सीमा-कर, ऐसी तारीख से जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, अधिसूचना में विनिर्दिष्ट कारणों से, उस स्थान के संबंध में उद्ग्रहीत नहीं किया जाएगा ।
7. कर वसूल करने का ढंग-(1) इस अधिनियम के अधीन उद्ग्रहीत सीमा-कर रेल प्रशासन द्वारा किराए पर अधिभार के रूप में संगृहीत किया जाएगा और जहां उसका इस प्रकार संग्रहण किया जाता है वहां रेल प्रशासन को उसकी वसूली के लिए सभी शक्तियां और उपचार इस प्रकार प्राप्त होंगे मानो वह ऐसा रेट या किराया है जिसे रेल प्रशासन भारतीय रेल अधिनियम, 1890 (1890 का 9) के अधीन उद्ग्रहीत करने के लिए सशक्त है ।
(2) किसी अधिसूचित स्थान की बाबत माने जा सकने वाले कर के कुल आगमों का इतना भाग जितना केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर अभिनिश्चित किया जाए, कर के संग्रहण-खर्च को पूरा करने के लिए काट लिया जाएगा ।
8. जब इस अधिनियम के अधीन सीमा-कर उद्ग्रहीत किया गया है तब रेल यात्रियों पर कोई अन्य सीमा-कर न लगना-किसी विधि में किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी अधिसूचित स्थान के संबंध में, रेल द्वारा वहन किए जाने वाले यात्रियों पर सीमा-कर इस अधिनियम के अधीन उद्ग्रहीत किया जाता है वहां उस स्थान के संबंध में ऐसे यात्रियों पर किसी अन्य विधि के अधीन कोई अन्य सीमा-कर उद्ग्रहीत नहीं किया जाएगा ।
9. छूटें-इस अधिनियम या किसी अन्य विधि की किसी बात से यह नहीं समझा जाएगा कि वह रेल द्वारा ले जाए जाने वाले निन्मलिखित श्रेणियों के यात्रियों पर सीमा-कर के उद्ग्रहण का प्राधिकार देती है, अर्थात् :-
(क) बच्चे, जो तीन वर्ष से अधिक आयु के नहीं हैं ;
(ख) रेल अधिपत्रों (वारण्ट) पर यात्रा करने वाले पुलिस अधिकारी ;
(ग) सैनिक अधिपत्रों (वारण्ट) पर यात्रा करने वाले व्यक्ति और आरक्षित यानों में यान-दर से यात्रा करने वाले सैनिक ; और
(घ) निःशुल्क पास धारक ।
अनुसूची
सीमा-कर की अधिकतम दरें
[धारा 2 (क) देखिए]
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स्थान की श्रेणी
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सीमा-कर की |
अधिकतम दरें |
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(क) प्रत्येक एक तरफा टिकट के संबंध में |
(ख) प्रत्येक वापसी टिकट के संबंध में |
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वातानुकूलित या प्रथम श्रेणी द्वितीय श्रेणी तृतीय श्रेणी |
रु. आ. पा. 1 8 0 1 0 0 0 8 0 |
रु. आ. पा. 3 0 0 2 0 0 1 0 0
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